देश का पहला गार्बेज फ्री सिटी होगा बनारस, 2 महीने में शहर साफ, जानिए कैसे?

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देश का पहला गार्बेज फ्री सिटी होगा बनारस, 2 महीने में शहर साफ, जानिए कैसे?


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Varanasi News: वाराणसी नगर निगम क्षेत्र में कुल 27 कूड़ा घर थे, जिन्हें अब बंद किया जा रहा है. इससे यहां घूमने आने वाले पर्यटक भी अच्छा फील करेंगे. अगले दो महीने में इस काम को पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. दो महीने बाद बनारस की सड़कों पर न ही गंदगी का अंबार और न ही कूड़ा घर दिखेंगे.

वाराणसी: काशी दुनिया के पर्यटन मैप पर छाया हुआ है. यह शहर पहले से साफ सुधरा हो, इसके लिए नगर निगम ने सबसे धासूं प्लान तैयार किया है. जल्द ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र बनारस देश का पहला गार्बेज फ्री सिटी बनने जा रहा है. इसके लिए नगर निगम ने पूरी कमर कस ली है. लगातार मेयर और नगर आयुक्त इसकी मोनिटरिंग कर रहे हैं.

लोकल 18 से बातचीत में महापौर अशोक तिवारी ने बताया कि वाराणसी नगर निगम क्षेत्र में कुल 27 कूड़ा घर थे, जिन्हें अब बंद किया जा रहा है. फिलहाल इनमें से 23 कूड़ा घर पूरी तरह बंद भी हो चुके हैं, बाकी के कूड़ा घर भी जल्द ही बंद होंगे. जिन जगहों पर ये कूड़ा घर थे, वहां लोगों को आने-जाने में काफी समस्याएं होती थी. इतना ही नहीं, आसपास के इलाके में रहने वाले लोग भी बदबू से परेशान होते थे. लेकिन अब वो कूड़ा घर बंद हो गए हैं. इससे यहां घूमने आने वाले पर्यटक भी अच्छा फील करेंगे.

कूड़ा घर होंगे बंद
अगले दो महीने में इस काम को पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. दो महीने बाद बनारस की सड़कों पर न ही गंदगी का अंबार और न ही कूड़ा घर दिखेंगे. डोर टू डोर कलेक्शन के बाद सीधे इन्हें कूड़ा निस्तारण केंद्र पहुंचाया जाएगा. इससे बनारस की स्वच्छता रैंकिंग भी सुधरेगी. वहीं सड़के भी पहले से साफ सुथरी होंगी.

करसड़ा में विकसित होगा वन
शहर में जहां कूड़ा घर बंद होंगे तो वहीं सालों से करसड़ा में इकट्ठा हुआ 12.60 लाख टन कूड़ा के निस्तारण के लिए भी निगम ने पहल की है, जिसके तहत अब इस कूड़े के ढ़ेर को बायोमाइनिंग तकनीक से निस्तारित करके वहां मियावकी तकनीक से वन बनाया जाएगा. इस वन से शहर के बाहरी इलाकों में हरियाली बढ़ेगी. इसके साथ ही यह ऑक्सीजन पॉवर सेंटर भी बनेगा.

बताते चलें कि लंबे समय से करसड़ा में कूड़े के ढ़ेर को निस्तारित करने की मांग उठ रही थी. इस पहल से सीधे तौर पर हजारों लोगों को फायदा मिलेगा. बताते चलें कि इंदौर और भोपाल में भी कूड़े के ढ़ेर को निस्तारित करने के लिए इस तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है. पिछले दिनों पार्षदों की एक टीम भी इसके लिए इंदौर गई थी.

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आर्यन सेठ

आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए.



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