राम मंदिर चंदा चोरी: सीजेआई सूर्यकांत ने कही एक बात, झट से मान गए तुषार मेहता
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Ram Mandir Daan Chori Supreme Court Hearing: राम मंदिर दान चोरी मामले में सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई हुई. कोर्ट में जांच के तरीके और नई एसआईटी को लेकर चर्चा हुई. हालांकि, सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने ऑर्डर नोट कराने के बाद सुनवाई को दो हफ्तों के लिए आगे बढ़ा दिया. इस दौरान सीजेआई ने सॉलिसिटर से याचिकाकर्ता की मांग को दोहराया जिस पर उन्होंने झट से मांग लिया.
राम मंदिर दान चोरी केस सुनवाई.
CJI Suryakant On Ram Mandir: राम मंदिर चंदा चोरी मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई की. इस सुनवाई के दौरान कई अहम टिप्पणियां की गईं. साथ ही नई गठित एसआईटी और उनके कार्यक्षेत्र को लेकर भी चर्चा किया गया. कोर्ट ने आज इस मामले पर फैसला नहीं सुनाया. बल्कि पूर्ण पारदर्शिता पर जोर दिया. सूर्यकांत ने जांच को लेकर एक अहम सुझाव दिया और सरकार का पक्ष रख रहे सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने बिना किसी बहस के झट से उसे मान लिया.
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि मामले की गहराई से जांच के लिए एक नई एसआईटी का गठन कर दिया है. इसकी कमान आईजी रैंक के अधिकारी किरण एस. को सौंपी गई है, जबकि टीम में एक डीआईजी, एक एसएसपी और एक अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शामिल हैं.
निष्पक्षता और फाइनेंसियल ट्रांस्परेंसी
इस पर याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि चूंकि मामला सीधे तौर पर वित्तीय गड़बड़ी और चंदा चोरी का है, इसलिए जांच की निष्पक्षता और फाइनेंसियल ट्रांस्परेंसी सुनिश्चित करने के लिए टीम में एक स्वतंत्र अकाउंटेंट का होना बेहद जरूरी है. सीजेआई सूर्यकांत ने जब इस मांग को दोहराते हुए कहा कि जांच में फॉरेंसिक ऑडिटर को भी शामिल किया जाए, तो सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इस पर तुरंत सहमति जताते हुए कहा, ‘बिल्कुल, उन्हें भी जांच दल में शामिल किया जाएगा.’
चंदा ट्रस्ट तक पहुंचा ही नहीं
याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत ने कोर्ट के सामने आम जनता की भावनाएं रखीं. उन्होंने कहा कि राम मंदिर निर्माण के लिए देशभर के करोड़ों लोगों ने अपनी असीम श्रद्धा से 500 और 1000 रुपये जैसी छोटी-छोटी राशियां दान की हैं, लेकिन बिचौलियों के गबन की वजह से यह पैसा कभी ट्रस्ट तक पहुंचा ही नहीं. कामत ने सुझाव दिया कि ट्रस्ट को मिलने वाले हर दान का पूरा विवरण एक सार्वजनिक वेबसाइट पर अपलोड किया जाना चाहिए, ताकि दानदाताओं को यह संतुष्टि मिल सके कि उनकी गाढ़ी कमाई सुरक्षित रूप से ट्रस्ट के पास पहुंच गई है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह कोई प्रतिद्वंद्वी (Adversarial) मामला नहीं है, बल्कि आस्था से जुड़ा विषय है.
कोर्ट ने मांगे लिखित सुझाव
सीजेआई सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट कर दिया है कि सुप्रीम कोर्ट फिलहाल इस मामले को बंद करने के मूड में बिल्कुल नहीं है. कोर्ट ने आश्वासन दिया कि SIT को इस मामले की जांच से जुड़े सभी जरूरी रिकॉर्ड और दस्तावेजों तक पूरी पहुंच मिलेगी. जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद कोर्ट द्वारा आवश्यक उचित कदम भी उठाए जाएंगे.
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