‘जो पीड़ित वो पीडीए’…. मेरठ की बेटी की हत्या पर क्यों भड़के अखिलेश यादव?
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Akhilesh Yadav PDA Politics: यूपी चुनाव 2027 से पहले समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने ‘मेरठ की बेटी’ के पीड़ित परिवार से मुलाकात कर योगी सरकार के खिलाफ बड़ा मोर्चा खोल दिया है. अखिलेश ने कानून व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए साफ किया कि अब ‘पीडीए’ यानी पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक चुप नहीं बैठेगा.
मेरठ. उत्तर प्रदेश में साल 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव की सियासी बिसात अभी से बिछनी शुरू हो गई है. समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने एक बार फिर अपने सबसे अचूक हथियार यानी ‘पीडीए’ पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक फॉर्मूले को धार देना शुरू कर दिया है. मेरठ में एक दलित छात्रा के अपहरण की कोशिश और उसकी मां की नृशंस हत्या के मामले ने सूबे के राजनीतिक पारे को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है. शनिवार को दिल्ली एयरपोर्ट पर कैराना सांसद इकरा हसन की मौजूदगी में अखिलेश यादव ने ‘मेरठ की बेटी’ के शोक-संतप्त परिवार से मुलाकात की और उन्हें ढांढस बंधाया. इस दौरान सपा प्रमुख ने पीड़ित परिवार को 2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता भी दी और सीधे शब्दों में शासन-प्रशासन के खिलाफ हुंकार भरते हुए कहा कि अब ‘पीडीए’ नाइंसाफी सहेगा नहीं, बल्कि उसका मुंहतोड़ जवाब देगा.
“जिसके हाथ में लगाम है, वो खुद बेलगाम है”
पीड़ित परिवार से मुलाकात के बाद अखिलेश यादव ने योगी सरकार की कानून व्यवस्था और उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्यशैली पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला. उन्होंने सोशल मीडिया पर मेरठ पुलिस के एसएसपी अविनाश पांडे के वायरल हो रहे व्यवहार की आलोचना करते हुए कहा, “जब वो खुद ही बेलगाम है जिसके हाथ में लगाम है, तो फिर उनका क्या जो उनके दरबार में दरबान हैं!’
जब वो ख़ुद ही बेलगाम है जिसके हाथ में लगाम है
तो फिर उनका क्या, जो उनके दरबार में दरबान है!‘मेरठ की बेटी’ के साथ हुए महा-अत्याचार व हत्या के बाद जिस तरह नामज़द आरोपियों पर कमज़ोर धाराओं में मुक़दमा दर्ज़ किया गया है और आंदोलनकारियों पर गंभीर धाराओं में मुक़दमा लगाया गया है, वो… pic.twitter.com/Q5yJafYKvv