संभल हिंसा पर आयोग की रिपोर्ट में बड़े दावे, सांसद बर्क के बयान को बताया वजह
लखनऊ. संभल में 24 नवंबर 2024 को शाही जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान हुई हिंसा की की जांच करने वाले न्यायिक आयोग की रिपोर्ट अब सामने आ गई है. मंगलवार को यूपी कैबिनेट के सामने रिपोर्ट पेश की गई. करीब 450 पन्नों की यह रिपोर्ट अब विधानसभा के मानसून सत्र में सदन के पटल पर रखी जाएगी. आयोग अपनी जांच रिपोर्ट पिछले साल अगस्त में ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंप चुका था.
सूत्रों के मुताबिक, रिपोर्ट में कहा गया है कि हिंसा भड़कने की सबसे बड़ी वजह उस समय संभल से सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क का बयान था. रिपोर्ट के अनुसार, उनके बयान के बाद इलाके का माहौल तेजी से बिगड़ा और पठान और तुर्क समुदाय के बीच तनाव बढ़ गया. इसके बाद हुई फायरिंग में चार लोगों की मौत हुई थी.
संभल की आबादी को लेकर भी बड़ा दावा
रिपोर्ट में संभल की बदलती डेमोग्राफी का भी जिक्र किया गया है. सूत्रों के मुताबिक, आयोग ने दावा किया है कि आजादी के समय संभल नगर पालिका क्षेत्र में हिंदुओं की आबादी करीब 45 फीसदी थी, लेकिन अब यह घटकर करीब 15 फीसदी रह गई है. रिपोर्ट में कहा गया है कि लंबे समय तक दंगे, हिंसा, धर्मांतरण और दूसरी घटनाओं की वजह से यह बदलाव आया. हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है.
पहले हिंदू निशाने पर, फिर शुरू हुई पठान-तुर्क की लड़ाई
आयोग की रिपोर्ट में कहा गया है कि जब तक शहर में हिंदुओं की आबादी 40 फीसदी से ज्यादा थी, तब तक दंगे, लव जिहाद और धर्मांतरण जैसी घटनाओं के जरिए उन्हें निशाना बनाया जाता रहा. जब हिंदुओं की आबादी 20 फीसदी से नीचे पहुंच गई तो अब विवाद पठान और तुर्क समुदाय के बीच वर्चस्व की लड़ाई को लेकर शुरू हो गया. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दोनों समुदायों के बीच लंबे समय से तनाव बना हुआ था.
सांसद बर्क के बयान का भी जिक्र
रिपोर्ट में 22 नवंबर 2024 को दिए गए सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क के बयान का भी जिक्र किया गया है. आयोग के मुताबिक, बर्क ने कहा था कि हम इस देश के मालिक हैं, नौकर और गुलाम नहीं. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस बयान के बाद शहर का माहौल और ज्यादा खराब हो गया.
1936 से 2019 तक के दंगों का रिकॉर्ड भी शामिल
जांच रिपोर्ट में संभल के पुराने दंगों का भी जिक्र है. सूत्रों के मुताबिक, 1936 से 2019 के बीच शहर में 15 बड़े दंगे हुए, जिनमें 213 लोगों की मौत हुई. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इनमें 209 मृतक हिंदू थे. वहीं, 29 मार्च 1978 को होली के बाद हुई हिंसा में 184 हिंदुओं की जान गई थी. दूसरी ओर, रिपोर्ट के मुताबिक इन सभी दंगों और उपद्रवों में कुल चार मुस्लिमों की मौत हुई, जिनमें दो 1992 और दो 2019 की घटनाओं में मारे गए थे.
धार्मिक स्थलों पर कब्जे का भी जिक्र
आयोग की रिपोर्ट में कहा गया है कि संभल के कई धार्मिक स्थलों पर समय के साथ कब्जा किया गया. रिपोर्ट के मुताबिक, शहर में 68 तीर्थ स्थल और 19 पावन कुएं थे, जिन पर धीरे-धीरे अतिक्रमण हो गया.
विदेशी हथियार और पाकिस्तानी कनेक्शन का दावा
रिपोर्ट में गैंगस्टर शारिक साठा का भी जिक्र किया गया है. सूत्रों के मुताबिक, आयोग ने दावा किया है कि उसका संबंध पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी से जुड़े जाली नोट गिरोह से रहा है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि हिंसा के बाद पुलिस ने जो हथियार बरामद किए थे, उनमें एक विदेशी पिस्टल भी मिली थी, जिस पर ‘Made in USA’ लिखा था.