महिला आरक्षण बिल: धर्मेंद्र यादव ने क्या कहकर सपा का स्टैंड क्लियर कर दिया?
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Samajwadi Party MP Dharmendra Yadav on Women Reservation Bill : समाजवादी पार्टी की सबसे अहम चिंता प्रतिनिधित्व के भीतर प्रतिनिधित्व यानी OBC, दलित और मुस्लिम महिलाओं की भागीदारी को लेकर है. धर्मेंद्र यादव के मुताबिक, जिस तरह से डिलिमिटेशन को जनगणना से अलग किया जा रहा है, यह संविधान की मूल भावना के खिलाफ है.
महिला आरक्षण बिल पर समाजवादी पार्टी का पक्ष रखते हुए धर्मेंद्र यादव ने रखा.
लखनऊ/नई दिल्ली : लोकसभा में पेश किए गए संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026, परिसीमन विधेयक 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक 2026 का समाजवादी पार्टी ने संसद में पुरजोर विरोध किया है. सांसद धर्मेंद्र यादव ने लोकसभा में इन तीनों विधेयकों की खिलाफत करते हुए इसे सीधे तौर पर संविधान की भावना के खिलाफ बताया. उन्होंने कहा कि संसद को संविधान की रक्षा का अधिकार दिया गया है, लेकिन मौजूदा बिलों के जरिए संविधान को तोड़ने-मरोड़ने की कोशिश की जा रही है. उनका सबसे बड़ा आपत्ति प्वॉइंट परिसीमन और जनगणना को अलग-अलग करना है. धर्मेंद्र यादव के मुताबिक, जिस तरह से डिलिमिटेशन को जनगणना से अलग किया जा रहा है, यह संविधान की मूल भावना के खिलाफ है.
महिला आरक्षण विधेयक को लेकर भी सपा ने समर्थन के साथ शर्तें जोड़ दी. धर्मेंद्र यादव ने कहा कि महिला बिल की चाशनी के नाम पर सरकार व्यापक बदलाव लाने की कोशिश कर रही है, जिसका असर पूरे देश पर पड़ेगा. उन्होंने कश्मीर और असम के उदाहरण देते हुए संकेत दिया कि केंद्र सरकार पहले भी संवैधानिक प्रावधानों में बड़े बदलाव कर चुकी है और यह बिल उसी दिशा में एक और कदम हो सकता है.
सपा की सबसे अहम चिंता प्रतिनिधित्व के भीतर प्रतिनिधित्व यानी OBC, दलित और मुस्लिम महिलाओं की भागीदारी को लेकर है. धर्मेंद्र यादव ने सदन में स्पष्ट कहा कि जब तक पिछड़े वर्ग और मुस्लिम समुदाय की महिलाओं को इस आरक्षण में शामिल नहीं किया जाएगा, तब तक समाजवादी पार्टी इसका समर्थन नहीं करेगी. यह मांग सीधे तौर पर कोटा के भीतर कोटा की बहस को मजबूत करती है, जो लंबे समय से भारतीय राजनीति का संवेदनशील मुद्दा रहा है.
इसके साथ ही उन्होंने कहा कि सपा में महिलाओं की भागीदारी अन्य दलों से ज्यादा है. यह बयान राजनीतिक रूप से यह संदेश देने की कोशिश भी है कि सपा महिला सशक्तिकरण के खिलाफ नहीं, बल्कि उसके समान और न्यायपूर्ण स्वरूप की पक्षधर है.
आखिर में धर्मेंद्र यादव ने सरकार से इन तीनों विधेयकों को वापस लेने और 2023 में पारित महिला आरक्षण से जुड़े प्रावधानों को पहले लागू करने की मांग की.
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