राष्ट्रपति ने अलीगढ़ के हकीम को खाने पर बुलाया, वजह जान पूरा जिला गदगद, बिहार की घास में लिपटी आई चिट्ठी 

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राष्ट्रपति ने अलीगढ़ के हकीम को खाने पर बुलाया, वजह जान पूरा जिला गदगद, बिहार की घास में लिपटी आई चिट्ठी 


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Aligarh News : हकीम साहब फूले नहीं समा रहे. राष्ट्रपति भवन से आए इस आमंत्रण को गौरवपूर्ण क्षण बताते हैं. कहते हैं- अब तक हजारों इनविटेशन आए हैं, विदेशों से भी. लेकिन ये वाला सबसे अलग और खूबसूरत है.

अलीगढ़. यूपी के अलीगढ़ के लिए ये गौरव की बात है. देश के प्रतिष्ठित यूनानी चिकित्सक और पद्मश्री सम्मानित हकीम प्रो. सैयद जिल्लुर रहमान को राष्ट्रपति की ओर से भोज के लिए बुलाया गया है. उन्हें स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्रपति भवन में आयोजित विशेष भोज में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया है. यह आमंत्रण उनके लिए ही नहीं, बल्कि पूरे अलीगढ़ और यूनानी चिकित्सा जगत के लिए गर्व की बात है. प्रो. जिल्लुर रहमान ने इस सम्मान को लेकर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि राष्ट्रपति भवन से आमंत्रण प्राप्त होना मेरे लिए अत्यंत गौरवपूर्ण क्षण है. मेरे पास अब तक हजारों निमंत्रण पत्र आए हैं. विदेशों से भी, लेकिन यह आमंत्रण पत्र सबसे अलग और खूबसूरत है. इसे डाक विभाग के कर्मचारियों ने बड़े आदर के साथ मेरे आवास पर पहुंचाया.

बिहार की सिक्की घास से तैयार

उन्होंने यह भी बताया कि वे इस खास मौके पर अपने बेटे प्रो. सैयद जियाउर रहमान के साथ राष्ट्रपति भवन जरूर जाएंगे. इस आमंत्रण की सूचना से न सिर्फ उनके परिवार, बल्कि पूरे क्षेत्र में खुशी का माहौल है. इस बार का आमंत्रण पत्र विशेष रूप से पारंपरिक भारतीय कला और शिल्प का अद्भुत नमूना है. यह कार्ड बिहार की प्रसिद्ध सिक्की घास से तैयार किया गया है. जो मधुबनी, दरभंगा और सीतामढ़ी क्षेत्रों में पाई जाती है. कार्ड के डिजाइन में पटना की टिकोली आर्ट, झारखंड की पेटकर पेंटिंग, ओडिशा का तालपत्र चित्र और पश्चिम बंगाल का पत्ता चित्र भी शामिल हैं. कार्ड के साथ भेजा गया दूसरे सामान भी हैंडमेड है, जो इसकी खासियत को और बढ़ाते हैं.

कौन हैं हकीम सैयद जिल्लुर

हकीम प्रो. सैयद जिल्लुर रहमान यूनानी चिकित्सा के क्षेत्र में देश और दुनिया में एक प्रतिष्ठित नाम हैं. वर्ष 2006 में उन्हें भारत सरकार ने पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया था. वे अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के तिब्बिया कॉलेज में करीब 40 वर्षों तक प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष रहे. उन्होंने इब्न सीना अकादमी ऑफ मीडिवल मेडिसिन एंड साइंसेज की स्थापना की और यूनानी चिकित्सा को एक नई दिशा देने में भूमिका निभाई. उनकी 45 से अधिक पुस्तकें यूनानी चिकित्सा पर आधारित हैं. उनके पास दुर्लभ यूनानी पुस्तकों का एक विशाल संग्रह भी मौजूद है.

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