इस मंदिर में भगवान कृष्ण को दूध नहीं, मिट्टी के पेड़ों का लगता है भोग
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Brahmand Ghat: मथुरा के ब्रह्मांड घाट पर स्थित मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी मां यशोदा को मुख में ब्रह्मांड दिखाया था. यहां मिट्टी के पेड़ों का भोग चढ़ाया जाता है.
हाइलाइट्स
- मथुरा के ब्रह्मांड घाट पर श्रीकृष्ण ने यशोदा को ब्रह्मांड दिखाया था.
- मंदिर में मिट्टी के पेड़ों का भोग चढ़ाया जाता है.
- हर दिन हजारों श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं.
मथुरा: उत्तर प्रदेश के मथुरा में एक ऐसा मंदिर है जो द्वापर युग की उस दिव्य लीला को संजोए हुए है, जब भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी मां यशोदा को अपने मुख में ब्रह्मांड के दर्शन कराए थे. यह मंदिर न सिर्फ आस्था का केंद्र है, बल्कि श्रद्धालुओं को भगवान की लीलाओं की सजीव अनुभूति भी कराता है. हर दिन यहां हजारों श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं और इस पावन स्थल की महिमा का अनुभव करते हैं.
ब्रजभूमि में श्रीकृष्ण की हर लीला का एक विशेष महत्व है—कहीं गोचारण लीला, तो कहीं गोपियों के वस्त्र चुराने की लीला. इन्हीं में से एक है ब्रह्मांड लीला, जो मथुरा से लगभग 20 किलोमीटर दूर स्थित रमणरेती क्षेत्र में स्थित ब्रह्मांड घाट पर घटित हुई थी.
यहां के मंदिर के पुजारी रामकृष्ण ने बताया कि जब बालकृष्ण अपनी मां यशोदा के साथ यमुना तट पर आते थे, तो वे वहां खेलते हुए मिट्टी खा लिया करते थे. एक दिन माता यशोदा ने जब श्रीकृष्ण को ऐसा करते देखा, तो डांटते हुए कहा कि अपना मुंह खोलो. जैसे ही कान्हा ने मुंह खोला, मां यशोदा को उसमें पूरा ब्रह्मांड दिखाई दिया—ग्रह, नक्षत्र, आकाशगंगा, जीव-जंतु और समस्त संसार. पुजारी के अनुसार, यह लीला आज भी यहां की मिट्टी में बसी हुई है, और ब्रह्मांड घाट पर आने वाला हर भक्त इसे महसूस कर सकता है.
यहां एक खास परंपरा भी निभाई जाती है. पुजारी ने बताया कि चूंकि भगवान श्रीकृष्ण ने यहां मिट्टी खाई थी, इसलिए यहां उन्हें मिट्टी से बने पेड़ों का भोग लगाया जाता है. यह परंपरा सालों से चली आ रही है.
मंदिर पर आने वाले दर्शनार्थी इन पेड़ों को लेकर जाते हैं, खाते भी हैं और मंदिर पर भी भोग लगाते हैं.
श्रद्धालुओं की मान्यता है कि जब उनकी मनोकामना पूरी हो जाती है, तो वे बाल रूप में विराजमान श्रीकृष्ण को विशेष रूप से मिट्टी के पेड़े का भोग अर्पित करते हैं. इस भोग को पवित्रता और आस्था का प्रतीक माना जाता है.