एक साथ 5 साइक्लोनिक सर्कुलेशन, 13 राज्यों में आंधी-तूफान, UP-बिहार में क्या हाल?

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एक साथ 5 साइक्लोनिक सर्कुलेशन, 13 राज्यों में आंधी-तूफान, UP-बिहार में क्या हाल?


Today Weather Live: देश में मौसम इन दिनों किसी रोलरकोस्टर से कम नहीं है. सुबह की शुरुआत तेज धूप से होती है, तो दोपहर तक गर्म हवाएं लोगों को झुलसा देती हैं. लेकिन शाम होते-होते अचानक तेज हवाएं चलने लगती हैं और कहीं-कहीं बादल बरस पड़ते हैं. यही उतार-चढ़ाव अब आम लोगों की दिनचर्या को प्रभावित करने लगा है. दरअसल इस असामान्य बदलाव के पीछे एक साथ सक्रिय हुए 5 साइक्लोनिक सर्कुलेशन जिम्मेदार हैं, जो देश के अलग-अलग हिस्सों में मौसम को अलग-अलग तरह से प्रभावित कर रहे हैं. कहीं आंधी-तूफान और ओलावृष्टि का खतरा बना हुआ है, तो कहीं लू का कहर लोगों को बेहाल कर रहा है. उत्तर भारत के कई राज्यों में तापमान 40 डिग्री के पार पहुंच चुका है और कई जगहों पर 45 डिग्री के करीब पहुंचने की स्थिति बन गई है. इसके उलट, पहाड़ी इलाकों में अभी भी बर्फबारी और बारिश का दौर जारी है, जिससे वहां ठंडक बनी हुई है. इस तरह एक ही समय में देश के अलग-अलग हिस्सों में बिल्कुल अलग मौसम देखने को मिल रहा है, जिसने लोगों को हैरान कर दिया है और मौसम की अनिश्चितता को और बढ़ा दिया है.

मौसम विभाग (IMD) के ताजा अपडेट के मुताबिक, वेस्टर्न डिस्टर्बेंस और कई साइक्लोनिक सर्कुलेशन के एक्टिव होने से देश के करीब 13 राज्यों में मौसम ने अचानक करवट ली है. इसका असर खासतौर पर उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में देखने को मिल रहा है, जहां गर्मी अपने चरम पर है, लेकिन बीच-बीच में बादलों की आवाजाही और हल्की बारिश से थोड़ी राहत भी मिल रही है. यह मौसम का अनोखा कॉम्बिनेशन है, जहां पहाड़ों पर बर्फबारी हो रही है और मैदानी इलाकों में लू चल रही है. दिल्ली-एनसीआर में भी मौसम ने करवट ली, लेकिन राहत ज्यादा देर तक टिक नहीं पाई और फिर से गर्मी बढ़ने लगी है. वहीं पूर्वोत्तर भारत और दक्षिण के कई हिस्सों में आंधी-तूफान और बारिश का खतरा बना हुआ है. कुल मिलाकर देशभर में मौसम का एक जैसा पैटर्न नहीं है, बल्कि हर राज्य में अलग-अलग हालात देखने को मिल रहे हैं, जो इस समय के मौसम को और ज्यादा चुनौतीपूर्ण बना रहे हैं.

लू से बचने के लिए सबसे जरूरी है कि दोपहर के समय बाहर निकलने से बचा जाए. (PTI)

उत्तर प्रदेश का मौसम: लू का प्रकोप बढ़ा

  • उत्तर प्रदेश में इस समय गर्मी अपने चरम पर पहुंच चुकी है और इसका सबसे ज्यादा असर बुंदेलखंड इलाके में देखने को मिल रहा है. यहां तापमान लगातार बढ़ रहा है और कई जिलों में पारा 45 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच गया है. इतनी तेज गर्मी के कारण लोगों का दिन में बाहर निकलना मुश्किल हो गया है. सड़कें दोपहर के समय सुनसान नजर आ रही हैं और लोग घरों में रहने को मजबूर हैं. मौसम विभाग ने भी चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में तापमान और बढ़ सकता है, जिससे लू का असर और ज्यादा तेज होगा. खासतौर पर बुजुर्गों, बच्चों और बीमार लोगों को ज्यादा सतर्क रहने की सलाह दी गई है.
  • दूसरी ओर राज्य के कुछ हिस्सों में हल्के बादल जरूर नजर आ रहे हैं, लेकिन इससे राहत मिलने की उम्मीद बेहद कम है. पश्चिमी उत्तर प्रदेश में थोड़ी बहुत बदलाव की संभावना जताई गई है, लेकिन बाकी हिस्सों में मौसम शुष्क और गर्म बना रहेगा. अगले दो दिनों में तापमान और बढ़ने के संकेत हैं, जिससे स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है. ऐसे में लोगों को सलाह दी गई है कि वे दिन के समय बाहर निकलने से बचें, हल्के कपड़े पहनें और शरीर को हाइड्रेट रखें.

बिहार और झारखंड: राहत और खतरा साथ-साथ

  • बिहार में मौसम का मिजाज थोड़ा बदला हुआ नजर आ रहा है. राज्य के कुछ जिलों में हल्की बारिश और तेज हवाओं के कारण लोगों को गर्मी से थोड़ी राहत मिली है. सुपौल, अररिया और किशनगंज जैसे इलाकों में बारिश की संभावना जताई गई है, जिससे तापमान में थोड़ी गिरावट दर्ज की जा सकती है. हालांकि, यह राहत अस्थायी है और आने वाले दिनों में फिर से गर्मी बढ़ने की संभावना है.
  • झारखंड में भी मौसम मिलाजुला बना हुआ है. एक ओर दिन में तेज धूप और गर्म हवाएं लोगों को परेशान कर रही हैं, तो दूसरी ओर शाम के समय बादल छा जाते हैं और कुछ जगहों पर हल्की बारिश भी हो जाती है. मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि खराब मौसम के दौरान आकाशीय बिजली गिरने का खतरा बना हुआ है. ऐसे में लोगों को खुले मैदानों से दूर रहने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी गई है.

दिल्ली-NCR: राहत के बाद फिर गर्मी

दिल्ली-एनसीआर में पिछले 24 घंटों के दौरान मौसम ने थोड़ी राहत जरूर दी थी. तेज हवाओं और हल्की बारिश के कारण तापमान में गिरावट आई और लोगों को गर्मी से थोड़ी राहत मिली. लेकिन यह राहत ज्यादा देर टिक नहीं पाई. शनिवार सुबह से ही धूप तेज हो गई और तापमान फिर से बढ़ने लगा. मौसम विभाग के मुताबिक, आने वाले दिनों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के आसपास रह सकता है. इसके साथ ही प्रदूषण का स्तर भी चिंता का विषय बना हुआ है, जिससे लोगों को दोहरी परेशानी झेलनी पड़ रही है.

राजस्थान: लू और धूल भरी आंधी

राजस्थान में गर्मी का असर लगातार बना हुआ है और यहां लू का प्रकोप लोगों को परेशान कर रहा है. हालांकि पिछले कुछ दिनों में पश्चिमी विक्षोभ के कारण हल्की बारिश और तेज हवाओं से थोड़ी राहत मिली थी. लेकिन अब मौसम फिर से शुष्क होने लगा है और तापमान में बढ़ोतरी के संकेत मिल रहे हैं. कई इलाकों में धूल भरी आंधी चलने की संभावना जताई गई है, जो लोगों की परेशानी को और बढ़ा सकती है. आने वाले दिनों में तापमान 45 डिग्री के आसपास पहुंच सकता है, जिससे हालात और गंभीर हो सकते हैं.

राजस्थान में गर्मी का असर लगातार बना हुआ है और यहां लू का प्रकोप लोगों को परेशान कर रहा है. (PTI)

मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र: बदलता मिजाज

मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में मौसम का मिजाज लगातार बदल रहा है. कहीं तेज हवाएं चल रही हैं तो कहीं हल्की बारिश हो रही है. हालांकि, इन बदलावों के बावजूद गर्मी का असर पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. दिन के समय तेज धूप और गर्म हवाएं लोगों को परेशान कर रही हैं, जबकि शाम के समय मौसम थोड़ा राहत देता है. मौसम विभाग ने इन राज्यों में गरज-चमक और तेज हवाओं के साथ बारिश की संभावना जताई है, जिससे कुछ समय के लिए तापमान में गिरावट आ सकती है.

हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर: बर्फबारी और खतरा

  • हिमाचल प्रदेश में मौसम ने अचानक करवट ली है और कई जिलों में तेज हवाओं के साथ बारिश, ओलावृष्टि और बर्फबारी हो रही है. इससे जनजीवन प्रभावित हुआ है और लोगों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. मौसम विभाग ने कुछ इलाकों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है और लैंडस्लाइड का खतरा भी जताया है.
  • जम्मू-कश्मीर में भी पश्चिमी विक्षोभ के कारण मौसम खराब बना हुआ है. यहां लगातार बारिश और बर्फबारी हो रही है, जिससे तापमान में गिरावट आई है और ठंड का एहसास बढ़ गया है. पहाड़ी इलाकों में हिमस्खलन का खतरा भी बना हुआ है. वहीं, मैदानी इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश जारी रहने की संभावना है, जिससे लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है.

दक्षिण भारत: हीटवेव के बीच बारिश

दक्षिण भारत में गर्मी का असर लगातार बढ़ रहा है और कई राज्यों में हीटवेव की स्थिति बनी हुई है. दिन के समय तेज धूप और गर्म हवाएं लोगों को परेशान कर रही हैं. हालांकि, कुछ हिस्सों में आंधी-तूफान और बारिश की संभावना भी बनी हुई है, जिससे तापमान में थोड़ी राहत मिल सकती है. कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के कुछ इलाकों में बारिश और तेज हवाओं का अनुमान है, जबकि तटीय क्षेत्रों में मौसम ज्यादा सक्रिय बना हुआ है.

पूर्वोत्तर भारत: तूफान का खतरा

पूर्वोत्तर भारत में अगले 48 घंटे मौसम के लिहाज से बेहद अहम माने जा रहे हैं. इस दौरान पूरे क्षेत्र में तेज हवाओं, भारी बारिश और आकाशीय बिजली गिरने की संभावना जताई गई है. असम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, नागालैंड और मिजोरम जैसे राज्यों में 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं. इसके साथ ही कुछ जगहों पर ओलावृष्टि भी हो सकती है, जिससे जनजीवन प्रभावित हो सकता है.

हीटवेव क्या होती है?

हीटवेव यानी लू तब मानी जाती है जब किसी क्षेत्र का तापमान सामान्य से काफी ज्यादा बढ़ जाता है और लगातार कई दिनों तक बना रहता है. भारत में मैदानी इलाकों में जब तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच जाता है और सामान्य से 4-5 डिग्री ज्यादा रहता है, तो इसे हीटवेव कहा जाता है. इससे शरीर पर बुरा असर पड़ता है और डिहाइड्रेशन, हीट स्ट्रोक जैसी समस्याएं हो सकती हैं.

लू से बचाव कैसे करें?

लू से बचने के लिए सबसे जरूरी है कि दोपहर के समय बाहर निकलने से बचा जाए. पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए और हल्के व ढीले कपड़े पहनने चाहिए. बाहर निकलते समय सिर को ढककर रखें और धूप से बचाव के उपाय अपनाएं. खानपान में तरल पदार्थों को शामिल करना भी जरूरी है.

साइक्लोनिक सर्कुलेशन क्या होता है?

साइक्लोनिक सर्कुलेशन एक ऐसा मौसम तंत्र होता है, जिसमें हवा कम दबाव वाले क्षेत्र के चारों ओर गोलाकार घूमती है. यह सिस्टम बारिश, आंधी और बादलों की गतिविधियों को बढ़ाता है. जब एक साथ कई सर्कुलेशन एक्टिव हो जाते हैं, तो मौसम में अचानक बदलाव देखने को मिलता है.

मानसून कब आएगा?

भारत में मानसून आमतौर पर जून के पहले सप्ताह में केरल के तट से प्रवेश करता है. इसके बाद यह धीरे-धीरे पूरे देश में फैलता है और जुलाई तक अधिकांश हिस्सों को कवर कर लेता है. हालांकि, हर साल मानसून की गति और समय में थोड़ा बदलाव हो सकता है, जो मौसम प्रणालियों पर निर्भर करता है.

आकाशीय बिजली से कैसे बचें?

आकाशीय बिजली के दौरान खुले मैदान, पेड़ों के नीचे या ऊंचे स्थानों पर खड़े रहने से बचना चाहिए. घर के अंदर रहें और बिजली के उपकरणों से दूरी बनाए रखें. यदि बाहर फंसे हों तो किसी सुरक्षित और नीची जगह पर शरण लें. मोबाइल फोन और धातु की वस्तुओं से दूरी बनाना भी जरूरी होता है.



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