मऊ में सदियों वर्ष पुराना है यह मंदिर सीता और वाल्मीकि से जुड़ा है इतिहास

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मऊ में सदियों वर्ष पुराना है यह मंदिर सीता और वाल्मीकि से जुड़ा है इतिहास


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मऊ जनपद के कहिनौर गांव में स्थित वनदेवी मंदिर को सीता माता, महर्षि वाल्मीकि और लव-कुश से जुड़ी पौराणिक आस्था का केंद्र माना जाता है. मान्यता है कि वनवास के दौरान सीता माता यहीं रहीं और इसी स्थान पर लव-कुश का जन्म हुआ. प्राचीन मंदिर के पास सरोवर में स्नान कर श्रद्धालु पूजा करते हैं और साल में एक बार यहां विशाल मेले का आयोजन होता है, जहां दूर-दूर से लोग अपनी मनोकामनाएं लेकर पहुंचते हैं.

मऊ. उत्तर प्रदेश को धार्मिक स्थल का गढ़ माना जाता है, प्रत्येक जनपदों में हर मंदिरों की अलग मानता है लेकिन पूर्वांचल के मऊ जनपद में वन देवी मंदिर का एक विशेष महत्व है. माना जाता है कि यह मंदिर महर्षि वाल्मीकि और सीता जी से जुड़ी हुई है इसी वन में कभी महर्षि वाल्मीकि और सीता  साथ रहती थी और यही लव और कुश का जन्म हुआ था. तब से इस मंदिर की एक अलग ही विशेषता मानी जाती है. लोकल 18 से बात करते हुए मंदिर के पुजारी स्वामीनाथ पांडेय बताते हैं कि यह मंदिर काफी प्राचीन मंदिर है और बताया जाता है कि यह महर्षि वाल्मीकि का आश्रम और लव और कुश की जन्म भूमि है. सीता माता महर्षि वाल्मीकि के इसी आश्रम में रहती थी.  इसी भूमि पर यज्ञ के दौरान राम ने जब यज्ञ का घोड़ा छोड़ा था तो लव और कुश ने यही उस घोड़े को पकड़ा था. वर्तमान में यहां माता सीता देवी का मंदिर स्थापित है और इसी के बगल में सरोवर स्थापित है, जहां लोग स्नान करते हैं और जो लोग स्नान कर घर से आते हैं इसी सरोवर में अपने हाथ पांव को धोकर आकर यहां इस वन देवी मंदिर पर पूजा पाठ करते हैं.

साल में एक बार लगता है विशाल मेला
मान्यता है कि इस सीता मां (वनदेवी) मंदिर पर सच्चे मन से जो कोई पूजा पाठ करता है उसकी हर मुराद पूरी होती है. महर्षि वाल्मीकि ने जब इस वन में सीता आई तो उनका नाम वन देवी रख दिए थे तभी से यहां इस मंदिर को लोक वनदेवी कहते हैं. इस मंदिर को लगभग 28 कोश के लोग कुल देवी मानते हैं और प्रत्येक साल यहां लोग आकर भाव पूजा पाठ करते हैं और कढ़ाई चढ़ाते हैं. साल में यहां एक बार विशाल मेले का आयोजन भी किया जाता है जहां मऊ जनपद के अलावा अन्य जनपद के लोग भी यहां आते हैं. यहां आकर पूजा पाठ करते हैं, क्योंकि इस वनदेवी माता का ऐसा चमत्कार है कि उस शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता.

वनवास के दौरान सीता इसी आश्रम में रहती थी
यह मंदिर मऊ मुख्यालय से लगभग 12 किलोमीटर दूर कहिनौर ग्राम सभा में स्थित है. यह मंदिर पूरी तरह से वन में बसा है, लेकिन इस मंदिर की मान्यता विशेष है जो पूरे भारत में आस्था का प्रतीक माना जाता है क्योंकि इस मंदिर से माता सीता और वाल्मीकि और लव और कुश से जुड़ा हुआ, यह स्थान है क्योंकि वनवास के दौरान सीता इसी भूमि पर महर्षि वाल्मीकि के आश्रम में रहती थी और यही लव और कुश को जन्म दिया था. तब से यहां वन देवी मंदिर को स्थापित किया गया है और लोग यहां बड़े ही श्रद्धा भाव से पूजा पाठ करते हैं.

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Monali Paul

नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें



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