मिर्जापुर में कभी राजभर वंश का हुआ करता था दबदबा, भारत भर में करते थे राज
Last Updated:
उत्तर प्रदेश का मिर्जापुर सिर्फ मां विंध्यवासिनी देवी की नगरी ही नहीं, बल्कि अपने भीतर सदियों पुरा इतिहास भी समेटे हुए है. स्थानीय इतिहासकारों के मुताबिक जिले के कंतित क्षेत्र का संबंध राजभर वंश और प्राचीन शासन से जुड़ा रहा है. यहां आज भी कई पुराने किलों और ऐतिहासिक स्थलों के अवशेष इस विरासत की गवाही देते हैं.
मिर्जापुर: उत्तर प्रदेश का मिर्जापुर शहर काफी ऐतिहासिक और प्राचीन शहरों में एक है. मां विंध्यवासिनी की नगरी मिर्जापुर का इतिहास पूरे भारत से जुड़ा हुआ है. यहां पर राजभर, गहरवार और अंग्रेजों ने राज किया. ऐतिहासिक तथ्यों के अनुसार मिर्जापुर जनपद में कभी राजभर का राज हुआ करता था, इन्हें भारशिव के नाम से जाना जाता था. राजभर वंश के लोगों ने मिर्जापुर जिले से पूरे देश पर राज किया था. उस समय मिर्जापुर जनपद भारत की राजधानी हुआ करता था. हालांकि, बदलते समय के साथ भौगोलिक परिस्थितियों बदली और मिर्जापुर सहित आसपास के क्षेत्र में गहरवार वंश का शासन काल आ गया. गहरवार वंश के आने के बाद राजभर जनपद छोडकर चले गए थे. आज भी उनके द्वारा निर्मित कई किले और प्राचीन स्थल मौजूद है.
मिर्जापुर जिला कभी भारत की राजधानी हुआ करती थी
जीडी बिनानी पीजी कॉलेज के प्रोफेसर डॉ. ध्रुवजी पांडेय ने बताया कि मिर्जापुर जिला कभी भारत की राजधानी हुआ करती थी. उस समय कांतिपुरम् के नाम से जाना जाता था. ऐतिहासिक तथ्यों व घटनाक्रमों में इस बात की पुष्टि मिलती है. ऐतिहासिक घटनाक्रमों के अनुसार तीसरी शताब्दी में भारशिव राजवंश का केंद्र पद्मावती यानी मथुरा से 125 किलोमीटर दूर ग्वालियर में था. यहां पर अपनी जड़ों को मजबूत करने के बाद उनका दबदबा मथुरा सहित प्रदेश के अन्य भागों में फैल गया, जिसके बाद भारतीय ने मथुरा में अपना विस्तार किया और मिर्जापुर के कंतित को भी अपने अधिपत्य में ले लिया था.
भारत में था चीन के क्षेत्र
ध्रुवजी पांडेय बताते हैं कि वर्तमान में कंतित को उसे जमाने में कांतिपुर जाना जाता था. कांतिपुर को भारशिव वंश के लोगों ने राजधानी बनाया. भारशिव वंश के सबसे महान राजा वीर सेन हुए थे. वीर सेन ने किसानों को परास्त करने के बाद तिब्बत, अरुणाचल प्रदेश व चीन के कुछ हिस्सों में भारत में समाहित कर लिया था. उनके अंदर अदम्य शक्ति, साहस और क्षमता थी, जिसके बाद उन्होंने भारत के मगध पाटलिपुत्र वैशाली सहित अन्य जगहों पर जीत हासिल किया. जीत हासिल करने के बाद उन्होंने मिर्जापुर यानी कांतिपुर को राजधानी घोषित किया था. दक्षिण भारत से लेकर उत्तर भारत तक फतेह करने के बाद मिर्जापुर 20 वर्षों तक देश की राजधानी रही.
भगवान शिव के थे भक्त
भारशिव वंश के लोग धर्मावलंबी थे. जानकारी के मुताबिक वो अपने सिर पर भगवान के शिवलिंग धारण करते थे. भगवान शिव के परम भक्त हुआ करते थे. भारशिव वंश को ही राजभर के नाम से जाना जाने लगा. कई पीढ़ियों ने भारत सहित अलग-अलग प्रांतों पर राज किया था. इनमें सबसे ज्यादा खास राज्य वीरसेन का रहा. गगन उपाध्याय ने बताया कि राजभर वंश द्वारा निर्मित किला आज भी मौजूद है. अब खंडहर हो गए. यह कभी शान हुआ करती थी.
About the Author
विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…और पढ़ें