शहद से सिरका बनाने की तकनीक विकसित, बाराबंकी के किसान का अनोखा इनोवेशन

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शहद से सिरका बनाने की तकनीक विकसित, बाराबंकी के किसान का अनोखा इनोवेशन


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बाराबंकी के दरावपुर गांव के रहने वाले अजीत कुमार ने शहद उत्पादन में कीर्तिमान स्थापित किया है. इसके साथ ही अपने नवाचार से सभी को चौंका दिया है. उन्होंने मधुमक्खी पालन से प्राप्त शुद्ध शहद से सिरका तैयार किया है…और पढ़ें

बाराबंकी जिले के दरावपुर गांव के मधुमक्खी पालक अजीत कुमार ने एक अनोखी पहल कर सबको चौंका दिया है. अजीत ने शहद से सिरका बनाने की नई तकनीक विकसित की है, जो जल्द ही बाजार में उपलब्ध होगी. अब तक गन्ना, सेब या जामुन से बने सिरके का उपयोग आम था, लेकिन शहद से बना सिरका एक नई शुरुआत है. अजीत का कहना है कि यह सिरका स्वादिष्ट होने के साथ-साथ सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद है.

अजीत कुमार मधुमक्खी पालन के क्षेत्र में पहले से ही एक सफल नाम हैं. उन्होंने 5 बॉक्स से शुरुआत की थी और आज उनके पास 2000 से अधिक मधुमक्खी कॉलोनियां हैं. वह अपनी पुश्तैनी जमीन पर यह कार्य कर रहे हैं और जिले के अन्य हिस्सों में भी मधुमक्खी पालन को बढ़ावा दे रहे हैं.

शहद से सिरका बनाना आसान नहीं था, लेकिन अजीत की मेहनत और लगन ने इसे संभव बना दिया, जिन लोगों ने इस सिरके को चखा है, उन्होंने इसे स्वाद और गुणवत्ता के लिहाज से बेहतरीन बताया है. अजीत का यह इनोवेशन मधुमक्खी पालकों के लिए एक नया व्यावसायिक अवसर बन सकता है.

अजीत ने मधुमक्खी पालन की नई तकनीकों को सीखने के लिए विदेशों के विशेषज्ञों से भी संपर्क किया. उन्होंने कृत्रिम गर्भाधान की तकनीक को अपनाकर देश में पहली बार मधुमक्खियों की इस विधि से प्रजनन कर दिखाया. इसके जरिए वह सामान्य उत्पादन की तुलना में दोगुना शहद प्राप्त कर रहे हैं, जिससे सालाना 30 से 35 लाख रुपये की आमदनी हो रही है.

उनकी यह उपलब्धि न सिर्फ बाराबंकी जिले को गौरवान्वित कर रही है, बल्कि यह साबित करती है कि मेहनत, नवाचार और नई सोच से किसी भी क्षेत्र में क्रांति लाई जा सकती है.

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