फिर शुरू हुआ बैलगाड़ी की सवारी, बुलेट टायर से बनी मॉडर्न बुलक कार्ट तैयार

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फिर  शुरू हुआ बैलगाड़ी की सवारी, बुलेट टायर से बनी मॉडर्न बुलक कार्ट तैयार


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Saharanpur News: नगर निगम ने बुलक कार्ट को मॉर्डन रूप देते हुए उसको एक गाड़ी का रूप देते हुए म्यूजिक सिस्टम, बारिश, धूप से बचाव के लिए छत और भी कई मॉर्डन तकनीक का इस्तेमाल किया है लेकिन इस गाड़ी को चलाने वाला बैल ही है जो पुरानी परंपरा को दर्शाता है.

भारत की प्राचीन परंपरा बैलगाड़ी जिसमें बड़े-बड़े नेताओं से लेकर VIP भी सफर किया करते थे. जोकि आज के समय में लगभग खत्म सी हो चुकी है. सहारनपुर नगर निगम ने बैलगाड़ी की उस परंपरा को बचाने के लिए मॉडर्न बुलक कार्ट तैयार की है. इस बुलक कार्ट को बनाने के लिए लकड़ी की बग्गी के स्थान पर लौहे का इस्तेमाल किया गया है जबकि पहियों के स्थान पर बुलेट बाइक के टायरों का इस्तेमाल किया है.

इतना ही नही बुलक कार्ट को मॉर्डन रूप देते हुए उसको एक गाड़ी का रूप देते हुए म्यूजिक सिस्टम, बारिश, धूप से बचाव के लिए छत और भी कई मॉर्डन तकनीक का इस्तेमाल किया है लेकिन इस गाड़ी को चलाने वाला बैल ही है जो पुरानी परंपरा को दर्शाता है. मॉडर्न बुलेट कार्ट का इस्तेमाल निगम गौशाला में भ्रमण करने आने वाले बच्चों व उनके माता-पिता को घुमाने के लिए किया जाता है जो कि पूरे तरीके से निशुल्क है. बच्चों को इसमें घूमने के साथ-साथ उनको पुरानी परंपरा से भी अवगत कराया जाता है. कुछ स्कूल अपने छात्रों को यहां पर पिकनिक के लिए भी लेकर आते हैं.

बुलेट पार्ट्स से तैयार हुई मॉडर्न बुलक कार्ट
नगर निगम पशु चिकित्सा एवं कल्याण अधिकारी डॉक्टर संदीप मिश्रा ने लोकल 18 से बात करते हुए बताया कि नगर निगम सहारनपुर द्वारा मां शाकंभरी कान्हा उपवन गौशाला का संचालन किया जा रहा है. जिसमे 586 गोवंश संरक्षित है और अपनी गौशाला को आत्मनिर्भर बनाने के लिए हम समय-समय पर विभिन्न प्रयास करते रहते है. हमारी गौशाला में समय-समय पर स्कूल के बच्चे, गांव के लोग गौशाला में घूमने के लिए, गौ संरक्षण जानने के लिए और गोवंश की महत्वता को जानने के लिए  घूमने के लिए आते है.  स्कूली बच्चों का एजुकेशन के साथ-साथ इंटरटेनमेंट हो सके और दूसरा जो बैलगाड़ी की परंपरा पहले कभी हुआ करती थी जो अब विलुप्त हो चुकी है तो हमने उसी को ध्यान में रखते हुए प्रदेश की पहली मॉर्डन बुलक कार्ट बनाई है.

10 बच्चों के बैठने की व्यवस्था
उसके माध्यम से हम जो बच्चे गौशाला में घूमने के लिए आते हैं उनको हम एजुकेशनल टीचिंग तो देते ही है साथ में उनका मॉर्डन बुलक कार्ट से एंटरटेनमेंट भी होता है. एक तरह से हम पुरानी सभ्यता को पुनः जीवित कर रहे हैं और दूसरा बच्चों को पुरानी परंपरा के प्रति शिक्षित भी कर रहे हैं. मॉर्डन बुलक कार्ट के माध्यम से बच्चों को हम मां शाकंभरी कान्हा उपवन गौशाला से नंदीशाला और अमृत तालाब जिसको गौ संवर्धित परिसर के रूप में हमने उसको नाम दिया है. उस परिसर में हम बच्चों को घुमाते हैं. उसमें करीब 10 बच्चों के बैठने की व्यवस्था है इसके साथ-साथ उसमें म्यूजिक सिस्टम भी लगाया गया है. बुलक कार्ट में बुलेट के 4 टायर जिससे कि इसमें और मजबूती आ सके साथ ही इसकी पूरी लोहे की बॉडी बनाई गई है साथ ही बच्चन के मनोरंजन के लिए म्यूजिक सिस्टम लगाया गया है तो आधुनिक साज सज्जाओ के साथ इसको चलाया जा रहा है.

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