महंगे इलाज से राहत! मेरठ मेडिकल कॉलेज में फ्री होगा हीमोफीलिया-थैलेसीमिया मरीजों का इलाज
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Meerut News: मेरठ के लाला लाजपत राय मेडिकल कॉलेज (LLRM) ने हीमोफीलिया और थैलेसीमिया जैसी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए एक बड़ी और राहत भरी पहल शुरू की है. कॉलेज प्रशासन ने इन बीमारियों की गंभीरता और मरीजों को होने वाले तेज दर्द को देखते हुए ब्लड बैंक के पास ही एक विशेष डेडिकेटेड वार्ड बना दिया है. अब मरीजों को इलाज या बेड के लिए इमरजेंसी में घंटों इंतजार नहीं करना पड़ेगा, बल्कि उन्हें तुरंत जरूरी फैक्टर और ट्रीटमेंट उपलब्ध कराया जाएगा. खास बात यह है कि निजी अस्पतालों में लाखों खर्च कराने वाला यह इलाज यहां पूरी तरह फ्री मिलेगा, जिससे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के हजारों परिवारों को बड़ी मदद मिलेगी.
मेरठ: पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ और आसपास के जिलों के उन मरीजों के लिए एक बहुत अच्छी खबर है, जो हीमोफीलिया और थैलेसीमिया जैसी बीमारियों से जूझ रहे हैं. अब इन मरीजों को इलाज के लिए अस्पतालों की लंबी लाइनों में नहीं लगना होगा और न ही बेड के लिए भटकना पड़ेगा. मेरठ के लाला लाजपत राय मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने मरीजों की तकलीफ को समझते हुए ब्लड बैंक के बिल्कुल नजदीक एक विशेष वार्ड शुरू कर दिया है, जहां पहुंचते ही मरीज को तुरंत उपचार मिलना शुरू हो जाएगा.
मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉक्टर आरसी गुप्ता ने बताया कि हीमोफीलिया और थैलेसीमिया दोनों ही ऐसी बीमारियां हैं जो बचपन से ही मरीज को प्रभावित करती हैं और इनमें होने वाला दर्द बहुत ज्यादा होता है. पहले इन मरीजों को इमरजेंसी में एडमिट किया जाता था, जहां गंभीर हादसों के मरीजों की भीड़ के कारण कई बार बेड मिलने में देरी हो जाती थी. अब ब्लड बैंक के पास ही वार्ड होने से फायदा यह होगा कि मरीजों को बिना किसी इंतज़ार के तुरंत ‘फैक्टर’ (खून का थक्का जमाने वाला प्रोटीन) लगाया जा सकेगा और उन्हें दर्द से राहत मिल जाएगी.
क्या हैं ये बीमारियां और क्यों हैं खतरनाक?
इन दोनों बीमारियों को मेडिकल साइंस में बहुत गंभीर माना जाता है. हीमोफीलिया में मरीज को चोट लगने पर खून का थक्का नहीं जमता, जिससे मामूली चोट पर भी शरीर से लगातार खून बहता रहता है. कई बार जोड़ों के अंदर ब्लीडिंग होने से भयानक सूजन और दर्द पैदा हो जाता है. वहीं थैलेसीमिया एक ऐसी बीमारी है जो माता-पिता के खराब जीन से बच्चों में आती है. इसमें शरीर में हीमोग्लोबिन सही तरीके से नहीं बनता, जिससे बच्चे का विकास रुक जाता है, हड्डियां कमजोर हो जाती हैं और उसे बार-बार खून चढ़ाने की जरूरत पड़ती है.
निजी अस्पतालों की लूट से मिलेगी आजादी
प्राइवेट अस्पतालों में हीमोफीलिया और थैलेसीमिया का इलाज बहुत महंगा होता है. कई बार एक-एक इंजेक्शन और फैक्टर की कीमत हजारों-लाखों में होती है, जो आम आदमी की पहुंच से बाहर है. शासन के निर्देशों का पालन करते हुए मेरठ मेडिकल कॉलेज में यह सभी सुविधाएं और दवाएं मरीजों को बिल्कुल मुफ्त दी जा रही हैं. इससे न सिर्फ मरीजों का पैसा बचेगा बल्कि समय पर इलाज मिलने से उनकी जान भी सुरक्षित रहेगी.
मरीजों की सुविधा के लिए की गई विशेष व्यवस्था
डॉक्टर आरसी गुप्ता का कहना है कि प्रशासन का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी मरीज को इलाज के अभाव में तड़पना न पड़े. नए वार्ड में अनुभवी स्टाफ और विशेषज्ञों की तैनाती की गई है जो इन मरीजों की विशेष देखभाल करेंगे. अब पश्चिमी यूपी के जिलों से आने वाले मरीजों को सीधे ब्लड बैंक के पास बने इस नए वार्ड में जाना होगा, जहां उन्हें प्राथमिकता के आधार पर त्वरित इलाज उपलब्ध कराया जाएगा.
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सीमा नाथ 6 साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत शाह टाइम्स में रिपोर्टिंग के साथ की जिसके बाद कुछ समय उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम …और पढ़ें