आयुर्वेदिक दवाओं के नाम पर 150 करोड़ की ठगी! नौ शहरों में फैला था ठगी का जाल
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Kanpur Big Crime: उत्तर प्रदेश के कानपुर से एक बड़ी खबर सामने आ रही है. यहां एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश हुआ है, जो आयुर्वेदिक दवाओं की किट बेचने की आड़ में लोगों से 12 से 30 हजार रुपये तक जमा कराता था. बदले में 25 से 50 हजार रुपये महीने की नौकरी और मोटी कमाई का लालच दिया जाता था. अबतक 150 करोड़ से ज्यादा की चपत लोगों को ये लगा चुके हैं.
जालसाजों का भंडाफोड़.
कानपुर : कानपुर से एक बड़ी खबर सामने आ रही है. पुलिस ने एक ऐसे नेटवर्क मार्केटिंग गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जिसने आयुर्वेदिक दवाओं के नाम पर नौकरी और मोटी कमाई का सपना दिखाकर देशभर में 60 हजार से ज्यादा लोगों से 150 करोड़ से ज्यादा की चपत लगा दी. पुलिस ने छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है. इन पकड़े गए आरोपियों ने नव भारत के नौ शहरों में ब्रांच खोलकर कई युवाओं और महिलाओं को ठगी का शिकार बनाया.
पीड़ित की FIR पर पुलिस ने पकड़े गए आरोपियों से जब कड़ाई से पूछताछ की तो चौंकाने वाले मामले सामने आए. डेढ़ महीने में कानपुर में 2000 से ज्यादा को अपनी ठगी का शिकार बनाया. गिरोह का सरगना इनायतुल्लाह और कंपनी के 2 एमडी समेत कई आरोपी अभी फरार हैं. कानपुर के अर्रा रोड स्थित मंगलम गार्डन में चल रहे सेमिनार की सूचना पर पुलिस आयुक्त रघुवीर लाल के निर्देश पर डीसीपी दक्षिण एडिशनल DCP ऑपरेशन सुमित रामटेक के नेतृत्व में क्राइम ब्रांच की 25 सदस्य टीम ने छापा मारा. प्रोडक्ट बेचने, हाई रोल सैलरी प्रमोशन, मोटिवेशन के साथ स्क्रीन पर इमेजिनेशन की मूवी दिखाकर ढाई सौ से ज्यादा युवाओं को प्रोडक्ट सेल फैमिली ट्री की ट्रेनिंग दी जा रही थी. पुलिस की छापेमारी के बाद वहां मौजूद 6 युवा ट्रेनर को पकड़ा जो बिलो स्टैंडर्ड अनरजिस्टर्ड प्रोडक्ट्स की सेल और मेंबरशिप की क्लासेस ले रहे थे.
आरोप है कि विन मेकर आयुर्वेदा प्राइवेट लिमिटेड नाम से नेटवर्क मार्केटिंग कंपनी चलाई जा रही थी. इसके जरिए उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड समेत कई राज्यों के बेरोजगार युवाओं को नौकरी, ऊंची सैलरी और जल्दी अमीर बनने का सपना दिखाकर नेटवर्क से जोड़ा जाता था. गिरफ्तार आरोपियों में बिहार के बेगूसराय निवासी रविंद्र यादव, पटना के मनेर निवासी कमलेश कुमार, भोजपुर के शाहपुर निवासी मंतोष पासवान, पश्चिम बंगाल के साउथ 24 परगना निवासी रोहित शॉ, मध्य प्रदेश के दतिया निवासी मंगल शाक्य और देवरिया निवासी राजू कुमार शामिल हैं. वहीं गिरोह का सरगना विजय कुशवाहा, इनामुलहक और उनकी टीम के 10 से अधिक सदस्य फरार हैं.
पुलिस के मुताबिक गिरोह बिना पंजीकरण वाली आयुर्वेदिक दवाओं की किट बेचने की आड़ में लोगों से 12 से 30 हजार रुपये तक जमा कराता था. बदले में 25 से 50 हजार रुपये महीने की नौकरी और मोटी कमाई का लालच दिया जाता था. नए लोगों को अलग-अलग होटलों में ठहराकर ट्रेनिंग दी जाती और फिर बड़े-बड़े सेमिनारों में ले जाकर लग्जरी लाइफस्टाइल, प्रमोशन, बाइक और इनाम का झांसा देकर नेटवर्क बढ़ाने के लिए प्रेरित किया जाता था.
जांच में सामने आया कि युवाओं का मनोवैज्ञानिक तरीके से ब्रेनवॉश किया जाता था. हर सदस्य पर दो नए लोगों को जोड़ने का दबाव बनाया जाता था. ऐसा नहीं करने पर वेतन रोकने और जमा रकम वापस न करने की धमकी दी जाती थी. पुलिस का दावा है कि देशभर में 60 हजार से ज्यादा लोग 150 करोड़ से ज्यादा की ठगी का शिकार बन चुके हैं. इस जाल में करीब दो हजार लोग सिर्फ कानपुर यूनिट से जुड़े थे. पुलिस की स्पेशल ऑपरेशन टीम सरगना की तलाश में बिहार के लिए रवाना हुई है.
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Kavya Mishra is working with News18 Hindi as a Senior Sub Editor in the regional section (Uttar Pradesh, Uttarakhand, Haryana and Himachal Pradesh). Active in Journalism for more than 7 years. She started her j…और पढ़ें