एक बार लगाओ, 5 साल खिलाओ…ये घास पशुपालकों के लिए वरदान, कभी खत्म नहीं होगा हरा चारा

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एक बार लगाओ, 5 साल खिलाओ…ये घास पशुपालकों के लिए वरदान, कभी खत्म नहीं होगा हरा चारा


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एक बार लगाओ, 5 साल खिलाओ…ये घास पशुपालकों के लिए वरदान

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Napier Grass Benefits : नेपियर घास कम समय में तैयार हो जाती है. एक बार लगाने के बाद कई साल तक इसकी कटाई की जा सकती है. समय पर सिंचाई, पोषण प्रबंधन और नियमित कटाई का ध्यान रखें, तो पशुपालक कम लागत में सालभर भरपूर हरा चारा पा सकते हैं. इससे पशुपालन की लागत घटती है, दूध उत्पादन बढ़ता है और किसानों की आय में भी वृद्धि होती है. रायबरेली के कृषि एक्सपर्ट शिव शंकर वर्मा लोकल 18 से बताते हैं कि इसकी अच्छी बढ़वार के लिए 25 से 35 डिग्री सेल्सियस तापमान आदर्श रहता है. जलभराव वाली भूमि से बचना चाहिए, क्योंकि इससे जड़ों के सड़ने का खतरा बढ़ जाता है. नेपियर घास की पहली कटाई रोपाई के 60 से 75 दिन बाद की जाती है. इसके बाद हर 40 से 50 दिन के अंतराल पर कटाई की जा सकती है.

दूध उत्पादन बढ़ाने और पशुओं को सालभर पौष्टिक हरा चारा उपलब्ध कराने के लिए किसान नेपियर घास की खेती तेजी से अपना रहे हैं. यह घास कम समय में तैयार हो जाती है और एक बार लगाने के बाद कई वर्षों तक लगातार कटाई की जा सकती है. इसमें प्रोटीन, फाइबर और पोषक तत्व अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं, जिससे गाय, भैंस और बकरियों का स्वास्थ्य बेहतर रहता है और दुग्ध उत्पादन में भी सुधार होता है.

रायबरेली जिले के राजकीय कृषि केंद्र शिवगढ़ के प्रभारी अधिकारी शिव शंकर वर्मा (बीएससी एग्रीकल्चर डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय, फैजाबाद) लोकल 18 से बताते हैं कि नेपियर घास की खेती के लिए गर्म और आर्द्र जलवायु सबसे उपयुक्त मानी जाती है. इसकी अच्छी बढ़वार के लिए 25 से 35 डिग्री सेल्सियस तापमान आदर्श रहता है. हालांकि, उचित सिंचाई की व्यवस्था होने पर इसे देश के अधिकांश हिस्सों में सफलतापूर्वक उगाया जा सकता है. जलभराव वाली भूमि से बचना चाहिए, क्योंकि इससे जड़ों के सड़ने का खतरा बढ़ जाता है.

शिव शंकर वर्मा बताते हैं कि खेती शुरू करने से पहले खेत की 2–3 बार अच्छी तरह जुताई करें और मिट्टी को भुरभुरा बना लें. अंतिम जुताई के समय प्रति एकड़ 8 से 10 टन अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद या कम्पोस्ट मिलाएं. अगर मिट्टी परीक्षण की रिपोर्ट उपलब्ध हो, तो उसी के अनुसार उर्वरकों का प्रयोग करना बेहतर रहता है.

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शिव शंकर वर्मा के मुताबिक, नेपियर घास की बुवाई बीज से कम और तनों की कलम (स्टेम कटिंग) या जड़ों वाले स्लिप्स के माध्यम से अधिक की जाती है. पौधों के बीच लगभग 60 सेंटीमीटर और कतारों के बीच 90 सेंटीमीटर की दूरी रखें. इससे पौधों को पर्याप्त जगह मिलती है और उनकी बढ़वार अच्छी होती है.

शिव शंकर वर्मा बताते हैं कि रोपाई के तुरंत बाद हल्की सिंचाई करें. गर्मी के मौसम में 7 से 10 दिन के अंतराल पर और सर्दियों में 15 से 20 दिन के अंतराल पर सिंचाई करना पर्याप्त होता है. बरसात के मौसम में खेत से अतिरिक्त पानी की निकासी की उचित व्यवस्था रखें.

शिव शंकर वर्मा के अनुसार, फसल की अच्छी वृद्धि के लिए पहली कटाई के बाद नाइट्रोजन युक्त उर्वरक का प्रयोग किया जा सकता है. खेत को खरपतवार मुक्त रखें. समय-समय पर निराई-गुड़ाई करने से पौधों की बढ़वार तेज होती है और उत्पादन भी बढ़ता है.

नेपियर घास की पहली कटाई आमतौर पर रोपाई के 60 से 75 दिन बाद की जाती है. इसके बाद हर 40 से 50 दिन के अंतराल पर कटाई की जा सकती है. एक बार खेत तैयार होने के बाद यह घास 3 से 5 वर्षों तक लगातार उत्पादन देती रहती है. उचित देखभाल के साथ किसान एक वर्ष में कई बार हरे चारे की कटाई कर सकते हैं, जिससे चारे की कमी की समस्या काफी हद तक दूर हो जाती है.

शिव शंकर वर्मा बताते हैं कि नेपियर घास को हमेशा फूल आने से पहले काटना चाहिए. इस अवस्था में घास अधिक मुलायम, पौष्टिक और आसानी से पचने योग्य होती है. इसे दूसरे हरे चारे या सूखे चारे के साथ मिलाकर पशुओं को खिलाने से संतुलित पोषण मिलता है.



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