बासमती धान की खेती से कमाना है बंपर मुनाफा? नर्सरी तैयार करते समय इन बातों का रखें ख्याल

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बासमती धान की खेती से कमाना है बंपर मुनाफा? नर्सरी तैयार करते समय इन बातों का रखें ख्याल


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Basmati Paddy Farming Tips: जुलाई का महीना आते ही किसान धान की रोपाई की तैयारियों में पूरी तरह जुट जाते हैं. जब बात धान की हो और उसमें बासमती का नाम न आए, ऐसा तो हो ही नहीं सकता. बासमती को धान की शान कहा जाता है, जिसकी महक और लंबे दाने बाजार में सबसे ऊंचे दाम दिलाते हैं. लेकिन बासमती की बंपर पैदावार और लाजवाब खुशबू का असली राज इसकी सही ढंग से तैयार की गई नर्सरी में छिपा होता है. आइए शाहजहांपुर के प्रगतिशील किसान रनजोद सिंह से जानते हैं कि जुलाई के इस महीने में बासमती की नर्सरी तैयार करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए, जिससे फसल में बीमारियां भी न लगें और कमाई भी रिकॉर्ड तोड़ हो.

शाहजहांपुर: जुलाई का महीना आते ही देशभर के किसान धान की शान कहे जाने वाले बासमती चावल की खेती की तैयारियों में जुट गए हैं. बासमती की बेहतरीन पैदावार और खुशबूदार चावल के लिए यह समय सबसे उत्तम माना जाता है. कृषि एक्सपर्ट का कहना है कि बासमती की बंपर पैदावार की नींव इसकी सही ढंग से तैयार की गई नर्सरी पर टिकी होती है. अगर इस शुरुआती चरण में बीज की मात्रा, शुद्धता और बुवाई के सही तरीकों का ध्यान रखा जाए, तो आगे चलकर फसल में बीमारियां कम लगती हैं और उत्पादन में भारी बढ़ोतरी देखने को मिलती है.

प्रगतिशील युवा किसान रनजोद सिंह ने बताया कि बासमती चावल की खेती से मुनाफा कमाने के लिए जुलाई में नर्सरी प्रबंधन सबसे महत्वपूर्ण कदम है. किसानों को हमेशा प्रमाणित और स्वस्थ बीजों का ही चयन करना चाहिए. एक एकड़ मुख्य खेत में रोपाई करने के लिए नर्सरी तैयार करते समय 3.5 से 4 किलोग्राम बीज बिल्कुल पर्याप्त होता है. इससे ज्यादा या कम बीज डालने से पौधों की ग्रोथ पर सीधा असर पड़ता है. इसके अलावा, बुवाई से पहले बीजों का सही तरीके से उपचार करना जरूरी है, जिससे फसल को शुरुआती फंगस और लाइलाज रोगों से सुरक्षित रखा जा सके.

सही समय और उपयुक्त जलवायु
जुलाई का महीना बासमती की पौध तैयार करने के लिए सबसे अनुकूल माना जाता है. इस दौरान होने वाली मानसूनी बारिश और तापमान पौधों के शुरुआती ग्रोथ में मदद करते हैं. सही समय पर बुवाई करने से पौधों को मुख्य खेत में समय पर रोपा जा सकता है. इससे फसल को पकने के लिए सही मौसम मिलता है, जिससे चावल के दानों की लंबाई और उसकी पारंपरिक सुगंध पूरी तरह से निखर कर सामने आती है.

बीज की सही मात्रा का गणित
बासमती की खेती में सबसे बड़ी चूक बीज की मात्रा को लेकर होती है. एक एकड़ खेत में रोपाई के लिए नर्सरी तैयार करने हेतु केवल 3.5 से 4 किलोग्राम स्वस्थ बीज की ही जरूरत होती है. इससे कम बीज से पौधे कम पड़ेंगे, जबकि अधिक बीज डालने से नर्सरी घनी हो जाएगी. घनी नर्सरी के पौधे कमजोर और पतले रह जाते हैं, जो आगे चलकर अच्छी पैदावार नहीं दे पाते है.

बीज उपचार है सबसे जरूरी सुरक्षा
बुवाई करने से पहले बीजों को उपचारित करना बिल्कुल न भूलें. बीज जनित बीमारियों और फंगस से सुरक्षा के लिए अच्छे फंगीसाइड से उपचारित करें. यह प्रक्रिया फसल के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह काम करती है. शुरुआती रोगों से बची हुई नर्सरी के पौधे मुख्य खेत में जाकर तेजी से विकास करते हैं और किसानों को कीटनाशकों पर होने वाले अतिरिक्त खर्च से बचाते हैं.

नर्सरी की देखभाल और पोषण
बीज डालने के बाद नर्सरी की क्यारियों में हल्की नमी बनाए रखना बेहद जरूरी है. इसके साथ ही, खरपतवारों पर नियंत्रण और सही मात्रा में जैविक खाद का उपयोग पौधों को जरूरी पोषण देता है. लगभग 25 से 30 दिनों में जब पौध अच्छी तरह तैयार हो जाए, तब उसे मुख्य खेत में रोप देना चाहिए. इस वैज्ञानिक तरीके को अपनाकर किसान बासमती की खेती से कम लागत में रिकॉर्ड तोड़ मुनाफा कमा सकते हैं.

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Seema Nath

सीमा नाथ 6 साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत शाह टाइम्स में रिपोर्टिंग के साथ की जिसके बाद कुछ समय उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम …और पढ़ें



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