दादा बने गुरु, तो पोते-पोती ने साधा ऐसा निशाना, आज नेशनल स्तर तक बना ली पहचान
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Azamgarh News: उम्र से बड़े अगर आपके हौसले हैं तो आप किसी भी मुकाम को हासिल कर सकते हैं. कुछ ऐसी ही दिलचस्प कहानी है आजमगढ़ निवासी एक भाई-बहन की जोड़ी की, जिन्होंने दादा को गुरु माना और आज वो निशानेबाजी में स्टेट लेवल क्वालिफाई कर चुके हैं.
आजमगढ़: कहते हैं कि प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं होती है. इरादे मजबूत हो और परिवार का साथ हो तो इंसान कहीं से भी निकलकर आसमान की बुलंदियों तक पहुंच सकता है. इसी कहावत को आजमगढ़ के दो ऐसे बच्चों ने सच साबित किया है, जिन्होंने अपने दादा से निशानेबाजी की कला सीखी और बेहद कम उम्र में देखते ही देखते निशानेबाजी के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर तक अपनी पहचान बनाने में कामयाब हो गए.
आज के दौर में जहां युवा मोबाइल और अन्य डिस्ट्रक्शन में उलझ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर आजमगढ़ जिले के लालगंज क्षेत्र के अमौडा गांव निवासी सुशांत राय और उनकी छोटी बहन अदिति राय ने निशानेबाजी के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई और अब भारतीय टीम में जगह बनाने के लिए ट्रायल कर रहे हैं. दोनों भाई-बहन ने अपनी शिक्षा और खेल के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करते हुए निशानेबाजी में नए मुकाम हासिल कर रहे हैं.
दादा से सीखी निशानेबाजी की कला
सुशांत राय ने महज 15 साल की कम उम्र में ही निशानेबाजी में स्टेट लेवल पर मेडल जीतकर नेशनल लेवल में क्वालीफाई कर लिया था. वर्तमान में वह कक्षा 12वीं की परीक्षा की तैयारी के साथ-साथ 10 मीटर और 25 मीटर एयर पिस्टल इवेंट में नेशनल क्वालीफाई कर चुके हैं. लोकल 18 से बातचीत करते हुए सुशांत ने बताया कि उन्होंने शूटिंग की कला अपने दादा सच्चिदानंद राय से सीखी है.
उन्होंने कहा कि मेरे दादाजी एक बहुत अच्छे निशानेबाज रहे हैं और मैंने उन्हीं से निशाना लगाना सिखा और धीरे-धीरे शूटिंग की फील्ड में अपना करियर बनाने के लिए लगातार प्रैक्टिस करते रहे. पहले उन्होंने स्टेट लेवल पर सिल्वर मेडल हासिल किया और अब इंडियन टीम में सिलेक्शन के लिए ट्रायल कर रहे हैं.
बहन को भाई से मिली प्रेरणा
निशानेबाजी के क्षेत्र में सुशांत की सफलता को देखते हुए उनकी छोटी बहन अदिति राय ने भी इसी क्षेत्र में कदम रखा और महज 15 साल की कम उम्र में ही अदिति ने भी स्टेट लेवल पर मेडल जीतकर नेशनल के लिए क्वालीफाई कर लिया और भारतीय टीम का हिस्सा बनने के लिए ट्रायल में लग गई हैं. अदिति ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि शुरुआत में वह घर पर एयर गन से आम तोड़ती थी और यूं ही निशाना लगाया करती थीं. जब बड़े भाई ने इसे आधिकारिक तौर पर शुरू किया और स्टेट लेवल पर निशानेबाजी की प्रतियोगिता में शामिल होने लगे, इस दौरान उनका भी इंटरेस्ट इस क्षेत्र में जागने लगा.
‘लड़की है तो कर सकती है’
वर्तमान में अदिति कक्षा 10वीं की छात्र हैं और अपनी बोर्ड की परीक्षाओं की तैयारी के साथ-साथ वह निशानेबाजी की ट्रेनिंग में भी बढ़ चढ़कर हिस्सा ले रही हैं. उनका कहना है कि अक्सर छोटे शहरों या गांव की लड़कियों को खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने से रोका जाता है. निशानेबाजी की शुरुआत करते समय मुझे भी डर लगा था कि यह कैसे होगा, लेकिन अंत में वह बहुत अच्छा रहा.
उन्होंने कहा कि लोग अक्सर कहते हैं कि स्पोर्ट्स से कुछ नहीं होता, लेकिन यह सोच बिल्कुल गलत है. स्पोर्ट्स एक ऐसा क्षेत्र है, जहां पर बेहतरीन करियर बनाया जा सकता है. उनका कहना है कि अक्सर लड़कियों को इस तरह के क्षेत्र में करियर बनाने से रोका जाता है, क्योंकि उन्हें लगता है कि लड़कियां नहीं कर सकती हैं, लेकिन मैंने यह अपने परिवार से सीखा है कि ‘लड़की है तो कर सकती है’.
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आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए.