पहलगाम अटैक में शुभम को खोने वाले पिता बोले, ” उसकी मुस्कान अब तस्वीरों में”
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पहलगाम हमले में इकलौते बेटे शुभम को खोने वाले पिता संजय द्विवेदी आज भी उसकी याद में भावुक हो जाते हैं. वे बताते हैं कि हंसमुख और समझदार शुभम के जाने के बाद घर की सारी जिम्मेदारियां उन्हें खुद संभालनी पड़ रही हैं. बहू को बेटी की तरह साथ लेकर परिवार दुख के बीच एक-दूसरे का सहारा बना है. पिता का कहना है कि सच्चा न्याय तभी होगा जब आतंकवाद का अंत हो, ताकि किसी और परिवार को ऐसा दर्द न सहना पड़े.
कानपुर. पहलगाम अटैक में बेटे शुभम द्विवेदी को खोने वाले पिता संजय द्विवेदी आज भी बेटे को याद कर भावुक हो जाते हैं. उन्होंने कहा कि शुभम बचपन से ही बहुत तेज, समझदार और हंसमुख स्वभाव का था. उसके चेहरे पर हमेशा मुस्कान रहती थी. वह जब भी किसी से मिलता था, मुस्कुराकर मिलता था. उसका व्यवहार इतना अच्छा था कि हर कोई उसे पसंद करता था, उन्होंने कहा कि आज भी हर पल शुभम का वही मुस्कुराता चेहरा आंखों के सामने घूमता रहता है. घर का हर कोना बेटे की याद दिलाता है, उन्होंने कहा कि शुभम उनका इकलौता बेटा था. कभी नहीं सोचा था कि एक दिन ऐसा भी आएगा जब बेटे को इस तरह खोना पड़ेगा, इस घटना ने पूरे परिवार को अंदर तक तोड़ दिया है.
बेटे के जाने के बाद खुद संभाल रहे जिम्मेदारियां
संजय द्विवेदी ने कहा कि बेटे के इस दुनिया से जाने के बाद परिवार की सारी जिम्मेदारियां अब वह खुद निभा रहे हैं. परिवार में सबसे बड़े होने के कारण घर की हर जिम्मेदारी संभालनी पड़ रही है. जो काम पहले शुभम करता था, अब उन्हें पूरा करने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि बेटे की कमी कभी पूरी नहीं हो सकती, लेकिन परिवार को संभालना भी जरूरी है, यही सोचकर खुद को मजबूत बनाए हुए हैं.
बहू बेटी की तरह रहती है साथ
उन्होंने अपनी बहू के बारे में भी भावुक बातें कहीं, कहा कि बहू उनके साथ बेटी की तरह रहती है. परिवार ने उसे हमेशा बेटी जैसा सम्मान दिया है. अगर वह कभी अपने किसी सपने या इच्छा के बारे में बताएगी, तो उसे पूरा करना उनकी जिम्मेदारी होगी. उन्होंने कहा कि अब परिवार एक-दूसरे का सहारा बनकर जी रहा है. दुख बड़ा है, लेकिन साथ रहने से हिम्मत मिलती है.
पीएम मोदी से मुलाकात में रखी थी मांग
शुभम के पिता ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के दौरान उन्होंने कहा था कि यह कोई सामान्य घटना नहीं थी. यह देश पर दुश्मनों का हमला था. इस हमले में शुभम समेत 26 लोगों की जान गई थी, उन्होंने कहा कि शुभम और बाकी सभी लोगों ने साहस दिखाया और अपने धर्म व देश का सम्मान बनाए रखते हुए जान दी, इसलिए सभी मृतकों को शहीद का दर्जा या राजकीय सम्मान जरूर मिलना चाहिए.
न्याय का मतलब आतंकवाद का अंत
जब उनसे पूछा गया कि उनके लिए न्याय का क्या मतलब है, तो उन्होंने साफ कहा कि उनके लिए न्याय का मतलब आतंकवादियों का नाश है. देश को आतंकवाद मुक्त करना ही असली न्याय है. उन्होंने कहा कि बेटा वापस नहीं आ सकता, लेकिन अगर आगे किसी और परिवार को ऐसा दुख न सहना पड़े, तभी सच्चा इंसाफ होगा. बेटे को याद करते हुए उनकी आंखें नम थी, लेकिन शब्दों में बेटे पर गर्व और देश के लिए चिंता साफ दिखाई दी.
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नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें