किसान की बेटी बनी JNCU की गोल्ड मेडलिस्ट, M.Ed में किया टॉप, टीचर बनने का सपना
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Ballia News: तमाम विपरीत परिस्थितियों का सामना करते हुए किसान की बेटी ने विश्वविद्यालय से गोल्ड मेडल हासिल कर इतिहास रचा है. हम बात कर रहे हैं आकांक्षा शुक्ला की, जो विश्वविद्यालय स्तर पर बड़ी सफलता हासिल कर सभी के लिए प्रेरणा बनी हैं.
बलिया: रामधारी सिंह दिनकर ने क्या खूब लिखा है, ‘मानव जब जोर लगाता है, पत्थर पानी बन जाता है’. उक्त लाइन को बलिया की बेटी ने सच साबित कर दिखाया है. एक ऐसी किसान की बेटी की कहानी है, जो बेहद प्रेरणादायक है. तमाम विपरीत परिस्थितियों का सामना करते हुए इस छात्रा ने विश्वविद्यालय से गोल्ड मेडल हासिल कर इतिहास रचा है. हम बात कर रहे हैं आकांक्षा शुक्ला की, जो विश्वविद्यालय स्तर पर बड़ी सफलता हासिल कर सभी के लिए प्रेरणा बनी हैं. एक अच्छी शिक्षिका बनकर समाज में शिक्षा की अलग जगाने का सपना देख रही आकांक्षा के मुताबिक, मन से किया गया प्रयास कभी व्यर्थ नहीं जाता है.
बांसडीह तहसील अंतर्गत राजा गांव खरौनी निवासी कुमारी आकांक्षा शुक्ला ने कहा कि वह श्रीमती फुलेहरा स्मारक महिला महाविद्यालय में m.Ed की छात्रा हैं, जिसमें प्रथम स्थान आने पर इनको स्वर्ण पदक प्राप्त हुआ है. यह बड़ा पुरस्कार जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय बसंतपुर बलिया में आयोजित अष्टम दीक्षांत समारोह में मिला है.
पहली बार मिला स्वर्ण पदक
अगर जो छात्र-छात्रा अपने कोर्स में प्रथम स्थान प्राप्त करते हैं, उन्हीं को स्वर्ण पदक देकर सम्मानित किया जाता है. आकांक्षा ने तमाम कोशिश की थी, लेकिन आज पहली बार इनको स्वर्ण पदक मिला है, इसलिए वह बहुत प्रसन्न और गौरवान्वित महसूस कर रही हैं. इनके पिता खेती बाड़ी किसानी का कार्य करते हैं. एक लड़की होकर इतना संघर्ष कर यहां तक पहुंचाना वाकई बेहद ही प्रेरणादायक रहा है.
शिक्षा की अहमियत मालूम
वैसे घर की जिम्मेदारियों के साथ-साथ स्वर्ण पदक पाना काफी मुश्किल था. लेकिन जब इनको स्वर्ण पदक मिला, तो इनको लगा कि इन्हें और ज्यादा मेहनत करनी चाहिए थी. युवाओं के साथ-साथ उन लड़कियों को, जो शिक्षा से वंचित हो जाती हैं. डर, भय और लोक लज्जा के कारण समाज से दूर रह जाती हैं. लेकिन इनको शिक्षा की अहमियत मालूम होनी ही चाहिए और शिक्षा एक ऐसा हथियार है, जिसको अपनाकर समाज में एक अलग स्थान हासिल किया जा सकता है. आकांक्षा ने कहा कि अगर वह 12 घंटे भी बैठकर पढ़ाई कर रही हैं, तो भी उनका पढ़ाई से मन नहीं भागता था. अन्य कामों के बाद जितना भी उनके पास समय बचता था, वह पूरा समय पढ़ाई में जाता था. इन्हे खाना बनाना भी आता है.
शिक्षिका बनने का है सपना
फिर भी इनकी मां इन्हें खाना बनाने नहीं देती हैं कि वह अधिक से अधिक पढ़ाई कर सके. आकांक्षा पढ़ाई के साथ-साथ अधिक से अधिक स्किल सीखने पर फोकस कर रही हैं. आकांक्षा आगे चलकर एक अच्छी शिक्षिका बनना चाहती हैं. वह शिक्षिका इसलिए बनना चाहती हैं ताकि सभी लोगों को शिक्षित करने में अहम भूमिका निभा सकें. उन्होंने आगे कहा कि कुछ कर जाने का जज्बा, जोश और जुनून कठिन रास्ते काफी आसान बना देता है और सफलता की बहार आ सकती है. असफलता भी उपलब्धि का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिससे घबराकर हार नहीं मानना चाहिए, बल्कि और मजबूती के साथ प्रयास करना चाहिए.
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आर्यन सेठ, News18 Hindi में डिजिटल डेस्क पर जुड़े हैं और जनवरी 2026 से उत्तर प्रदेश की राजनीति, अपराध, प्रशासन, वायरल और अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर खबरें लिखते हैं. जामिया मिलिया इस्लामिया दिल्ल…
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