चित्रकूट के पाठा में गर्मी शुरू होते ही आती है मुसीबत, कुंए में टैंकर से भरा जाता है पानी
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चित्रकूट जिला खासकर पाठा क्षेत्र, पानी की किल्लत के लिए लंबे समय से जाना जाता रहा है. हर साल गर्मी आते ही यहां हालात और भी गंभीर हो जाते हैं. सरकारी योजनाओं के तहत गांव-गांव में नल तो लगा दिए गए हैं, लेकिन हकीकत यह है कि इन टोटियों से पानी नहीं बल्कि सिर्फ उम्मीद टपकती है. पाठा क्षेत्र के हरिजनपुर गांव पहुंची,तो वहां का नजारा चौंकाने वाला था. गांव के छोटे-छोटे बच्चे हाथ में बाल्टी और बर्तन लिए कुएं के पास पानी भरते नजर आए है. हालांकि सरकार का दावा है कि हर घर तक पानी पहुंच चुका है, लेकिन पाठा क्षेत्र के कई गांव में इसकी जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है.
चित्रकूटः बुंदेलखंड का चित्रकूट जिला खासकर पाठा क्षेत्र, पानी की किल्लत के लिए लंबे समय से जाना जाता रहा है. हर साल गर्मी आते ही यहां हालात और भी गंभीर हो जाते हैं. सरकारी योजनाओं के तहत गांव-गांव में नल तो लगा दिए गए हैं, लेकिन हकीकत यह है कि इन टोटियों से पानी नहीं बल्कि सिर्फ उम्मीद टपकती है.
इसी सच्चाई को जानने के लिए चित्रकूट लोकल 18 की टीम पाठा क्षेत्र के हरिजनपुर गांव पहुंची,तो वहां का नजारा चौंकाने वाला था. गांव के छोटे-छोटे बच्चे हाथ में बाल्टी और बर्तन लिए कुएं के पास पानी भरते नजर आए है. हालांकि सरकार का दावा है कि हर घर तक पानी पहुंच चुका है, लेकिन पाठा क्षेत्र के कई गांव में इसकी जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है.लोग हैंडपंप या फिर गांव में बने पुराने कुएं से पानी लाने को मजबूर हो रहे है.
गांव के लोग बोले कुएं में टैंकर से डालते है पानी
वही गांव के स्थानीय निवासी महेश ने लोकल 18 को जानकारी में बताया कि जैसे ही गर्मी शुरू होती है, पानी की समस्या विकराल रूप ले लेती है. गांव का एकमात्र कुआं भी धीरे-धीरे सूखने लगता है,हालात इतने खराब हो जाते हैं कि उस कुएं में टैंकर से पानी भरवाना पड़ता है, ताकि लोग किसी तरह अपनी जरूरतें पूरी कर सकें. उन्होंने आगे की जानकारी में बताया कि घर-घर नल तो लगा दिया गया है, लेकिन उससे पानी कब आएगा कितना आएगा, इसका कोई भरोसा नहीं रहता है.
हफ्ते में एक या दो बार ही पानी आता है,इसके कारण पानी की किल्लत गांव में बनी हुई है.जानकारी के लिए बता दे कि चित्रकूट जिला प्रशासन लगातार पाठा क्षेत्र में पानी की समस्या से जूझ रहे गांव की ओर नजर बनाए हुए हैं. और टैंकर हर घर नल योजना से पानी पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं,अब देखना यह होगा कि हरिजनपुर गांव की प्यास कब तक बुझ पाएगी.और कब यहां रोजाना सप्लाई चालू हो पाएगी.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें