पाठा का 100 साल पुराना कुंआ भीषण गर्मी में भी नहीं सूखता, जाने
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करीब 100 साल पुराना यह कुआं आज भी अपनी मजबूत जलधारा के लिए जाना जाता है. गांव वालों का कहना है कि उन्होंने आज तक इस कुएं को पूरी तरह सूखते नहीं देखा है. एक समय था जब पूरे गांव के लोग इसी कुएं का पानी पीने और घरेलू कामों में इस्तेमाल करते थे,लेकिन समय के साथ इसकी साफ-सफाई बंद हो गई,जिसके चलते अब लोग इसका पानी पीने से बचते हैं. यह अनोखा कुआं चित्रकूट जिले के पाठा क्षेत्र के सरहट गांव में स्थित है.
चित्रकूटः बुंदेलखंड में गर्मी शुरू होते ही पानी का संकट गहराने लगता है. कई जगहों में हैंडपंप जवाब दे देते हैं और तालाब सूखने लगते हैं, लेकिन इसी प्यासे इलाके में एक ऐसा कुआं भी मौजूद है. जो आज भी लोगों के लिए हैरानी का विषय बना हुआ है. भीषण गर्मी में जब आसपास के जलस्रोत सूख जाते हैं, तब भी इस कुएं में पानी बना रहता है. यही वजह है कि गांव के लोग इसे अपने पूर्वजों की बड़ी धरोहर मानते हैं.और आज भी यह गांव में बना हुआ है.
100 साल पुराना है कुआं
यह अनोखा कुआं चित्रकूट जिले के पाठा क्षेत्र के सरहट गांव में स्थित है. करीब 100 साल पुराना यह कुआं आज भी अपनी मजबूत जलधारा के लिए जाना जाता है. गांव वालों का कहना है कि उन्होंने आज तक इस कुएं को पूरी तरह सूखते नहीं देखा है. एक समय था जब पूरे गांव के लोग इसी कुएं का पानी पीने और घरेलू कामों में इस्तेमाल करते थे,लेकिन समय के साथ इसकी साफ-सफाई बंद हो गई,जिसके चलते अब लोग इसका पानी पीने से बचते हैं. उनका मानना है कि अगर प्रशासन या ग्राम पंचायत की ओर से समय-समय पर इसकी सफाई करवा दी जाए, तो यह कुआं आज भी पूरे गांव की प्यास बुझाने की क्षमता रखता है. खास बात यह है कि जहां आज के समय में बने कई बोरवेल और कुएं गर्मी में सूख जाते हैं, वहीं यह पुराना कुआं लगातार पानी देता रहता है.
गांव के लोग बोले पूर्वजों की है धारोहर
वही सरहट गांव के निवासी राजेश कुमार ने लोकल 18 को जानकारी में बताया कि यह कुआं उनके पूर्वजों के समय का है और इसे बने लगभग एक सदी बीत चुकी है.उन्होंने कहा कि पहले गांव के लोग इसी कुएं पर निर्भर रहते थे पीने के पानी से लेकर अन्य जरूरतों तक, हर काम में इसका उपयोग होता था. लेकिन वर्षों से सफाई नहीं होने के कारण अब लोग इसका पानी इस्तेमाल नहीं करते है.उनका कहना है कि इस कुएं का जलस्रोत बेहद मजबूत है.जबकि आधुनिक समय में बने कई कुएं और बोरिंग गर्मी आते ही जवाब दे देते हैं.अगर इस ऐतिहासिक कुएं की देखरेख की जाए, तो यह आज भी गांव के लिए बड़ा सहारा बन सकता है.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें