‘कुछ भी हो जाए, चौरासी कोस की यात्रा जरूर पूरी करूंगी’, बहू का दृढ़ संकल्प
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Mathura News: इन दिनों ब्रज चौरासी कोस की यात्रा कर रही एक सास-बहू की जोड़ी को लोगों से काफी प्यार मिल रहा है. एक ऐसी बहू जो सास को सास नहीं, बल्कि एक मां मानती है और उसे बहू ने एक बेटी होने का फर्ज अदा किया है. आइए उन्हीं से जानते हैं इस परिक्रमा से जुड़ी बातें.
मथुरा: एक ऐसी बहू जो कलयुग में अपनी सास के लिए बेटी का रोल अदा कर रही है. काजल चौधरी अपनी 90 वर्षीय सास को सिर के ऊपर तसले में रखकर ब्रज चौरासी कोस परिक्रमा कर रही हैं. उनके मन में सास को परिक्रमा कराने की अलख जगी. काजल चौधरी पेशे से हरियाणवी सिंगर और भजन गायक हैं. विधवा हैं और अपने बच्चों का पालन पोषण करने के लिए रागनी और भजन गाकर अपना घर चलाती हैं.
सास-बहू की जोड़ी की हर कोई कर रहा प्रशंसा
प्राचीन समय में श्रवण कुमार ने अपने मां-बाप को तीर्थ यात्रा अपने कंधों पर पालकी के जरिए कराई थी. एक ऐसी बहू जो सास को सास नहीं, बल्कि एक मां मानती है और उसे बहू ने एक बेटी होने का फर्ज अदा किया है. सिर पर तसला रख और उसमें अपनी सासू मां को बिठाकर ब्रज चौरासी कोस के लिए निकली काजल चौधरी आज हजारों लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई हैं. हर व्यक्ति उनसे प्रेरणा लेना चाहता है.
सास-बहू की जोड़ी की लोग कर रहे तारीफ
काजल चौधरी ने अपनी सासू मां को प्लास्टिक के तसले में बैठाकर ब्रज चौरासी कोस की परिक्रमा लगाना शुरू किया, तो लोग इस सास बहू की जोड़ी को मां-बेटी की जोड़ी मान रहे हैं. काजल चौधरी अपनी 90 वर्षीय सासू मां को जहां से भी लेकर परिक्रमा लगाते हुए निकलती हैं, तो लोग उनको देखकर उनका स्वागत करते हैं. उन्हें जगह-जगह जो सम्मान मिल रहा है, काजल चौधरी के लिए एक फक्र की बात है.
सास-बहू में कभी नहीं हुई अनबन
लोकल 18 की टीम ने ब्रज चौरासी कोस परिक्रमा कर रही काजल चौधरी से खास बातचीत की. काजल चौधरी ने लोकल 18 को अपनी ब्रज चौरासी कोस की परिक्रमा के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि जब से शादी होकर आई है, इन्होंने मुझे कभी बहू नहीं, बल्कि एक बेटी का दर्जा दिया है. आज तक हम दोनों सास-बहू के बीच कोई झगड़ा तो छोड़ो, अनबन तक नहीं हुई. उन्होंने बताया कि मेरे परिवार में सभी लोग मुझसे प्यार करते हैं और आनंद के साथ अपना जीवन गुजार रहे हैं.
विधवा होने के बाद संभाली घर की जिम्मेदारी
काजल चौधरी ने बताया कि उन्होंने ब्रज चौरासी कोस की परिक्रमा वनचारी हरियाणा से दाऊ जी मंदिर दर्शन करने के बाद से शुरू की. काजल चौधरी पेशे से हरियाणवी सिंगर भी हैं. रागनी और भजन भी गाती हैं काजल चौधरी. बता दें की सास चंदरी 90 वर्ष की हैं. 5 दिन पूर्ण हो चुके हैं. काजल 13 साल की थीं, जब शादी के बाद वो इस घर में आई थीं. 16 वर्ष होने पर बड़ा लड़का हुआ. 2 लड़के और एक बेटी हैं.
लगातार बढ़ रहे फॉलोअर्स
काजल के पति को मरे हुए 18 साल हो गए हैं. एक्सीडेंट में उनके पति की मौत हुई थी. पति मजदूरी करते थे और उसी से परिवार का गुजारा करते थे. लेकिन उनके मरने के बाद अनपढ़ होने के साथ काजल अपने घर को चला रहीं हैं. काजल चौधरी के फॉलोअर्स लगातार इंस्टाग्राम पर बढ़ रहे हैं. इस यात्रा के दौरान काजल एक दिन में लगभग 45 किलोमीटर का सफर तय कर रही हैं. यात्रा के दौरान साधारण भोजन और फल फलारी का आहार लेती हैं.
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आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए.