मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने का सस्ता उपाय, धान से पहले ढैंचा बोने से 20% तक बढ़ेगी पैदावार

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मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने का सस्ता उपाय, धान से पहले ढैंचा बोने से 20% तक बढ़ेगी पैदावार


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मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने का सस्ता उपाय, धान से पहले ढैंचा की करें खेती

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Benefits of Dhaincha Cultivation: बदलते वक्त के साथ खेतों की उपजाऊ क्षमता कम होती जा रही है. रासायनिक खादों के अंधाधुंध इस्तेमाल ने जमीन को बंजर सा बना दिया है. ऐसे में मिट्टी को उपजाऊ बनाने के लिए ‘हरी खाद’ के रूप में ढैंचा एक बेहतरीन विकल्प है. ढैंचा न केवल मिट्टी में नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ाता है, बल्कि अगली फसल की पैदावार में भी 15 से 20 प्रतिशत तक की ग्रोथ करता है. कम लागत और कम मेहनत में तैयार होने वाली यह फसल किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है. एक्सपर्ट का मानना है कि धान की रोपाई से पहले ढैंचा की बुवाई करने से खाद पर होने वाले खर्च में भारी कटौती की जा सकती है.

कृषि एक्सपर्ट डॉ. एन.पी. गुप्ता ने बताया कि ढैंचा की बुवाई का यह सबसे उपयुक्त समय है. उन्होंने बताया कि किसानों को प्रति एकड़ 18 से 20 किलोग्राम बीज का उपयोग करना चाहिए. इस फसल के लिए भारी जुताई या विशेष खाद की जरूरत नहीं होती, क्योंकि इसमें प्राकृतिक रूप से यूरिया यानि नाइट्रोजन मौजूद होता है.

अगर किसान ढैंचा फसल की ग्रोथ और बेहतर हरापन चाहते हैं, तो बहुत कम मात्रा में सुपर फास्फेट का छिड़काव कर सकते हैं. समय पर बुवाई और उचित नमी का ध्यान रखकर किसान न केवल मिट्टी की उर्वरता बचा सकते हैं, बल्कि अपनी आय में भी इजाफा कर सकते हैं.

ढैंचा की बुवाई के लिए खेत की बहुत गहरी जुताई की जरूरत नहीं होती है. सबसे पहले खाली पड़े खेत में हल्की सिंचाई करनी चाहिए. सिंचाई के तुरंत बाद जब मिट्टी में पर्याप्त नमी आ जाए, तब बीज बुवाई के लिए खेत तैयार माना जाता है. बस यह ध्यान रखें कि खेत में खरपतवार बहुत ज्यादा न हों. एक बार हल्की जुताई करके मिट्टी को भुरभुरा बना लेने से बीजों का अंकुरण बेहतर तरीके से होता है और जड़ें गहराई तक जाती हैं.

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ढैंचा की बुवाई मुख्य रूप से छिटकवां विधि से की जाती है. सबसे पहले खेत में बीजों को समान रूप से बिखेर दें. उसके बाद एक बार हल्की जुताई कर दें ताकि बीज मिट्टी के अंदर दब जाएं. अंत में समतल करने के लिए पटेला लगा दें ताकि नमी बनी रहे और बीज पक्षियों से सुरक्षित रहें.

अगर बारिश न हो, तो जमाव के बाद हर हफ्ते हल्की सिंचाई करते रहना चाहिए ताकि पौधों की लंबाई और मोटाई सही बनी रहे. बुवाई करते समय इस बात का विशेष ध्यान रखें कि खेत में नमी कम न हो, क्योंकि बिना नमी के जमाव प्रभावित हो सकता है.

ढैंचा की फसल में यूरिया डालने की बिल्कुल जरूरत नहीं होती, क्योंकि इसकी जड़ों में मौजूद ग्रंथियां हवा से नाइट्रोजन सोखकर जमीन में जमा करती हैं. अगर मिट्टी बहुत कमजोर है, तो केवल थोड़ा सा सुपर खाद डालना ही काफी है. समय रहते बुवाई करने से समय पर इसकी कटाई और पलटी हो जाती है, जिससे अगली मुख्य फसल की रोपाई में देरी नहीं होती.

ढैंचा को हरी खाद के रूप में उपयोग करने के अनगिनत फायदे हैं. यह मिट्टी की जैविक संरचना में सुधार करता है और जल धारण क्षमता को बढ़ाता है. जब ढैंचा के पौधों को फूल आने से पहले ही खेत में जोतकर दबा दिया जाता है, तो वे सड़कर उच्च गुणवत्ता वाली खाद में बदल जाते हैं. इससे रासायनिक खादों पर होने वाला खर्च कम होता है और मिट्टी की उपजाऊ क्षमता बढ़ती है.



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