बच्चों के मम्मी-पापा सुन लीजिए, अब बच्चे को बैग के साथ नहीं भेजना, स्कूल बैग का वजन होगा फाइनल

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बच्चों के मम्मी-पापा सुन लीजिए, अब बच्चे को बैग के साथ नहीं भेजना, स्कूल बैग का वजन होगा फाइनल


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Education News: नई नीति के मुताबिक  बैग का वजन बच्चे के शरीर के वजन का अधिकतम 10 फीसदी होगा.

बच्चों के बैग का वजन हो गया फाइनल. (सांकेतिक तस्वीर)

हाइलाइट्स

  • यूपी में अब बच्चों के स्कूल बैग का वजन होगा कम.
  • प्री-प्राइमरी स्कूल के बच्चों को नहीं ले जाना होगा बैग.
  • बच्चों के वजन के 10 फीसदी होगा बैग का वजन.
लखनऊः बच्चों के स्कूल बैग का बोझ आए दिन बढ़ता जा रहा है. बच्चे स्कूल बैग के बोझ तले दब रहे हैं. आलम यह है कि बच्चों के वजन के आधे वजन का तो बैग है. लेकिन अब ऐसा नहीं होगा. क्योंकि योगी सरकार ने बोझ को कम करने के लिए बड़ा फैसला लिया है. यानी कि अब बच्चों का स्कूल बैग अब भारी नहीं होगा. यूपी में स्कूल बैग नीति लागू की गई है और इसकी सबसे पहले पहल केंद्रीय विद्यालय में किया गया है. नई नीति के मुताबिक  बैग का वजन बच्चे के शरीर के वजन का अधिकतम 10 फीसदी होगा. नई शिक्षा नीति के तहत कक्षा के अनुसार बैग का वजन तय किया गया है. वहीं प्री-प्राइमरी बच्चों को बैग लाने की जरूरत नहीं है.

जानिए किस क्लास के बच्चे के बैग का कितना होगा वजन?
कक्षा 1-2: बैग वजन 1.6 से 2.2 किलोग्राम

कक्षा 3-5: बैग वजन 1.7 से 2.5 किलोग्राम

कक्षा 6-7: बैग वजन 2 से 3 किलोग्राम

कक्षा 8: बैग वजन 2.5 से 4 किलोग्राम

कक्षा 9-10: बैग वजन 2.5 से 4.5 किलोग्राम

कक्षा 11- 12: बैग वजन 3.5 से 5 किलोग्राम

विद्यालयों के विलय के खिलाफ याचिका पर सुनवाई आज
वहीं प्राइमरी स्कूलों के मर्जर के खिलाफ शुक्रवार को हाईकोर्ट लखनऊ बेंच में सुनवाई भी होगी. प्रदेश के परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों के मर्जर करने संबंधी आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है. कृष्णा कुमारी व अन्य की ओर से इस आदेश के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुनवाई होगी. याचिका में बेसिक शिक्षा विभाग के 16 जून के आदेश को चुनौती दी गई है. प्रदेश के प्राथमिक विद्यालयों को बच्चों की संख्या के आधार पर उच्च प्राथमिक या कंपोजिट स्कूल में विलय का प्रावधान किया गया है. याचिका में कहा गया है कि सरकार का ये फैसला बच्चों को निशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन करने वाला है.

याचिका में दी गई बच्चों की पढ़ाई छूटने की अपील
इसके अलावा यह भी दलील दी गई है कि विलय के कारण छोटे-छोटे बच्चों का स्कूल दूर हो जाएगा, जिसके चलते उनकी पढ़ाई छूट सकती है. जबकि शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत सरकार की ये कानूनी जिम्मेदारी बनती है कि प्रारंभिक शिक्षा के लिए बच्चों को नजदीक ही विद्यालय उपलब्ध कराएं.

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Prashant Rai

Prashant Rai is a seasoned journalist with over seven years of extensive experience in the media industry. Having honed his skills at some of the most respected news outlets, including ETV Bharat, Amar Ujala, a…और पढ़ें

Prashant Rai is a seasoned journalist with over seven years of extensive experience in the media industry. Having honed his skills at some of the most respected news outlets, including ETV Bharat, Amar Ujala, a… और पढ़ें

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