धान के दाने को गला रहा हल्दी रोग, एक्सपर्ट से जानें तुरंत बचाव के उपाय
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Agriculture News: कृषि एक्सपर्ट नूतन वर्मा ने बताया कि हल्दी रोग एक फंगस जनित रोग है, जो धान की फसल पर उस वक्त अटैक करता है, जब धान की बाली में दूध से दाना बनने की प्रक्रिया हो रही होती है. उस समय बाली में दाने फटने लगते हैं और हल्दी जैसा पाउडर बाली के ऊपर दिखाई देने लगता है, पौधा हिलाने पर यह पाउडर झड़कर नीचे गिर जाता है.
शाहजहांपुर सितंबर के महीने में धान की फसल की कटाई शुरू हो चुकी है. लेकिन जिन किसानों की धान की फसल कटने में अभी कुछ वक्त लग रहा है या दाना नरम है तो वहां हल्दी रोग धान की फसल को नुकसान पहुंचा रहा है. किसानों को हल्दी रोग के नियंत्रण के लिए समय पर जरूरी कदम उठा लेने चाहिए, अन्यथा धान की फसल को भारी नुकसान हो सकता है. किसान रोग नियंत्रण के लिए कई तरह के रासायनिक उपाय करते हैं लेकिन अगर कुछ सावधानी बरतें तो भी हल्दी रोग का नियंत्रण किया जा सकता है.
कृषि एक्सपर्ट नूतन वर्मा ने बताया कि हल्दी रोग एक फंगस जनित रोग है, जो धान की फसल पर उस वक्त अटैक करता है, जब धान की बाली में दूध से दाना बनने की प्रक्रिया हो रही होती है. उस समय बाली में दाने फटने लगते हैं और हल्दी जैसा पाउडर बाली के ऊपर दिखाई देने लगता है, पौधा हिलाने पर यह पाउडर झड़कर नीचे गिर जाता है. यह रोग हवा के साथ भी फसल में फैलता है. बाली से निकलने वाला यह हल्दी जैसा पाउडर दूसरे पौधे के बलियों पर चला जाता है तो वह भी संक्रमित हो जाते हैं. ऐसे में किसान रासायनिक उपाय करते हैं लेकिन अगर किसान कुछ जरूरी सावधानी बरत लें तो हल्दी रोग से फसल को बचाया जा सकता है.
तुरंत बरतें ये सावधानी
वैसे तो किसानों को धान की रोपाई से पहले पौध तैयार करते समय बीज को उपचारित कर लेना चाहिए. बीज उपचारित करने के बाद अगर धान की फसल तैयार करते हैं तो हल्दी रोग लगने की संभावना बेहद कम हो जाती है. अगर उसके बावजूद भी आपकी धान की फसल में यह रोग दिखाई देता है तो सावधानी बरतें कि धान की फसल में पानी बिल्कुल भी ना लगाएं, पानी लगाने से मिट्टी में नमी आती है और यह स्थिति हल्दी रोग को फैलने में मदद करती है. ऐसे बेहद जरूरी होने पर ही सिंचाई करें अन्यथा सिंचाई बिल्कुल भी ना करें.