इस खेती से किसान बन जाएंगे मालामाल! कम लागत में होगी छप्परफाड़ कमाई, बंपर है डिमांड

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इस खेती से किसान बन जाएंगे मालामाल! कम लागत में होगी छप्परफाड़ कमाई, बंपर है डिमांड


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Shatavari farming: कौशांबी के किसान बनवारी लाल शतावार की खेती कर रहे हैं, जिससे कम समय और लागत में अधिक मुनाफा मिलता है. शतावार औषधि से दूध की मात्रा बढ़ती है और कमजोरी दूर होती है. इसकी कीमत ₹1000-₹1200 किलो ह…और पढ़ें

उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले के शहजादपुर गांव के रहने वाले किसान बनवारी लाल तरह-तरह की फसलों की खेती कर रहे हैं. पारंपरिक फसलों की खेती के साथ ही वह औषधीय पौधों की खेती की कर रहे हैं. जिसमें वह शतावार की खेती भी कर रहे हैं. शतावार की खेती से किसानों को कम समय और कम लागत में अधिक मुनाफा मिलता  है. शतावर की खेती लगभग 18 महीने की होती है. किसान अपने फसलों के साथ साथ खेतो के  मेड़ों मे भी इसे उगा सकते हैं.  इससे किसान को दोहरा फायदा हो सकता है.   दुधारू पशु या फिर जिन महिलाओं में  दूध की कमी होती है, इस औषधि  के  इस्तेमाल करने से दूध की मात्रा अधिक बढ़ जाती है. इससे पशु भी कभी कमजोर नहीं हो सकता है.  शतावर का प्रयोग करने इंसान हो या जानवर सबकी  कमजोरी  खत्म हो जाती है. क्योंकि यह बहुत ही ताकतवर औषधि होती है. इस औषधि की कीमत लगभग 1000 से ₹1200 किलो की कीमत होती है.

किसान बनवारी लाल ने बताया कि शतावर की खेती करने से किसान की आय दोगुनी हो जाती है. अगर किसान के पास खेतों में जगह नहीं बची है, तो इस औषधि को खेत के मेड़ों के किनारे में भी लगा सकते हैं. अगर इस औषधि को पूरे खेत में की जाए तो इससे और भी अधिक लाभ हो सकता है. क्योंकि सतावर एक बहुत ही अच्छी औषधि होती है. इसको प्रयोग करने से शरीर में ताकत आती है. इसका इस्तेमाल पूजा पाठ  में भी किया जाता है. इस औषधि को दुधारू पशुओं के लिए इस्तेमाल किया जाता है. जिससे दूध की मात्रा भी बढ़ जाती है. इसको इस्तेमाल करने से पशु कभी कमजोर भी नहीं हो सकता है. अगर जो स्त्रियां बच्चों को स्तनपान कराती हैं अगर वह भी इस औषधि का इस्तेमाल करते हैं तो उन्हें दूध की कमी नहीं होगी. इससे बच्चा भी स्वस्थ रहेगा. अगर इस औषधि को पशुओं को खिलते हैं तो इसे चारे में मात्र 20 से 25 ग्राम गोल मिलकर पशुओं को खिलाएं, ताकि इससे दूध की मात्रा बढ़ जाए. यह औषधि पशुओं के लिए लाभदायक होती है.

इस औषधि के एक पौधे से लगभग 15 से 20 किलो की जड़ निकलती है, जिसे शतावर कहा जाता है. शतावर की फसल 18 माह की होती है. इसे जमीन से खोदकर निकाला जाता है. फिर इसे साफ करके गर्म पानी से उबालकर इसकी छिलाई की जाती है. फिर इसे थोक के भाव पर कानपुर के व्यापारी खरीदने के लिए आते हैं. इसकी कीमत 1000 से लेकर ₹1200 तक मिल जाती  है.

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