यूपी का यह किला कभी था बंदरगाह, गंगा के रास्ते होता था व्यापार, कोलकाता तक जाता था सामान

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यूपी का यह किला कभी था बंदरगाह, गंगा के रास्ते होता था व्यापार, कोलकाता तक जाता था सामान


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Mirzapur News: मिर्जापुर का चुनार का किला प्राचीन इतिहास और व्यापार का केंद्र रहा है. मुगलों और अंग्रेजों ने इसे नियंत्रित किया. यह कभी बंदरगाह हुआ करता था. यहां से गंगा के रस्ते व्यापार होता था. रेल मार्ग शुर…और पढ़ें

मुकेश पांडेय/मिर्जापुर : उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में स्थित चुनार का किला प्राचीन और कई राजाओं के इतिहास की जीवंत कहानी है. मुगल से लेकर अंग्रेजों ने इसी किले से राज करके पूर्वी यूपी को कंट्रोल किया. किले का इतिहास राजाओं के साथ ही व्यवसाय से भी जुड़ा हुआ है. गंगा के रास्ते यहां से अलग-अलग जगहों पर सामान का आयात व निर्यात होता था. किले का बंदरगाह की तरह प्रयोग होता था. हालांकि, रेल मार्ग शुरू होने के बाद किले की एहमियत कम हुई और किले महज पर्यटकों का केंद्र रह गए. आज भी यहां देश ही नहीं बल्कि विदेशों से लोग आते हैं.

मिर्जापुर जिला प्राचीन जिलों में एक है. वाराणसी से नजदीक चुनार में राजा सहदेव ने किले का निर्माण किया. चुनार किले का निर्माण गंगा के तट पर हुआ है. पहले सड़क और रेल मार्ग नहीं होने से गंगा के रास्ते व्यवसाय होता था. मिर्जापुर के चुनार से कोलकाता के बीच व्यवसाय होता था. चूंकि, मिर्जापुर जिला वन और पाटरी (मिट्टी के उत्पाद) उद्योग के प्रसिद्ध था. यहीं वजह थी कि चुनार किले का प्रयोग बंदरगाह की तरह होता था और बड़ी-बड़ी नाव की मदद से यहां से सामान का निर्यात होता था.

आज भी है व्यवसाय का केंद्र

स्थानीय जानकार संजय दुबे ने लोकल 18 को  बताया कि वर्तमान में भी मिर्जापुर का इंडस्ट्रियल एरिया चुनार है. यहां पर इस्पात के साथ ही सीमेंट की फैक्ट्री है. हालांकि, व्यवसाय का केंद्र चुनार का किला प्राचीन समय से रहा है. यहां के किले पर अलग-अलग राजाओं ने राज किया, लेकिन बखूबी प्रयोग अंग्रेजों ने किया. चुनार किले से गंगा के रास्ते सामानों का आयात-निर्यात कोलकाता होता था. यहां के मिट्टी बर्तन उद्योग, लकड़ी के खिलौने व गुलाबी पत्थर से निर्मित मूर्तियों का निर्यात होता था.

रेल मार्ग शूरु होने के बाद कम हुई एहमियत

संजय दुबे ने बताया कि मिर्जापुर के लोगों के लिए जरूरी सामान का आयात भी गंगा के रास्ते कोलकाता से होता था. हालांकि, रेल मार्ग शुरू होने के बाद किले का महत्व कम हुआ. रेल से अधिकतर आयात और निर्यात होने लगें. जल मार्ग से नुकसान होता था और रेल से नुकसान कम हुआ. यहीं वजह है कि गंगा से व्यापार खत्म होने के बाद व्यवसायिक नजरिए से किले का महत्व कम हुआ. यह किला फेमस पर्यटक स्थलों में एक है.

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