मऊ के इन 18 गांवों में अब चमकेगा पर्यटन! जानिए क्या कुछ होगा खास

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मऊ के इन 18 गांवों में अब चमकेगा पर्यटन! जानिए क्या कुछ होगा खास


मऊ: भारत की सभ्यता और संस्कृति को समझने के लिए अब ग्रामीण क्षेत्रों को पर्यटन से जोड़ा जाएगा. इसी कड़ी में शासन ने मऊ जिले के 18 धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की तैयारी शुरू कर दी है. पर्यटन विभाग ने इन स्थलों का सर्वे शुरू कर दिया है. सर्वे रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी, जिसके बाद इन स्थलों पर जरूरी सुविधाएं विकसित की जाएंगी.

इन पर्यटन स्थलों के विकसित होने से न सिर्फ गांवों की पहचान बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर भी मिलेंगे. साथ ही पर्यटक ग्रामीण जीवनशैली, प्राचीन विरासत और संस्कृति का भी अनुभव ले सकेंगे.

मऊ के कौन-कौन से स्थान होंगे विकसित
पर्यटन विभाग ने मऊ जिले के विभिन्न ब्लॉकों के 18 धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों को चयनित किया है. इनमें परदहा ब्लॉक के कोहिनूर ग्राम सभा स्थित मां वनदेवी धाम और महर्षि वाल्मीकि तपोस्थली शामिल हैं. मुहम्मदाबाद गोहना ब्लॉक के अंतर्गत देवकली देवलास का सूर्य मंदिर, चकजाफरी करहा गुरादरी धाम और बरहदपुर स्थित बाबा किशन दास मंदिर को चुना गया है. रानीपुर ब्लॉक में अमीरहा सखनी कुटी, सोनिसा ग्राम सभा में देइया माता स्थान, काझा में रामबन कुटी सीताकुंड को पर्यटन स्थल के रूप में चुना गया है.

बलरामपुर ब्लॉक के पकड़ी बुजुर्ग में नाता नईन देवी मंदिर को शामिल किया गया है. खालिसपुर क्षेत्र में आशापुर मंदिर नौसेमर और तमसा नदी के किनारे प्रसिद्ध 12 दुवरिया शिव मंदिर को भी चुना गया है. बिलौली सोनबरसा का लक्ष्मण धाम मंदिर भी इस सूची में शामिल है, जहां सावन महीने में दो महीने का विशाल मेला लगता है. रसौली ग्राम सभा का प्राचीन हनुमान मंदिर, दुबारी का वीर बाबा स्थान, तिघरा का भगवती देवी स्थान, बहादुरपुर ग्राम सभा का मासर ब्रह्मस्थान, कटघरा शंकर का शिव मंदिर, मर्यादपुर का देवी माता स्थान और पहाड़ीपुर का काली माता स्थान भी पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किए जाएंगे.

सूर्य मंदिर है बेहद खास 
देवकली देवलास का सूर्य मंदिर ऐतिहासिक महत्व रखता है. यहां गुप्तकालीन मूर्तियां मिलती हैं और दीपावली के छठे दिन बड़ा मेला लगता है. चकजाफरी करहा गुरादरी धाम में बाबा घनश्याम दास मंदिर स्थित है, जहां गुरु पूर्णिमा पर विशाल मेला लगता है. मंदिर के सामने बना सुंदर सरोवर कभी सूखता नहीं, यही इसकी खासियत है. बरहदपुर गांव का बाबा किशन दास मंदिर भी काफी प्रसिद्ध है. जनवरी महीने में यहां प्रवचन, रासलीला और धार्मिक आयोजन होते हैं.

ग्रामीण पर्यटन से मिलेगा रोजगार
पर्यटन विभाग के मुताबिक इन स्थलों को विकसित कर स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा. साथ ही देश-विदेश से आने वाले पर्यटक यहां की परंपरा, संस्कृति, स्थानीय व्यंजन और प्राकृतिक सुंदरता का अनुभव कर सकेंगे. भारत की प्राचीन सभ्यता और संस्कृति को करीब से जानने के लिए सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यटन को बढ़ावा दे रही है. इससे न केवल स्थानीय विकास होगा, बल्कि भारत की विरासत और परंपराएं भी दुनिया के सामने आएंगी.



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