‘पेपर रद्द होने से घबराया नहीं’, री-नीट में गाजीपुर के टॉपर अजान ने बताए सीक्रेट
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Success Story NEET Re Exam 2026 : पेपर रद्द होने के बाद जहां कई अभ्यर्थी तनाव में थे, गाजीपुर के अजान अख्तर ने हार नहीं मानी. री-नीट में 542 अंक हासिल करने वाले अजान लोकल 18 से बताते हैं कि सफलता के लिए सिर्फ पढ़ना काफी नहीं, अपनी गलतियों का विश्लेषण करना भी जरूरी है. अजान ने पहली परीक्षा में 635 अंक हासिल किए थे. अजान कहते हैं कि बायोलॉजी पर अधिकांश छात्रों की पकड़ अच्छी होती है, लेकिन फिजिक्स में अतिरिक्त मेहनत की जरूरत पड़ती है. अजान के अनुसार, मेडिकल प्रवेश परीक्षा के लिए रोजाना 10 से 12 घंटे की अनुशासित पढ़ाई जरूरी है.
गाजीपुर. NEET पेपर 2026 रद्द होने और दोबारा परीक्षा आयोजित होने के बाद देशभर के अभ्यर्थियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती मानसिक दबाव से बाहर निकलना था. ऐसे माहौल में गाजीपुर के एमएच स्कूल के पास रहने वाले अजान अख्तर ने हिम्मत नहीं हारी, पहले परीक्षा में 635 अंक हासिल करने वाले अजान ने री-नीट में 542 अंक प्राप्त किए. Local 18 से बातचीत में उन्होंने बताया कि परीक्षा रद्द होने के बाद उन्होंने निराश होने के बजाय अपनी तैयारी को और मजबूत किया. अजान बताते हैं कि पहली NEET परीक्षा अपेक्षाकृत आसान थी, उनका कहना है कि उस पेपर में पिछले वर्षों के प्रश्न (PYQs) काफी मददगार साबित हुए थे, और कई छात्रों ने उन्हें आसानी से हल कर लिया था.लेकिन री-नीट का पेपर पहले की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण रहा
सिर्फ तैयारी को ब्रश-अप किया
अजान कहते हैं कि परीक्षा दोबारा होने की खबर मिलने के बाद उन्होंने तनाव लेने के बजाय अपनी तैयारी को दोहराने पर ध्यान दिया. उन्होंने पहले से पढ़े हुए विषयों का रिवीजन किया और अपनी कमजोरियों पर काम किया. अजान ने अपनी सफलता का श्रेय परिवार के साथ-साथ अपने शिक्षकों को भी दिया.उन्होंने बताया कि फिजिक्स वाला के राजेश सर, आशुतोष सर, प्रेम सर, रजनीश सर, रिंका मैम, अनुज सर और अन्य शिक्षकों ने तैयारी के दौरान लगातार मार्गदर्शन किया, जिससे पढ़ाई की दिशा स्पष्ट रही.
ज्यादा पढ़ाई नहीं
अपनी तैयारी की रणनीति बताते हुए अजान ने कहा कि वह सिर्फ लंबे समय तक पढ़ाई करने पर भरोसा नहीं करते थे. उनके अनुसार, हर टेस्ट और मॉक पेपर के बाद अपनी गलतियों का विश्लेषण करना सबसे महत्वपूर्ण था. इसी आदत ने उन्हें लगातार बेहतर प्रदर्शन करने में मदद की. अजान के अनुसार, मेडिकल प्रवेश परीक्षा के लिए रोजाना 10 से 12 घंटे की अनुशासित पढ़ाई जरूरी है. हालांकि उन्होंने कहा कि केवल घंटों की संख्या नहीं, बल्कि पढ़ाई की गुणवत्ता और नियमित अभ्यास भी उतना ही महत्वपूर्ण है.
फिजिक्स पर ज्यादा फोकस
भविष्य के अभ्यर्थियों को सलाह देते हुए अजान ने कहा कि बायोलॉजी पर अधिकांश छात्रों की पकड़ अच्छी होती है, लेकिन फिजिक्स में अतिरिक्त मेहनत की जरूरत पड़ती है. उन्होंने विशेष रूप से मॉडर्न फिजिक्स और बायोलॉजी में प्लांट फिजियोलॉजी जैसे विषयों पर मजबूत पकड़ बनाने की सलाह दी. स्पेशलाइजेशन को लेकर अजान ने कहा कि फिलहाल उनका पूरा ध्यान एक अच्छे मेडिकल कॉलेज में प्रवेश लेने पर है. आगे चलकर जिस विषय में रुचि होगी, उसी में विशेषज्ञता हासिल करेंगे. अजान कहते हैं, “डॉक्टर तो डॉक्टर होता है, चाहे वह एलोपैथी का हो, आयुर्वेद का हो या होम्योपैथी का, सबसे जरूरी है लोगों की सेवा करना.”
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प्रियांशु गुप्ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…और पढ़ें