बीड़ी पीते नेता को देखा और दीनदयाल उपाध्याय के मुंह से निकला- गलती हो गई

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बीड़ी पीते नेता को देखा और दीनदयाल उपाध्याय के मुंह से निकला- गलती हो गई


जौनपुर: पकड़ी चौराहे पर जब पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने अपने प्रतिद्वंद्वी राजदेव सिंह को आम लोगों, रिक्शे वालों और तांगे वालों के बीच बैठकर बीड़ी पीते देखा, तो उनके मुंह से तुरंत निकला-‘गलती हो गई, यह चुनाव मेरे लिए बहुत मुश्किल होगा.’ जनसंघ के इतिहास और जौनपुर की राजनीतिक पृष्ठभूमि को याद करते हुए जयप्रकाश सिंह ने एक बेहद दिलचस्प और ऐतिहासिक संस्मरण साझा किया है. उन्होंने बताया कि कैसे एक समय जनसंघ का गढ़ माने जाने वाले जौनपुर में जमीन से जुड़े एक नेता ने जनसंघ के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष पंडित दीनदयाल उपाध्याय को पटखनी दे दी थी.

जनसंघ का मजबूत गढ़ था जौनपुर

जयप्रकाश सिंह ने बताया कि आजादी के बाद से ही जौनपुर जनपद की पृष्ठभूमि जनसंघ के लिए बेहद अनुकूल रही थी और इसे जनसंघ का मजबूत गढ़ माना जाता था. जब यहाँ लोकसभा के मध्यावधि चुनाव घोषित हुए, तो चूंकि यह जनसंघ की सिटिंग सीट थी, इसलिए पार्टी ने अपने सबसे बड़े चेहरे और तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष पंडित दीनदयाल उपाध्याय को यहाँ से मैदान में उतारने का फैसला किया. उस समय पंडित जी संसद के सदस्य नहीं थे और जौनपुर को उनके लिए देश की सबसे सुरक्षित सीट माना जा रहा था.

जब कांग्रेस को नहीं मिल रहा था कोई उम्मीदवार

पंडित दीनदयाल उपाध्याय जैसी विशाल शख्सियत के जौनपुर से चुनाव लड़ने के एलान के बाद कांग्रेस खेमे में हड़कंप मच गया था. जयप्रकाश सिंह ने बताया कि कांग्रेस के पास पंडित जी के मुकाबले खड़ा करने के लिए कोई उम्मीदवार ही नहीं मिल रहा था. स्थानीय स्तर के किसी भी कांग्रेसी नेता की इतनी हिम्मत नहीं थी कि वह दीनदयाल उपाध्याय के सामने पर्चा दाखिल कर सके. कांग्रेस नेतृत्व लगातार मंथन कर रहा था कि आखिर इस बेजोड़, सादगी पसंद और सिद्धांतनिष्ठ नेता के सामने किसे उतारा जाए.

सोशलिस्ट पार्टी से बुलाकर राजदेव सिंह को दिया टिकट

जयप्रकाश सिंह ने खुलासा किया कि उस समय राजदेव सिंह कांग्रेस में थे ही नहीं, बल्कि वह ‘कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी’ में थे और उनका अपना एक अलग संगठन था. जब कांग्रेस के तमाम बड़े नेताओं ने चुनाव लड़ने से हाथ खड़े कर दिए, तब रणनीति बनी कि अगर राजदेव सिंह को राजी कर लिया जाए तो मुकाबला मुमकिन है. इसके बाद कांग्रेस ने विशेष परिस्थिति में राजदेव सिंह को बुलाकर टिकट थमाया और पंडित जी के खिलाफ मैदान में उतार दिया.

जब पंडित जी ने प्रतिद्वंद्वी को बीड़ी पीते देखा

जौनपुर आने के बाद पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने कौतूहलवश अपने कार्यकर्ताओं से पूछा कि वह देखना चाहते हैं कि उनका मुकाबला किससे है. जयप्रकाश सिंह बताते हैं कि जब लोग पंडित जी को लेकर निकले, तो ओलंदगंज के पकड़ी चौराहे पर एक हैरान करने वाला नजारा दिखा. राजदेव सिंह वहां बेहद साधारण तरीके से रिक्शे वालों, इक्के-तांगे वालों और आम जनता के बीच जमीन पर बैठे हुए थे, उनसे बातचीत कर रहे थे और हाथ में बीड़ी पी रहे थे. इस जमीनी पकड़ और जनता के बीच उनकी लोकप्रियता को देखकर पंडित जी भांप गए कि हवा का रुख क्या है. उन्होंने बिना किसी देरी के अपने करीबियों से कहा, “गलती हो गई, यह चुनाव मेरे लिए बड़ा मुश्किल हो गया है.”

हार-जीत से परे, ऐतिहासिक रहा वह चुनाव

जयप्रकाश सिंह ने कहा कि पंडित जी की वह भविष्यवाणी बाद में सच साबित हुई और उस चुनाव में कांग्रेस के राजदेव सिंह की जीत हुई. हालांकि, राजदेव सिंह चुनाव जरूर जीते, लेकिन जनसंघ के इतने बड़े पुरोधा पंडित दीनदयाल उपाध्याय का जौनपुर की धरती से चुनाव लड़ना और यहां का उम्मीदवार होना अपने आप में हमेशा के लिए ऐतिहासिक हो गया.



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