पर्यावरण के लिए ऐसा प्रेम की, सरकारी सेवा के साथ त्रिवेणी प्रसाद ने लगाए लाखों पौधे
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अमेठी के त्रिवेणी प्रसाद सिंह कभी रेलगाड़ियों की दिशा को मार्गदर्शित करते थे, लेकिन सेवानिवृत होने के बाद उन्होंने पर्यावरण को हरा भरा बनाने की ठानी. अब आराम करने के बजाय उन्होंने समाज को अपना जीवन कुर्बान करने का मन बनाया. उन्होंने 1989 से पौधारोपण का कार्य शुरू किया. तब से आज तक वह पौधों को लगाते चले आ रहे हैं.
अमेठी: 40 सालों का सफर न थकान ना टूटा हौसला और यह सफर बढ़ता ही जाता जी हां एक तरफ जहां पर्यावरण को लोग प्रदूषित कर रहे हैं और पर्यावरण को प्रदूषण में धकेलने के साथ-साथ वृक्षों की लगातार कटान कर रहे हैं. वहीं एक शख्स ऐसे भी हैं, जिन्होंने अपनी 40 साल के सफरनामे में अपनी पहचान ट्री मैन के रूप में बनाई है. यह कहानी जिनकी है वह अपने आप में वृक्षारोपण के साथ बहुत बड़े पर्यावरण प्रेमी है, जो पर्यावरण की सुरक्षा का जिम्मा अपनी खुद की जागरूकता से मानते हैं.
अमेठी के त्रिवेणी प्रसाद सिंह कभी रेलगाड़ियों की दिशा को मार्गदर्शित करते थे, लेकिन सेवानिवृत होने के बाद उन्होंने पर्यावरण को हरा भरा बनाने की ठानी. अब आराम करने के बजाय उन्होंने समाज को अपना जीवन कुर्बान करने का मन बनाया. उन्होंने 1989 से पौधारोपण का कार्य शुरू किया. तब से आज तक वह पौधों को लगाते चले आ रहे हैं.
लाखों पौधे लगा चुके हैं त्रिवेणी प्रसाद
वह सरकार की सेवा देने के साथ-साथ यह बचे समय में पौधारोपण का काम करते थे. धीरे-धीरे इनकी पहचान बनती गई और आज इन्होंने वर्ष 2026 तक लाखों की संख्या में पौधों को लगा चुके हैं. त्रिवेणी प्रसाद सिंह भेंटुआ ब्लाक के भीमी गांव के रहने वाले हैं. किसी एनजीओ और किसी संस्था का सहारा लेने के बजाय वह खुद पेड़ खरीदते हैं और उसका पौधारोपण कर फिर उसे प्रकृति के लिए तैयार करते हैं. वह प्रतिवर्ष लगभग हजारों पौधों को लगाते हैं. इसके साथ ही उन पौधों की देखभाल भी करते हैं.
धरती का अस्तित्व बचाने के लिए पौधारोपण जरूरी
लोकल 18 से बातचीत में उन्होंने बताया कि वह जब रेलवे में अपनी सेवा दे रहे थे, तो उन्हें डीआरएम कमलेश गुप्ता ने पौधारोपण का काम सौंपा. वह लोगों से लगाार पौधों को लगाने की अपील भी करते हैं. उन्होंने कहा कि अगर पेड़ नहीं रहेगें तो धरती का अस्तित्व नहीं बचेगा. जब धरती का अस्तित्व नहीं बचेगा तो कोई भी प्राणी जीवित नहीं रहेगा. उन्होंने बताया कि वह खुद से पेड़ खरीदते हैं. यदि किसी ने उन्हें सहयोग कर दिया तो ठीक है, नहीं तो वह खुद से सभी काम अपने निजी खर्चे से करते हैं.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें