मानो लौट आए राम-जानकी, झूलनोत्सव में दिखा जीवंत रूप, आप भी हो जाएंगे मोहित
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Ram-Janaki Jhoolnotsav: रामनगरी में सावन झूलनोत्सव की प्राचीन परंपरा इन दिनों पूरे उत्साह और भक्ति के साथ निभाई जा रही है.आज अयोध्या के प्रमुख मठ-मंदिरों से भगवान के युगल सरकार की भव्य शोभायात्रा निकाली गई. गाजे-बाजे, भजन-कीर्तन और जय श्रीराम के जयघोष के बीच भगवान के विग्रह रथ पर सवार होकर मणि पर्वत पहुंचे.
मणि पर्वत पर भगवान राम और माता जानकी के झूलनोत्सव का आयोजन हुआ, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे.शोभायात्रा के दौरान रामनगरी का माहौल पूरी तरह भक्तिमय नजर आया. श्रद्धालु भगवान के दर्शन के लिए मार्गों पर खड़े रहे. जैसे-जैसे शोभायात्रा मणि पर्वत की ओर बढ़ी, वैसे-वैसे भक्तों की भीड़ भी बढ़ती गई रथ पर विराजमान युगल सरकार के दर्शन करने के लिए श्रद्धालुओं में खासा उत्साह दिखाई दिया. पूरे रास्ते भगवान के जयकारे गूंजते रहे और वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर रहा.
मणि पर्वत पहुंचने के बाद विधि-विधान और धार्मिक परंपराओं के अनुसार भगवान को झूले पर विराजमान कराया गया. इसके बाद झूलनोत्सव का शुभारंभ हुआ.भगवान राम और माता जानकी के झूला झूलने की परंपरा को देखकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे.बड़ी संख्या में भक्तों ने दर्शन किए और भगवान से सुख, समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना की.
रामानंद दास ने बताया कि मणि पर्वत पर होने वाला झूलनोत्सव अयोध्या की बेहद प्राचीन परंपरा का हिस्सा है. मान्यता है कि यह परंपरा त्रेता युग से चली आ रही है.आज भी रामलला सरकार को झूले पर विराजमान कराकर मणि पर्वत लाया जाता है.यहां झूलनोत्सव के बाद युगल सरकार को वापस मठ-मंदिरों में ले जाया जाता है, जहां अमावस्या तिथि तक भगवान झूले पर विराजमान होकर श्रद्धालुओं को दर्शन देते हैं.
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झूलनोत्सव के दौरान अयोध्या में त्रेतायुगीन परंपराओं की अद्भुत झलक देखने को मिलती है.रथों पर विराजमान भगवान के विग्रह, गाजे-बाजे की धुन, भजन-कीर्तन और भक्तों के जयकारे रामनगरी के आध्यात्मिक वातावरण को और खास बना देते हैं. श्रद्धालुओं के लिए यह केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि अयोध्या की सदियों पुरानी परंपरा और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने का अवसर भी है.
मणि पर्वत पर उमड़ा आस्था का सैलाब इस बात का प्रमाण है कि अयोध्या में प्राचीन धार्मिक परंपराएं आज भी पूरी श्रद्धा के साथ जीवंत हैं.भगवान राम और माता जानकी के झूलनोत्सव के माध्यम से रामनगरी में त्रेता युग की स्मृतियों को साकार करने का प्रयास किया जाता है.देश के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले श्रद्धालु इस दिव्य आयोजन में शामिल होकर युगल सरकार के दर्शन करते हैं और खुद को धन्य महसूस करते हैं.
सावन झूलनोत्सव के इस आयोजन ने एक बार फिर अयोध्या की धार्मिक भव्यता, आस्था और परंपरा की अनूठी तस्वीर पेश की. मणि पर्वत पर झूले पर विराजमान युगल सरकार के दर्शन के लिए देर तक भक्तों का तांता लगा रहा. जय श्रीराम के उद्घोष से पूरा परिसर गूंजता रहा और रामनगरी में भक्ति की अनुपम छटा देखने को मिली.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार त्रेता युग में भगवान श्रीराम और माता जानकी अयोध्या के मणि पर्वत पर झूला झूलते थे. इसी मान्यता और परंपरा को आज भी रामनगरी में श्रद्धा के साथ जीवंत रखा गया है. सावन के महीने में अयोध्या के अलग-अलग मठ और मंदिरों से भगवान के विग्रहों को शोभायात्रा के रूप में मणि पर्वत लाया जाता है.यहां युगल सरकार के झूलनोत्सव के बाद उन्हें वापस उनके संबंधित मठ-मंदिरों में ले जाया जाता है.
मणि पर्वत अयोध्या की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं में विशेष महत्व रखता है.सावन के दौरान यहां होने वाला झूलनोत्सव श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहता है. इस दौरान अयोध्या की गलियों और प्रमुख धार्मिक स्थलों पर उत्सव जैसा माहौल दिखाई देता है. मंदिरों में सजावट की जाती है और भगवान के विग्रहों को आकर्षक झूलों पर विराजमान कराया जाता है.