महराजगंज का अमड़ी पुल अनोखे सिविल इंजीनियरिंग का नमूना, जहां नदी-नहर बहती हैं साथ
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महराजगंज जिले के भारत नेपाल सीमा से महज तीन किलोमीटर दूरी पर अमड़ी पुल देखने का मिलता है, जो अपनी अलग बनावट की वजह से बेहद खास हो जाता है. इसकी बनावट ऊपर से देखने में बहुत ही सामान्य लगती है लेकिन जब आप इसके किनारे से होते हुए नीचे उतर कर देखते हैं तो इसकी अलग बनावट हैरान कर देती है. यूं कहें तो यह पुल सिविल इंजीनियरिंग का एक नायब नमूना है, जो बहुत ही सूझबूझ और तकनीक का इस्तेमाल करते हुए बनाया गया है.
महराजगंज: कई बार हम कुछ ऐसी संरचनाओं और निर्माण शैली को देखते हैं, जो देखने में काफी सामान्य लगते हैं लेकिन उनकी आंतरिक बनावट को जानने के बाद अचंभित हो जाते हैं. खासकर ऐसे निर्माण हमें सामान्य तौर पर देखने को नहीं मिलते लेकिन जहां मिलते हैं. वह हमें सोचने पर मजबूर कर देते हैं. महराजगंज जिले में एक ऐसा ही पुराना पुल देखने को मिलता है जो आज भी लोगों को सोचने पर विवश कर देता है.
अमड़ी पुल की अद्भुत इंजीनियरिंग
महराजगंज जिले के भारत नेपाल सीमा से महज तीन किलोमीटर दूरी पर अमड़ी पुल देखने का मिलता है, जो अपनी अलग बनावट की वजह से बेहद खास हो जाता है. इसकी बनावट ऊपर से देखने में बहुत ही सामान्य लगती है लेकिन जब आप इसके किनारे से होते हुए नीचे उतर कर देखते हैं तो इसकी अलग बनावट हैरान कर देती है. यूं कहें तो यह पुल सिविल इंजीनियरिंग का एक नायब नमूना है, जो बहुत ही सूझबूझ और तकनीक का इस्तेमाल करते हुए बनाया गया है. इसकी बनावट ऐसी है कि पुल के ऊपर पश्चिमी गंडक नहर बहती है तो वहीं इसके ठीक नीचे छोटी गंडक नदी प्रवाहित होती है. ध्यान देने वाली बात है कि इसको इस तरह से बनाया गया है कि नहर और नदी दोनों का पानी आपस में बिना समाहित हुए निरंतर बहती रहती है
साइफन प्रणाली से हुआ है निर्माण
अमड़ी पुल की बात करें तो इसको साइफन प्रणाली के हिसाब से बनाया गया है. यही वजह है कि नहर और नदी दोनों का पानी बहुत ही सुचारू रूप से आपस में बिना मिले बहती रहती हैं. एक ही जगह पर नहर और नदी का पानी इस तरह अलग-अलग बहते हैं कि देखने में किसी अजूबे से कम नहीं लगता है. 1965 से 1970 के बीच में इसका निर्माण हुआ था. तत्कालीन समय में पश्चिम गंडक नहर प्रोजेक्ट के अंतर्गत देवरिया शाखा नहर निकालना था लेकिन बीच से छोटी गंडक नदी की जल प्रवाह एक बड़ी समस्या थी. ऐसे में नदी के पानी बंद करने पर बाढ़ की स्थिति पैदा हो सकती थी. इस समस्या से निपटने के लिए इंजीनियरों ने साइफन प्रणाली का प्रयोग करते हुए इस पुल का ढांचा तैयार किया था. फूल का ढांचा इस तरह से बनाया गया कि नदी का पानी भी अपनी प्रवाह में बना रहे और ऊपर से नहर का पानी भी प्रवाहित होता रहे. जिले में इस तरह के साइफन प्रणाली से बने पुल बहुत कम देखने का मिलते हैं जो अपने खास इंजीनियरिंग की वजह से लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र है.
नदी और नहर दोनों का पानी बिना एक दूसरे में मिले अपने अलग-अलग रास्ते से होकर आगे बढ़ती है. आगे जाकर देवरिया जिले के पास दोनों ही एक दूसरे में समाहित हो जाते हैं लेकिन महराजगंज जिले में इस साइफन प्रणाली से बने पुल की वजह से दोनों एक दूसरे में नहीं मिलते हैं. इस तकनीक को सिविल इंजीनियरिंग का एक अनोखा उदाहरण माना जाता है. महराजगंज जिले के अमड़ी पुल की बात करें तो पुल के नीचे पूरब से पश्चिम की दिशा में छोटी गंडक नदी बहती है तो वहीं पुल के ऊपर से उत्तर से दक्षिण दिशा में पश्चिम गंडक नहर प्रवाह देखने को मिलता है जो दोनों ही एक ही पुल से होकर गुजरते हैं.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें