‘नहीं मिल रहा कोई पैसा’, अमेठी में निराश्रित गोवंश पालने वाले किसानों के हाथ खाली
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Ground Report Pashudhan Sahbhagita Yojana Amethi : मुख्यमंत्री पशुधन सहभागिता योजना को लेकर अमेठी में बड़े सवाल उठ रहे हैं. पशुपालकों का आरोप है इस योजना के तहत मिलने वाली धनराशि लाभार्थियों तक नहीं पहुंच रही. किसानों का कहना है कि अगर योजना संचालित है तो उन्हें इसका लाभ मिलना चाहिए. पशुधन सहभागिता योजना में चार निराश्रित गोवंश के संरक्षण पर कुल 6000 रुपये की धनराशि किसानों को मिलती है. लोकल 18 से किसान चंदन पांडे बताते हैं कि उनके पास कई जानवर हैं. विभाग को जानकारी भी दी है, लेकिन इसके बाद भी उन्हें योजना की धनराशि मिली है.
अमेठी. निराश्रित गोवंश सड़कों पर न घूमें और उनके खान-पान में कोई दिक्कत न हो, इसके लिए प्रदेश में मुख्यमंत्री पशुधन सहभागिता योजना संचालित की जा रही है. इस योजन के तहत गौशालाओं और किसानों को इन बेसहारा गायों को पालने के लिए आर्थिक सहायता दी जाती है, लेकिन मुख्यमंत्री पशुधन सहभागिता योजना अमेठी जिले में धरातल पर उतरती नजर नहीं दिख रही. आरोप है कि इस योजना के तहत मिलने वाली राशि लाभार्थियों तक नहीं पहुंच रही. बजट का हवाला देते हुए विभाग ने अपना पल्ला झाड़ लिया है. किसानों का कहना है कि अगर योजना संचालित है तो उन्हें इसका लाभ मिलना चाहिए.
अमेठी जिले में पशुधन सहभागिता योजना अगस्त 2019 से संचालित है. बीते 7 साल के आंकड़ों के मुताबिक पशुधन सहभागिता योजना के तहत 2553 लाभार्थियों ने आवेदन किया है, लेकिन इनमें से बहुत ही कम लोगों को लाभ मिला. आंकड़ों के मुताबिक, 1216 लाभार्थियों को ही अब तक इस योजना का लाभ मिला है. इस हिसाब से करीब 1300 से अधिक लाभार्थी हैं जिन्हें इस योजना में अब तक लाभ नहीं मिला है.
जांच होनी चाहिए
पशुधन सहभागिता योजना में चार निराश्रित गोवंश के संरक्षण पर कुल 6000 रुपये की धनराशि किसानों को मिलती है. किसानों का आरोप कि उन्हें न तो योजना का लाभ मिलता है, न ही योजना की जानकारी दी जाती है. लोकल 18 से अमेठी के किसान शिवकुमार पांडे बताते हैं कि योजना कब चलती है, कब खत्म हो जाती है, न तो इसकी जानकारी किसान दिवस में दी जाती है, न ही अन्य स्थानों पर, ऐसे में कैसे लाभ मिल पाएगा. शिवकुमार आरोप लगाते हैं कि विभागीय अधिकारी योजना का पैसा खा जाते हैं. इसकी जांच होनी चाहिए.
क्या बोले अधिकारी
किसान चंदन पांडे बताते हैं कि उनके पास कई जानवर हैं, जिन्हे उन्होंने संरक्षित किया है और विभाग को जानकारी भी दी है, लेकिन इसके बाद भी उन्हें योजना से न तो जोड़ा गया, न ही उन्हें योजना की धनराशि मिली है. इसकी जांच होनी चाहिए. कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए. किसान राजकुमार पांडे बताते हैं कि मैं भी इस योजना से वंचित हूं. इस समस्या पर जिले के मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी ने कहा कि योजना के तहत आए आवेदन पत्रों की जांच होती है. जांच के बाद लाभ दिया जाता है. वर्तमान समय में बजट का भी कुछ अभाव है, जिसके कारण हो सकता है कि कुछ लाभार्थी वंचित हों, लेकिन सत्यापन किया जाएगा और जो भी पात्र लाभार्थी हैं, उनको इसका लाभ दिया जाएगा.
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प्रियांशु गुप्ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…
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