महारानी कैकेयी ने सीता को मुंह दिखाई में भेंट किया था सोने का महल कनक भवन, जानें मान्यता

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महारानी कैकेयी ने सीता को मुंह दिखाई में भेंट किया था सोने का महल कनक भवन, जानें मान्यता


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भगवान श्रीराम के विवाह के बाद पूरी अयोध्या उत्सव में डूब गई थी. चारों ओर आनंद और उल्लास का वातावरण था. उस समय महारानी कैकेयी ने महाराज दशरथ से कहा कि वह अपनी नई बहू सीता को ऐसा उपहार देना चाहती हैं, जो युगों-युगों तक याद रखा जाए. तब महाराज दशरथ ने देवताओं के दिव्य शिल्पी को बुलाकर एक अद्भुत और स्वर्णिम महल का निर्माण करवाया. यह महल इतना भव्य और अलौकिक था कि जो भी उसे देखता, उसकी सुंदरता में खो जाता.

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अयोध्या:  धर्मनगरी अयोध्या में स्थित कनक भवन भगवान श्रीराम और माता सीता को समर्पित सबसे प्रसिद्ध और आस्था के प्रमुख केंद्रों में से एक है. देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालु रामलला के दर्शन के साथ कनक भवन में भी अवश्य पहुंचते हैं. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इस मंदिर का नाम कनक भवन क्यों पड़ा और इसके पीछे कौन-सी धार्मिक मान्यता जुड़ी हुई है.दरअसल धार्मिक ग्रंथों और लोक परंपराओं के अनुसार कनक का अर्थ सोना होता है.

मान्यता है कि भगवान श्रीराम और माता सीता के विवाह के बाद जब वे पहली बार अयोध्या पहुंचे, तब महारानी कैकेयी ने मुंह दिखाई की रस्म में माता सीता को सोने से निर्मित एक भव्य महल उपहार स्वरूप भेंट किया था. इसी स्वर्ण महल को आगे चलकर कनक भवन के नाम से जाना जाने लगा.

सीता को कनक भवन उपहार देना चाहते थे दशरथ

तपस्वी छावनी के पीठाधीश्वर जगद्गुरु परमहंस आचार्य बताते हैं कि भगवान श्रीराम के विवाह के बाद पूरी अयोध्या उत्सव में डूब गई थी. चारों ओर आनंद और उल्लास का वातावरण था. उस समय महारानी कैकेयी ने महाराज दशरथ से कहा कि वह अपनी नई बहू सीता को ऐसा उपहार देना चाहती हैं, जो युगों-युगों तक याद रखा जाए. तब महाराज दशरथ ने देवताओं के दिव्य शिल्पी को बुलाकर एक अद्भुत और स्वर्णिम महल का निर्माण करवाया. यह महल इतना भव्य और अलौकिक था कि जो भी उसे देखता, उसकी सुंदरता में खो जाता. बाद में कैकेयी ने वही स्वर्ण महल माता सीता को मुंह दिखाई में भेंट कर दिया और तभी से यह स्थान कनक भवन के नाम से प्रसिद्ध हो गया.

धार्मिक मान्यता है कि कनक भवन केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि भगवान श्रीराम और माता सीता का वास्तविक गृह है.यहां विराजमान श्रीसीताराम की प्रतिमाओं को अत्यंत दिव्य और मनोकामना पूर्ण करने वाला माना जाता है. श्रद्धालुओं का विश्वास है कि सच्चे मन से यहां दर्शन और पूजा करने पर वैवाहिक जीवन में सुख-शांति, पारिवारिक समृद्धि और मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है.

शानदार नक्काशी से बनकर तैयार

कनक भवन की भव्य स्थापत्य कला, सुंदर नक्काशी, विशाल प्रांगण और मनमोहक गर्भगृह श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभूति कराते हैं. सुबह-शाम होने वाली आरती, भजन-कीर्तन और विशेष पर्वों पर होने वाले धार्मिक आयोजन इसकी दिव्यता को और बढ़ा देते हैं. रामनवमी, विवाह पंचमी, दीपोत्सव और सावन जैसे अवसरों पर यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है. जगद्गुरु परमहंस आचार्य कहते हैं कि आज भी भक्तों की भावना यही रहती है कि कनक भवन दरवाजे पड़े रहियो, जहां बिराजे सियाराम डटे रहो उनका मानना है कि कनक भवन में स्वयं भगवान श्रीराम और माता सीता का साक्षात निवास है.

यही कारण है कि अयोध्या आने वाला शायद ही कोई श्रद्धालु ऐसा हो, जो कनक भवन के दर्शन किए बिना वापस लौटे. आस्था, इतिहास और पौराणिक मान्यताओं का अद्भुत संगम कनक भवन आज भी अयोध्या की आध्यात्मिक पहचान बना हुआ है.यह मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि श्रीराम और माता सीता के दिव्य दांपत्य जीवन की स्मृतियों का जीवंत प्रतीक माना जाता है.

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Rajneesh Kumar Yadav

Rajnish Kumar Yadav is a digital journalist and content publisher with over seven years of experience in print and digital media. He is currently working with News18 Digital (Local18) as a Content Publisher, wh…

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