जौहर यूनिवर्सिटी के बाहर अचानक बदल गए हैं हालात, भारी पुलिस बल क्यों किया गया तैनात?
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Mohammad Ali Jauhar University – Rampur : जौहर यूनिवर्सिटी की स्थापना वर्ष 2006 में हुई थी. इसे समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान के ड्रीम प्रोजेक्ट के रूप में देखा जाता है. करीब 450 एकड़ में फैले इस परिसर में मेडिकल, इंजीनियरिंग, फार्मेसी, पैरामेडिकल समेत कई पाठ्यक्रम संचालित होते हैं. वर्षों तक यह विश्वविद्यालय रामपुर की पहचान बना रहा लेकिन, पिछले कुछ वर्षों में जमीन, लीज और निर्माण से जुड़े मामलों को लेकर लगातार कानूनी विवादों में घिरा रहा. ध्वस्तीकरण के आदेश के बाद पिछले कई दिनों से छात्र विश्वविद्यालय के मुख्य गेट पर प्रदर्शन कर रहे थे. उनका कहना है कि यह सिर्फ इमारतों का मामला नहीं, बल्कि हजारों छात्रों की पढ़ाई और भविष्य का सवाल है.
रामपुर : रामपुर जौहर यूनिवर्सिटी के 38 भवनों को गिराने की तैयारी के बीच अब पूरे मामले में बड़ा मोड़ आ गया है. मुरादाबाद मंडलायुक्त की अदालत ने फिलहाल ध्वस्तीकरण के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है. यानि अंतिम फैसला आने तक यूनिवर्सिटी की किसी भी इमारत पर बुलडोजर नहीं चलेगा. इस राहत के बाद जहां छात्रों ने राहत की सांस ली है. वहीं अब सभी की नजर अगली सुनवाई पर टिक गई है. इसी बीच जब देर रात वहां से धरने पर बैठक आंदोलनकारी छात्र और नेता हट गए तो सुबह तक नजारा बदल चुका था. लोकल18 की टीम ने पाया कि जौहर यूनिवर्सिटी का माहौल बदला हुआ था. खाली हो चुके धरना स्थल पर अचानक से भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया था. आइये जानते हैं इस रिपोर्ट में..
Local18 की टीम ने पाया कि सुबह करीब 6 बजे से ही जौहर यूनिवर्सिटी के बाहर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी. जिले के कई थानों की पुलिस फोर्स मौके पर तैनात थी. खुद तीन सीओ सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी करते नजर आए. यूनिवर्सिटी के दोनों गेटों पर महिला और पुरुष पुलिसकर्मी बड़ी संख्या में मौजूद थे. जहां पिछले कई दिनों से छात्र धरना दे रहे थे, वहां आज धरना स्थल पर पुलिस की गाड़ियां खड़ी कर दी गई हैं. पूरे इलाके में पुलिस का पहरा साफ दिखाई दे रहा है.
आजम खान के रिजॉर्ट के बाहर वाले प्रमुख चौराहे पर भी बैरिकेडिंग
सिर्फ यूनिवर्सिटी ही नहीं, बल्कि आजम खान के रिजॉर्ट के बाहर वाले प्रमुख चौराहे पर भी बैरिकेडिंग लगाकर पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है. यूनिवर्सिटी के मुख्य गेट के सामने वाले चौराहे पर भी भारी पुलिस बल मौजूद है. इसके बावजूद पूरे जौहर यूनिवर्सिटी रोड पर सन्नाटा पसरा हुआ है. न धरना देने वाले छात्र दिखाई दे रहे हैं और न ही पहले जैसी भीड़. इतना ही नहीं जो लोग वीडियो बनाने या कवरेज करने के लिए पहुंच रहे हैं. उन्हें भी पुलिस वहां रुकने नहीं दे रही मौके पर करीब 70 से 80 पुलिसकर्मी तैनात हैं.
दरअसल, ये पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब रामपुर विकास प्राधिकरण (आरडीए) ने विश्वविद्यालय के 40 में से 38 भवनों को बिना स्वीकृत नक्शे का निर्माण बताते हुए ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया. प्राधिकरण का कहना है कि मेडिकल कॉलेज और एक अकादमिक भवन को छोड़कर बाकी भवनों के लिए वैध स्वीकृति का रिकॉर्ड नहीं मिला. इसी आधार पर विश्वविद्यालय प्रबंधन को 15 दिन के भीतर कार्रवाई करने का नोटिस दिया गया था. इसके साथ ही लोक निर्माण विभाग ने विश्वविद्यालय परिसर से गुजरने वाली करीब साढ़े तीन किलोमीटर लंबी सड़क को भी आम रास्ता घोषित कर दिया. मुख्य गेट पर बोर्ड लगाकर लोगों के लिए रास्ता खोल दिया गया. इन दोनों फैसलों के बाद मामला पूरे प्रदेश और देश में चर्चा का विषय बन गया.
मंडलायुक्त की अदालत में अपील
ध्वस्तीकरण के आदेश के खिलाफ विश्वविद्यालय प्रबंधन ने मुरादाबाद मंडलायुक्त की अदालत में अपील की है. अदालत ने पहली सुनवाई में विश्वविद्यालय की दलीलों को सुनने के बाद 38 भवनों को गिराने पर अंतरिम रोक लगा दी है. अदालत ने स्पष्ट किया कि सभी पक्षों की दलीलें और रिकॉर्ड देखने के बाद ही अंतिम फैसला सुनाया जाएगा. यानी यह राहत फिलहाल के लिए है. मामला अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है.
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I currently serve as a Senior Assistant Editor at News18 Hindi, leading State & Local18 operations across Uttar Pradesh, Uttarakhand, Delhi, Himachal Pradesh and Haryana. With over 17 years of experience in jou…
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