मेरठ में बन रही चार इंच से 40 फीट तक की गणेश प्रतिमाएं, तीन महीने पहले ही मिल जाते हैं ऑर्डर

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मेरठ में बन रही चार इंच से 40 फीट तक की गणेश प्रतिमाएं, तीन महीने पहले ही मिल जाते हैं ऑर्डर


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Meerut News: गणेश चतुर्थी की पावन पर भगवान श्री गणेश के नए-नए अवतार की मूर्तियां भक्तों को काफी पसंद आ रही है. जिनकी लोग जमकर खरीदारी कर रहे हैं. यह सभी इको फ्रेंडली मूर्तियां तैयार की जा रही है. जिससे जब आप इ…और पढ़ें

मेरठः वर्तमान समय की अगर बात की जाए तो बाजार ट्रेंड के हिसाब से ही आगे बढ़ते हुए दिखाई दे रहे हैं. जिस तरह से लोगों की डिमांड और पसंद रहती है. उसी तरह की चीज भी बाजार में तैयार की जाती है. कुछ इसी तरह का नजारा गणेश चतुर्थी के पावन पर्व पर भी देखने को मिल रहा है. प्रजापति समाज द्वारा भगवान श्री गणेश की एक से बढ़कर एक मूर्ति तैयार की गई है. जिनके प्रति लोगों की काफी डिमांड है. ऐसे में लोकल-18 की टीम द्वारा मूर्ति निर्माण करने वाले प्रजापति समाज के अश्विनी से खास बात की गई.

लोकल 18 की टीम से खास बातचीत करते हुए मूर्ति बनाने वाले प्रजापति समाज के अश्विनी ने बताया कि बाजार में ट्रेंड के हिसाब से मूर्तियों का चलन रहता है. ऐसे में भगवान श्री गणेश के विभिन्न नए अवतार की मूर्तियां तैयार की गई है. जिनके प्रति भक्तों का काफी रुझान है. उन्होंने बताया कि मेरठ में तैयार होने वाली मूर्तियां मेरठ ही नहीं बल्कि देश भर के विभिन्न हिस्सों में सप्लाई होती है. यहां चार इंच की मूर्तियों से लेकर 40 फीट तक की मूर्तियां तैयार की जाती हैं. जो विभिन्न विशाल पंडाल में भक्तों द्वारा लगाई जाती है. इनकी कीमत की बात की जाए तो 150 रुपए से लेकर 40000 रुपए तक रहती है.

3 महीने पहले ही हो जाते हैं ऑर्डर बुक
मूर्ति बनाने वाले राज बताते हैं कि हर साल 3 महीने पहले ही मूर्तियां बनाने का आर्डर मिल जाता है. क्योंकि भगवान श्री गणेश की जो विशाल मूर्तियां हैं, उन्हें बनाते समय बारिश का भी विशेष रूप से ख्याल रखना पड़ता है. ऐसे में एक मूर्ति को तैयार करने में लगभग डेढ़ से 2 महीने का समय लग जाता है. इसलिए जितने भी आर्डर मिलते हैं, उन्हें लगातार बनाना शुरू कर दिया जाता है. जिस प्रकार मूर्ति तैयार होती चली जाती है, अलग-अलग कारीगर उन मूर्तियों में कलर से लेकर डिजाइन तक तैयार करने में लग जाते हैं.

इको फ्रेंडली है मूर्तियां
बताते चलें कि मेरठ की बनी मूर्तियों की डिमांड लोगों में काफी देखने को मिलती है. क्योंकि यहां मूर्ति बनाते समय विशेष रूप से ध्यान रखा जाता है. जिस तरह से सरकार द्वारा इको फ्रेंडली मूर्तियों पर विशेष रूप से फोकस किया जाता है. ऐसे ही यह मूर्तियां भी रहती है. जब इनको भक्तों द्वारा गंगा जी में समाहित किया जाता है. तो यह आसानी से घुल जाती है. इससे जलीय जीव जंतुओं को भी किसी भी प्रकार का कोई नुकसान नहीं होता है.

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मेरठ में बन रही चार इंच से 40 फीट तक की गणेश प्रतिमाएं, जानें खासियत



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