यूनिवर्सिटी और कॉलेज में ड्रेस कोड का विरोध शुरू, इस मौलाना ने उठाए सवाल

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यूनिवर्सिटी और कॉलेज में ड्रेस कोड का विरोध शुरू, इस मौलाना ने उठाए सवाल


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UP News: यूपी के यूनिवर्सिटी और डिग्री कॉलेजों में ड्रेस कोड के फैसले का विरोध भी शुरू हो गया है. दरूल उलूम देवबंद के मौलाना सुफियान निजामी ने कहा कि इस तरह के फैसले लेने से पहले सभी धर्मों के बारे में सोचना चाहिए था. उनका इशारा मजहबी लिबास हिजाब की तरफ था. उन्होंने कहा कि अगर किसी विशेष संस्कृति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से अगर ऐसा किया गया है तो उसका विरोध किया जाएगा.

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यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में ड्रेस कोड का विरोध शुरू

लखनऊ. उत्तर प्रदेश की राज्यपाल अनंदीबेन पटेल ने सभी यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में ड्रेस कोड लागू करने का फरमान जारी किया है. अब इस फरमान का विरोध भी शुरू हो गया है. इस मुद्दे पर दारुल उलूम देवबंद के प्रवक्ता मौलाना सुफियान निजामी ने कड़ा ऐतराज जताया है. उन्होंने कहा कि अभी तक किसी भी उच्च शिक्षण संस्थान में ड्रेस कोड लागू करने की कोई बात सामने नहीं आई है. मौलाना सुफियान ने कहा कि कोई भी नया नियम बनाने से पहले धार्मिक मुद्दों पर भी सोचना चाहिए. उनका इशारा मजहबी लिबास हिजाब की तरफ था. उन्होंने कहा कि हिजाब पहनना फंडामेंटल राइट है और इससे छेड़छाड़ नहीं होनी चाहिए.

मौलाना सुफियान निजामी ने कहा कि उन्होंने अब तक किसी विश्वविद्यालय या महाविद्यालय में ड्रेस कोड की कोई चर्चा नहीं सुनी है. उन्होंने स्पष्ट किया कि इस तरह की कोई पाबंदी अभी तक देखने को नहीं मिली है. शिक्षा संस्थानों में कोई भी नया नियम बनाते समय सभी धर्मों और समुदायों की संवेदनाओं को ध्यान में रखना चाहिए. उन्होंने जोर देकर कहा कि मजहबी लिबास, खासकर हिजाब, मौलिक अधिकारों से जुड़ा मुद्दा है और इसके साथ छेड़छाड़ नहीं होनी चाहिए.

विशेष संस्कृति को बढ़ावा देने का आरोप

मौलाना सुफियान निजामी ने कहा कि अगर कोई ड्रेस कोड किसी एक विशेष संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए बनाया गया है तो इस पर गंभीरता से विचार किया जायेगा. साथ ही उन्होंने ड्रेस कोड की नई व्यवस्था के विरोध की भी बात कही. मौलाना ने साफ किया कि शिक्षा का माहौल सभी छात्र-छात्राओं के लिए खुला और समावेशी होना चाहिए, न कि किसी एक संस्कृति को थोपने वाला. दरअसल, यूपी सरकार द्वारा कुछ विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में ड्रेस कोड लागू करने की खबरें सामने आने के बाद छात्र संगठनों और धार्मिक संगठनों में असंतोष बढ़ गया है. विपक्षी दलों ने भी इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर हमला बताया है.

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Amit Tiwariवरिष्ठ संवाददाता

अमित तिवारी, News18 Hindi के डिजिटल विंग में प्रिंसिपल कॉरेस्पॉन्डेंट हैं. वर्तमान में अमित उत्तर प्रदेश की राजनीति, सामाजिक मुद्दों, ब्यूरोक्रेसी, क्राइम, ब्रेकिंग न्यूज और रिसर्च बेस्ड कवरेज कर रहे हैं. अख़बार…और पढ़ें



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