UP कैबिनेट में 28 प्रस्ताव आए, लेकिन किसे देखते ही सीएम योगी ने खारिज कर दिया

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UP कैबिनेट में 28 प्रस्ताव आए, लेकिन किसे देखते ही सीएम योगी ने खारिज कर दिया


CM Yogi News: उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने वाले है. सभी पार्टियां चुनावी तैयारियों में जुटी हुई हैं. इन सब के बीच सोमवार, यानी कि 6 जुलाई को योगी सरकार की कैबिनेट विधानसभा में जन-कल्याणकारी 28 प्रस्ताव लेकर आई. सीएम योगी समेत कैबिनेट ने 27 प्रस्तावों को ध्वनिमत से पारित करा लिया. लेकिन एक ऐसा प्रस्ताव था, जिसे देखते ही सीएम योगी की कैबिनेट ने खारिज कर दिया. आखिर ऐसा कौन-सा प्रस्ताव था उसे क्यों नामंजूर किया गया? आइए इन प्रस्तावों की इनसाइड स्टोरी जानते हैं.

दरअसल, सोमवार को हो रही कैबिनेट में सहायता प्राप्त अरबी और फारसी मदरसों के शिक्षकों को ग्रेच्युटी का लाभ देने का प्रस्ताव रखा गया. योगी कैबिनेट ने इस मदरसा ग्रेच्युटी योजना को फिलहाल के लिए टाल दिया है.

योगी कैबिनेट ने प्रस्ताव क्यों ठुकराया?

सरकार इस प्रस्ताव में कोई जल्दबाजी नहीं दिखाना चाह रही है. इसके पीछे सरकार की एक स्पष्ट नीति है. दरअसल, योगी सरकार पिछले काफी समय से मदरसों के आधुनिकीकरण, उनके पाठ्यक्रम को मुख्यधारा की शिक्षा (जैसे एनसीईआरटी) से जोड़ने और उनकी फंडिंग व प्रशासनिक ढांचे की पारदर्शिता काफी लंबे समय से काम कर रही है.

हाल के वर्षों में मदरसों के सर्वे कराए गए. इनकी संचालन और वित्तीय प्रबंधन की वास्तविक स्थिति पता करने की कोशिश की गई. सरकार का मानना है कि जब तक पूरी व्यवस्था पारदर्शी और राज्य के शिक्षा मानकों के अनुरूप नहीं हो जाती, तब तक सरकार सरकारी खजाने पर ग्रेच्युटी (सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाला फाइनेंसियल लाभ) जैसा अतिरिक्त वित्तीय बोझ डालने के पक्ष में नहीं है.

समान शिक्षा नीति पर जोर

सरकार का मुख्य फोकस यह है कि धार्मिक शिक्षा से ज्यादा आधुनिक विषयों (गणित, विज्ञान, कंप्यूटर) को तवज्जो मिले. जब तक सहायता प्राप्त मदरसे पूरी तरह से सरकारी और आधुनिक मानकों पर खरे नहीं उतरते, तब तक शिक्षकों के लिए इस तरह के स्थायी वित्तीय भत्तों को मंजूरी देना सरकार की नीतियों के खिलाफ माना जा रहा था. साथ ही इन सहायता प्राप्त मदरसों में नियुक्तियों और सेवा शर्तों की पूरी समीक्षा की जा रही है. ऐसे में बिना ढांचागत सुधार के ग्रेच्युटी देना उचित नहीं समझा गया.

कैबिनेट में पास हुए 27 प्रस्तावों की झलकियां

भले ही मदरसा शिक्षकों को झटका लगा हो, लेकिन राज्य के अन्य वर्गों के लिए योगी सरकार ने कई सौगात दी है:

जलालाबाद का नाम बदला शाहजहांपुर की जलालाबाद नगर पालिका का नाम आधिकारिक तौर पर बदलकर ‘परशुरामपुरी’ कर दिया गया है. यह फैसला स्थानीय लोगों की लंबे समय से चली आ रही मांग और पौराणिक मान्यताओं का सम्मान करते हुए लिया गया है.

स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़ी राहत

  1. होमगार्ड्स को सौगात: यूपी के होमगार्ड्स और उनके परिवारों के लिए बड़ा फैसला लेते हुए उन्हें अब 5 लाख रुपये तक का कैशलेस मेडिकल ट्रीटमेंट (आयुष्मान योजना की तर्ज पर) देने की मंजूरी दी गई है.
  2. नए अस्पताल और मेडिकल कॉलेज: वाराणसी में एक नए मेडिकल कॉलेज के निर्माण के लिए जमीन आवंटित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है. इसके साथ ही, स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने के लिए गोरखपुर और मुरादाबाद में 100-100 बेड के नए अस्पताल बनाए जाएंगे.

शिक्षा के क्षेत्र में विस्तार
युवाओं को उनके ही राज्य में उच्च शिक्षा के बेहतर विकल्प देने के लिए तीन नए निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना पर मुहर लगाई गई है:

  1. महर्षि योगी अंतर्राष्ट्रीय कृषि विश्वविद्यालय (कानपुर)
  2. ठाकुर युगराज सिंह विश्वविद्यालय (फतेहपुर)
  3. अजय कुमार गर्ग विश्वविद्यालय (गाजियाबाद)

निवेश, तकनीक और रोजगार
युवाओं को उद्यमी बनाने और यूपी को टेक हब के रूप में विकसित करने के लिए ‘यूपी स्टार्टअप मिशन-2026’ को मंजूरी दी गई है. इसके अलावा, विदेशी और घरेलू निवेश को आकर्षित करने के लिए एक नई ‘डेटा सेंटर पॉलिसी’ (Data Centre Policy) भी लागू की गई है, जिससे राज्य में रोजगार के हजारों नए अवसर पैदा होंगे.



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