नागेश्वरनाथ से कुबेर टीला तक, अयोध्या के इन शिवधामों का इतिहास है बेहद खास
Last Updated:
भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या जहां राम भक्ति के लिए प्रसिद्ध है, वहीं यहां स्थित प्राचीन शिव मंदिर भी श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र हैं. सावन महीने में इन शिवधामों में देशभर से भक्त पहुंचकर जलाभिषेक और रुद्राभिषेक करते हैं.
भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या में स्थित नागेश्वरनाथ मंदिर का धार्मिक और पौराणिक महत्व बेहद विशेष माना जाता है. सावन के पवित्र महीने में यहां देश के विभिन्न राज्यों से हजारों शिवभक्त और कांवड़िये भगवान शिव का जलाभिषेक करने पहुंचते हैं. मान्यता है कि सावन में नागेश्वरनाथ महादेव के दर्शन और विधि-विधान से पूजा करने से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं.
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस मंदिर की स्थापना भगवान श्रीराम के पुत्र कुश ने कराई थी. कहा जाता है कि सरयू नदी में स्नान के दौरान कुश का बाजूबंद एक नागकन्या को मिला था. नागकन्या भगवान शिव की परम भक्त थी. उसकी श्रद्धा से प्रसन्न होकर कुश ने इस स्थान पर भगवान शिव का मंदिर बनवाया, जो आगे चलकर नागेश्वरनाथ मंदिर के नाम से प्रसिद्ध हुआ. सावन महीने में श्रद्धालु सरयू स्नान के बाद नागेश्वरनाथ मंदिर पहुंचकर जल, बेलपत्र, धतूरा, भांग और पुष्प अर्पित करते हैं. सोमवार और शिवरात्रि के अवसर पर यहां विशेष पूजा-अर्चना और रुद्राभिषेक का आयोजन होता है. मंदिर परिसर में सुबह से देर रात तक ‘हर-हर महादेव’ और ‘बम-बम भोले’ के जयकारे गूंजते रहते हैं.
रामकोट स्थित प्राचीन राम कचहरी मंदिर आस्था, श्रद्धा और धार्मिक परंपराओं का प्रमुख केंद्र माना जाता है. इस मंदिर में स्थापित भगवान शिव का सहस्रलिंगम (1008 शिवलिंग युक्त शिवलिंग) भक्तों के बीच विशेष श्रद्धा का विषय है. मान्यता है कि इस दिव्य शिवलिंग के दर्शन और पूजन से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन के कष्ट दूर होते हैं. राम कचहरी मंदिर का यह सहस्रलिंगम इसलिए भी विशेष है, क्योंकि इस पर ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र 1008 बार अंकित है. श्रद्धालुओं का विश्वास है कि श्रद्धापूर्वक इसके दर्शन करने मात्र से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है.
Add News18 as
Preferred Source on Google
राम मंदिर के दर्शन के लिए देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के बीच श्रृंगार भवन मंदिर स्थित प्राचीन श्रृंगेश्वर महादेव भी विशेष आस्था का केंद्र हैं. यहां सदियों पुराना सफेद स्फटिक शिवलिंग विराजमान है, जिसे श्रद्धालु अत्यंत चमत्कारी और मनोकामना पूर्ण करने वाला मानते हैं. मंदिर के पुजारी निखिल गोस्वामी के अनुसार, भगवान सांब सदाशिव अपने परिवार सहित यहां विराजमान हैं. सावन और अधिक मास में इस मंदिर का महत्व कई गुना बढ़ जाता है. इस दौरान श्रद्धालु जलाभिषेक, दुग्धाभिषेक, रुद्राभिषेक और विभिन्न औषधीय अभिषेक कर भगवान शिव का पूजन करते हैं.
रामनगरी के दक्षिण दिशा में श्रीराम जन्मभूमि के समीप स्थित क्षीरेश्वरनाथ महादेव मंदिर धार्मिक आस्था और पौराणिक महत्व का प्रमुख केंद्र है. सावन महीने में यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ के दर्शन-पूजन और रुद्राभिषेक के लिए पहुंचते हैं. मान्यता है कि सच्चे मन से पूजा-अर्चना करने पर भगवान शिव भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं. अयोध्या के विद्वान वरुण दास बताते हैं कि क्षीरेश्वरनाथ मंदिर का इतिहास रामायण काल से जुड़ा हुआ माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इक्ष्वाकु वंश के राजा महाराज दशरथ ने पुत्र प्राप्ति की कामना से इसी स्थान पर भगवान शिव के शिवलिंग की स्थापना कराई थी. उन्होंने गोदुग्ध से भगवान शिव का रुद्राभिषेक किया और संतान प्राप्ति का आशीर्वाद मांगा. भगवान शिव की कृपा से बाद में महाराज दशरथ को भगवान श्रीराम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न जैसे चार दिव्य पुत्रों की प्राप्ति हुई.
रामनगरी अयोध्या को जहां भगवान श्रीराम की जन्मभूमि के रूप में विश्वभर में पहचान मिली है, वहीं यह नगरी प्राचीन शिवधामों की वजह से भी विशेष धार्मिक महत्व रखती है. अयोध्या में स्थापित नौ नाथ महादेव मंदिरों में से एक प्रमुख धाम कोटेश्वरनाथ महादेव है, जो श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के समीप स्थित है. मान्यता है कि यहां भगवान शिव स्वयं अयोध्या की रक्षा और समृद्धि के लिए विराजमान हैं. सावन के पवित्र महीने में इस मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है और जलाभिषेक व रुद्राभिषेक का विशेष महत्व माना जाता है. मान्यता है कि कोटेश्वरनाथ महादेव के दर्शन और विधि-विधान से पूजन करने से राजस्व, प्रशासन और शासन से जुड़े कार्यों में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं. श्रद्धालु यह भी मानते हैं कि यहां पूजा-अर्चना करने से राज्य सुख, सम्मान और सफलता की प्राप्ति होती है. यही वजह है कि सावन के दौरान बड़ी संख्या में भक्त यहां विशेष पूजा करने पहुंचते हैं.
अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि परिसर के कुबेर टीला पर स्थित भगवान शंकर का प्राचीन मंदिर श्रद्धालुओं की विशेष आस्था का केंद्र है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह स्थान अत्यंत प्राचीन है और भगवान शिव यहां अयोध्या के रक्षक के रूप में विराजमान हैं. राम मंदिर के दर्शन के साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालु कुबेर टीला पहुंचकर भगवान शंकर का भी पूजन-अर्चन करते हैं.
मान्यता है कि भगवान श्रीराम ने लंका विजय के बाद अयोध्या लौटकर भगवान शिव की आराधना की थी. इसी परंपरा के कारण रामनगरी में शिव उपासना का विशेष महत्व माना जाता है. राम मंदिर परिसर के विकास के दौरान कुबेर टीला स्थित प्राचीन शिव मंदिर का भी संरक्षण और सौंदर्यीकरण किया गया, जिससे इसकी भव्यता और बढ़ गई है.