एक बार लगाएं, सालों तक कमाएं, अमरूद की इस तकनीक से होगी रिकॉर्ड तोड़ कमाई

0
एक बार लगाएं, सालों तक कमाएं, अमरूद की इस तकनीक से होगी रिकॉर्ड तोड़ कमाई


होमताजा खबरकृषि

एक बार लगाएं, सालों तक कमाएं, अमरूद की इस तकनीक से होगी रिकॉर्ड तोड़ कमाई

Last Updated:

Guava Farming Benefits: कम लागत में बंपर कमाई की चाह रखने वाले किसानों के लिए अमरूद की बागवानी एक बेहतरीन और मुनाफेदार विकल्प साबित हो रही है. पारंपरिक फसलों की तुलना में अमरूद के बागों में कम पानी और बेहद कम रखरखाव की जरूरत होती है. शाहजहांपुर के एक प्रगतिशील युवा किसान के अनुभवों के आधार पर जानिए कि कैसे एल-49 और इलाहाबादी सफेदा जैसी उन्नत किस्मों और आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल करके आप अपने छोटे से खेत से भी सालभर रिकॉर्ड तोड़ मुनाफा कमा सकते हैं.

शाहजहांपुर: कम लागत में मोटी कमाई करने की चाह रखने वाले किसान पारम्परिक खेती के साथ बागवानी की ओर रुख करे रहे हैं. क्योंकि पारंपरिक फसलों के मुकाबले अमरूद के बाग कम रखरखाव और सीमित पानी में भी बंपर पैदावार देते हैं. आज के दौर में वैज्ञानिक तकनीकों और उन्नत किस्मों का उपयोग करके किसान अपने छोटे से खेत को भी मुनाफे में बदल सकते हैं. बाजार में सालभर अमरूद की भारी मांग रहने के कारण इसकी बागवानी फायदे का सौदा साबित होती है. सही समय पर सही प्रबंधन करके आप भी इस आधुनिक खेती से रिकॉर्ड तोड़ मुनाफा कमा सकते हैं.

प्रगतिशील युवा किसान रनजोद सिंह ने बताया कि अमरूद की बागवानी में सफलता के लिए सही मिट्टी का चुनाव करना बेहद जरूरी है. कृषि वैज्ञानिक बताते हैं कि जलभराव वाली जमीन अमरूद के पौधों की दुश्मन है, इसलिए हमेशा अच्छे जल निकासी वाली बलुई दोमट मिट्टी का ही चुनाव करें. इसके अलावा, रोपण से पहले गड्ढों की तैयारी और जैविक खाद का सही अनुपात पौधों को शुरुआती मजबूती देता है. एल-49 (लखनऊ-49) और इलाहाबादी सफेदा जैसी हाइब्रिड किस्मों को लगाने से बंपर मुनाफा मिलता है. क्योंकि इनमें रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक होती है और फलों की गुणवत्ता बाजार के अनुकूल बेहतरीन मिलती है.

खेत की तैयारी और सही समय
अमरूद का बाग लगाने के लिए जून और जुलाई का महीना सबसे उत्तम माना जाता है. सबसे पहले ऐसी उपजाऊ जमीन का चयन करें जहां पानी न रुकता हो. इसके बाद खेत में दो-दो फीट गहरे और चौड़े गड्ढे खोद लें. इन गड्ढों को कुछ दिनों के लिए धूप में खुला छोड़ दें ताकि मिट्टी के हानिकारक बैक्टीरिया खत्म हो जाएं. इसके बाद इनमें गोबर की सड़ी खाद, केंचुआ खाद और साफ मिट्टी को मिलाकर अच्छे से भर दें, जिससे मानसून की पहली बारिश होते ही जमीन रोपण के लिए पूरी तरह तैयार हो जाए.

उन्नत किस्मों का चयन
बेहतर मुनाफे के लिए पारंपरिक किस्मों की जगह उन्नत और प्रमाणित किस्मों के पौधों का ही चुनाव करना चाहिए. आज के समय में ‘एल-49’ और ‘इलाहाबादी सफेदा’ जैसी किस्में किसानों की पहली पसंद बनी हुई हैं. इन किस्मों के फल आकार में बड़े, स्वाद में मीठे और अंदर से ठोस होते हैं, जिसके कारण इनकी शेल्फ लाइफ लंबी होती है. बाजार में इन खास किस्मों की मांग हमेशा ऊंची रहती है, जिससे किसानों को उपज के बहुत बढ़िया दाम मिलते हैं.

रोपण की आधुनिक तकनीक
मानसून की शुरुआत होते ही तैयार किए गए गड्ढों में पौधों का रोपण करें. आधुनिक बागवानी में पौधों के बीच की दूरी का विशेष ध्यान रखा जाता है. सामान्यतः पौधों को 6×6 मीटर या सघन बागवानी के तहत 3×3 मीटर की दूरी पर लगाना चाहिए. इस तकनीक से पौधों को पर्याप्त हवा, धूप और पोषण मिलता है. सही दूरी होने से पौधों का विकास तेजी से होता है, बीमारियों का खतरा कम रहता है और बाद में फलों की तुड़ाई के साथ-साथ खेत प्रबंधन में भी बहुत आसानी होती है.

सिंचाई, देखभाल और कमाई 
अमरूद के पौधों को शुरुआती दिनों में नियमित लेकिन हल्की सिंचाई की जरूरत होती है. इसके लिए ‘ड्रिप इरिगेशन’ यानी टपक सिंचाई तकनीक सबसे बेस्ट है, जो पानी और लागत दोनों बचाती है. समय-समय पर अनचाही टहनियों की कटाई-छंटाई करते रहें, ताकि पौधे का आकार सही रहे और फल बड़े आएं. रोपण के दो से तीन साल बाद बाग फल देना शुरू कर देता है. सही देखभाल से प्रति पेड़ भारी मात्रा में पैदावार मिलती है, जो सीधे आपकी जेब में बंपर मुनाफा लाती है.

About the Author

Seema Nath

सीमा नाथ 6 साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत शाह टाइम्स में रिपोर्टिंग के साथ की जिसके बाद कुछ समय उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम …और पढ़ें



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *