कम खर्च, जबरदस्त कमाई! इस विदेशी फल की खेती 6 महीने में बना देगी मालामाल….
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Thai Apple Ber Farming: कौशांबी जिले के किसान अब थाई एप्पल बेर जैसी विदेशी फसलों की खेती कर रहे हैं. इन फसलों की बढ़ती मांग और रोग प्रतिरोधक क्षमता के कारण किसानों को अच्छा मुनाफा हो रहा है.
थाई एप्पल बेर
हाइलाइट्स
- कौशांबी में थाई एप्पल बेर की खेती से मुनाफा
- थाई एप्पल बेर की खेती में रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक
- पहले साल 15-20 किलो, दूसरे साल 50-60 किलो फल
Thai Apple Ber Farming: उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले में किसान अब परंपरागत खेती छोड़कर विदेशी फसलों की खेती पर जोर दे रहे हैं. भारत में अब देसी फसलों की बजाय विदेशी फसलों की मांग बढ़ रही है, जिनमें लीची, ड्रैगन फ्रूट, कीवी और थाई एप्पल बेर जैसी फसलें प्रमुख हैं. इन फसलों की बाजार में बढ़ती मांग और बीमारियों के उपचार में इनका उपयोग हो रहा है, जिसके कारण इनका सेवन भी बढ़ा है. इसी कड़ी में थाई एप्पल बेर की खेती अब कौशांबी जिले में भी शुरू हो गई है, जिससे किसानों को अच्छा लाभ हो रहा है.
थाई एप्पल बेर की खेती के फायदे
थाई एप्पल बेर का आकार साधारण रूप से बेर जैसा होता है, लेकिन इसका स्वाद भी बेर के जैसा ही है. इस फल की खास बात यह है कि इसमें जबरदस्त रोग प्रतिरोधी क्षमता होती है, जिसके चलते इसमें कीटों और रोगों का असर कम होता है. थाई एप्पल बेर की बागवानी करना भी बहुत आसान है, और इसकी खेती से किसानों को अच्छा मुनाफा मिल सकता है.
थाई एप्पल बेर की बागवानी प्रक्रिया
थाई एप्पल बेर की बागवानी के लिए इस पौधे की कलम (कटिंग) की जाती है. कलम को काटकर गड्डा खोदकर उसमें खाद और दवा मिलाकर पौधा रोपित किया जाता है. इन पौधों को 5 मीटर की दूरी पर रोपा जाता है. इस पौधे की रोपाई जुलाई से लेकर मार्च तक की जाती है. एक बीघा खेत में 80 से 100 पौधे लगाए जा सकते हैं. पौधों की ऊंचाई लगभग 5 से 6 फीट होती है. इन पौधों से पहली बार में 15 से 20 किलो फल प्राप्त होता है, और दूसरे साल यह 50 से 60 किलो तक बढ़ जाता है. थाई एप्पल बेर की कीमत बाजार में ₹100 प्रति किलो तक बिकती है, जिससे किसानों को अच्छा मुनाफा होता है.
खेती से मिल रहा है मुनाफा
किसान बनवारी लाल ने बताया कि उन्हें बेर की खेती करना बहुत पसंद है. वे पांच प्रकार के बेर पौधे लगाकर खेती कर रहे हैं, जैसे थाई ग्रीन, रेड सुंदरी, बाल सुंदरी, कश्मीरी रेड और मिस इंडिया. इन पौधों को मार्च से लेकर मई तक लगाया जाता है. इन पौधों में अक्टूबर से नवंबर तक फूल आना शुरू हो जाता है, और जनवरी से फरवरी तक फल आना शुरू हो जाता है. पहले वर्ष में 15 से 20 किलो फल मिलते हैं, और दूसरे वर्ष में यह बढ़कर 50 से 60 किलो हो जाता है. उन्होंने यह भी बताया कि पौधों को सुरक्षित रखने के लिए नियमित कटाई, छटाई, निराई और गुडाई की जाती है. एक पौधे से ₹3000 का मुनाफा होता है, और उन्होंने 300 पौधे तैयार किए हैं, जिससे प्रतिवर्ष लगभग ₹9 लाख का मुनाफा होता है.