जब सुप्रीम कोर्ट तक जाती थी गाजीपुर की खुशबू…पूर्व CJI गोगोई भी इसके दीवाने, ये दुकान 188 साल पुरानी

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जब सुप्रीम कोर्ट तक जाती थी गाजीपुर की खुशबू…पूर्व CJI गोगोई भी इसके दीवाने, ये दुकान 188 साल पुरानी


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Ghazipur News : अधिकारी, पुलिसकर्मी और बाहर से आने वाले करीब हर यात्री के लिए ये दुकान फेवरेट रही है. यहां 20 से 25 वैरायटी के इत्र और गुलाब जल बहुत ही कम कीमत में मिलते हैं. 1836 से ये दुकान यहीं है.

गाजीपुर. यूपी के गाजीपुर का नाम सिर्फ अफीम फैक्ट्री और ऐतिहासिक स्थलों से ही नहीं, बल्कि अपनी खुशबूदार विरासत से भी होता है. स्टीमर घाट पर स्थित “गुरु चरण राम गया राम” इत्र की दुकान 1836 से लगातार लोगों की यादों और रिश्तों को महका रही है. आज यह दुकान आठवीं पीढ़ी के हाथों में है– आदित्य केशरी और उनके पिता श्याम केशरी इसे संभाल रहे हैं. श्याम जी केशरी के पिता लाल जी केसरी के देखरेख में आज भी ये विरासत जिंदा है. श्याम जी बताते हैं कि वे महज 14 साल की उम्र से ही गुलाब जल और इत्र बनाने की कला सीख गए थे. यह दुकान गाजीपुर की धरोहर है. लोग यहां आते हैं और कहते हैं– “स्टीमर घाट से हमें वही असली खुशबू चाहिए.” यहां से कोई खाली हाथ नहीं लौटता.

सूरमाओं का चहेता

इस दुकान का गुलाब जल सिर्फ स्थानीय ग्राहकों तक सीमित नहीं है. सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई खुद यहां का गुलाब जल मंगवाते थे. श्याम जी याद करते हैं कि 2015 के आसपास गोगोई साहब इसे पानी में डालकर पीते थे और आंखों में भी लगाते थे. यही नहीं, कवि और न्यायमूर्ति एएस खरे भी यहां का गुलाब जल लेना पसंद करते थे. अधिकारी, पुलिसकर्मी और बाहर से आने वाले हर यात्री के लिए यह दुकान गाजीपुर की पहचान रही है.
श्याम जी मजाक में कहते हैं कि जब भी गुलाब जल उनको भेजना होता था तो कोई अधिकारी या पुलिस वाला जो गाजीपुर में रहता था, इसी बहाने छुट्टी उसको मिल जाती थी.

100 ग्राम मात्र इतने में

आज भी यहां 20 से 25 वैरायटी के इत्र और गुलाब जल मिलते हैं. विशेषकर गाजीपुरी गुलाब जल और केवड़ा जल विश्व प्रसिद्ध हैं. श्याम जी बताते हैं कि पहले गाजीपुर में गुलाब की खेती खूब होती थी, लेकिन अब कच्चा माल उन्हें बाहर से मंगवाना पड़ता है. फिर भी वे वही पारंपरिक आसवन विधि (भट्ठियों और ताम्बे के बर्तनों से) अपनाते हैं, जिससे 100 ग्राम का गुलाब जल बिल्कुल शुद्ध बनता है, जिसकी कीमत 250 से 300 रुपये होती है.आज जब कोई भी, अधिकारी या आम ग्राहक इस दुकान पर आता है, तो उसे सिर्फ खुशबू नहीं मिलती, बल्कि गाजीपुर की 188 साल पुरानी धरोहर भी साथ मिलती है.

Priyanshu Gupta

Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें

Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu… और पढ़ें

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