वाराणसी में कजरी पाठशाला, मालिनी अवस्थी दे रहीं लोकगीत की शिक्षा, जेन-जी भी हुआ फैन
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Malini Awasthi Kajri Workshop in Varanasi: वाराणसी में गंगा की धार पर स्पेशल पाठशाला लगाई गई है. पद्मश्री लोक गायिका मालिनी अवस्थी देश-विदेश से आए 56 प्रतिभागियों को यहां कजरी की शिक्षा दे रही हैं. इस कार्यशाला में सिंगापुर, हैदराबाद, अहमदाबाद, दिल्ली, लखनऊ समेत कई शहरों के लोग शामिल हुए हैं और जेन-जी से लेकर 60 साल तक की महिलाएं इसमें दिलचस्पी दिखा रही हैं.
सावन के महीने में कजरी गीत की आवाज वाराणसी सहित आस पास के जिलों में सुनाई देती है. इसी पारंपरिक ‘कजरी’ गीत को अब देश विदेश में नई पहचान मिलेगी. इसके लिए वाराणसी में इन दिनों स्पेशल पाठशाला लगाई गई है. इस पाठशाला में पद्मश्री मालिनी अवस्थी देश-विदेश के संगीत प्रेमियों को इसकी शिक्षा दें रही है. गंगा की धार में ये अनोखी पाठशाला सज रही है.
कजरी की विरासत को सहेजने और पारंपरिक लोक गीतों को बढ़ावा देने के लिए ये अनूठा प्रयास किया जा रहा है. मिर्जापुर, चंदौली के बाद वाराणसी में इस पाठशाला को सजाया गया है. इस पाठशाला में 56 प्रतिभागी शामिल हुए है. यह प्रतिभागी सिंगापुर,हैदराबाद,अहमदाबाद, भागलपुर,दिल्ली,कानपुर,गोरखपुर, लखनऊ, सिवान समेत कई जिलों से आए है.बड़ी बात ये है कि इस पारंपरिक लोक गीत में हर उम्र के लोग दिलचस्पी दिखा रहें है.
जेन-जी ने भी दिखाई दिलचस्पी
लोकल-18 बातचीत में लोक गायिका पद्मश्री मालिनी अवस्थी ने बताया कि जेन-जी के लेकर 60 साल तक कि महिलाएं इस लोकगीत को सुनने,सीखने और समझने में दिलचस्पी दिखा रही है.इस विशेष कार्यशाला में उन्हें गायन के साथ ध्यान और योग का प्रशिक्षण दिया जा रहा है.उन्होंने बताया कि अच्छा गायक बनने के लिए मन को स्थिरता के साथ आत्मिक संतुलन भी जरुरी है.जो योग साधना से ही मिलता है.
गुरु शिष्य परम्परा की झलक
मालिनी अवस्थी ने बताया कि वो इस पाठशाला में शामिल सभी प्रतिभागियों से न केवल संवाद करती है.बल्कि अलग अलग समय पर उनके दुविधाओं को दूर भी करती है. यह कार्यशाला पूरी तरह से गुरु शिष्य परम्परा पर आधारित है. बताते चलें कि मालिनी अवस्थी ने काशी में ही रहकर ठुमरी गायिका गिरजा देवी से पारंपरिक लोकगीत की शिक्षा ली थी और अब वो अपने कर्मभूमि पर इसका प्रक्षिक्षण भी दें रही है.
मिर्जापुर से हुआ था कजरी का उद्गम
मालिनी अवस्थी ने बताया कि मिर्जापुर जिले से है पारंपरिक लोकगीत कजरी का उद्गम हुआ था.इसी लिए इस कार्यशाला में आयोजित सभी प्रतिभागियों को उन जगहों पर भी ले जाकर प्रकृति के इस सुंदर नजारे को दिखाया गया.
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काशी के बगल चंदौली से ताल्लुक रखते है. बिजेनस, सेहत, स्पोर्टस, राजनीति, लाइफस्टाइल और ट्रैवल से जुड़ी खबरें पढ़ना पसंद है. मीडिया में करियर की शुरुआत ईटीवी भारत हैदराबाद से हुई. अभी लोकल18 यूपी के कॉर्डिनेटर की…
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