सहारनपुर से लखनऊ तक सारी ट्रेनें फुल, तो आखिर वंदे भारत में सीटें खाली कैसे?

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सहारनपुर से लखनऊ तक सारी ट्रेनें फुल, तो आखिर वंदे भारत में सीटें खाली कैसे?


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Saharanpur News: एक ओर सहारनपुर से लखनऊ जाने वाली सामान्य और एक्सप्रेस ट्रेनों में लंबी वेटिंग यात्रियों की परेशानी बढ़ा रही हैं, वहीं दूसरी ओर सहारनपुर-लखनऊ वंदेभारत एक्सप्रेस (26503/26504) यात्रियों के अभाव से जूझ रही है. आइए यात्रियों से इसके पीछे की वजह जानते हैं.

सहारनपुर: सहारनपुर से लखनऊ के लिए यात्री को बड़ी राहत देने के लिए दिसम्बर महीने में वंदे भारत ट्रेन चलाई गई थी, लेकिन इस वंदे भारत ट्रेन पर इन दिनों संकट के बादल नजर आ रहे हैं, क्योंकि जहां सभी ट्रेनें फुल चल रही हैं, वहीं यह वंदे भारत ट्रेन अभी भी खाली चल रही है. एक ओर सहारनपुर से लखनऊ जाने वाली सामान्य और एक्सप्रेस ट्रेनों में लंबी वेटिंग यात्रियों की परेशानी बढ़ा रही हैं, वहीं दूसरी ओर सहारनपुर-लखनऊ वंदेभारत एक्सप्रेस (26503/26504) यात्रियों के अभाव से जूझ रही है.

पीक सीजन के बावजूद ट्रेन की 60 से 75 फीसदी तक सीटें खाली चल रही हैं. लंबे दूरी का सफर करने वाले लोगों का कहना है कि महंगा किराया, केवल चेयरकार व्यवस्था और समय में सीमित बचत इसकी बड़ी वजहें हैं. दिसंबर 2025 में शुरू हुई सहारनपुर-लखनऊ वंदेभारत एक्सप्रेस को शुरुआत से ही अपेक्षित यात्री नहीं मिल सके.

अन्य ट्रेनों में वेटिंग
रेलवे की आरक्षण स्थिति के अनुसार 15 मई को ट्रेन में 316 सीटें उपलब्ध हैं. इसी प्रकार 16 मई को 387, 17 मई को 368, 18 मई को 399, 20 मई को 408, 21 मई को 411 और 22 मई को 405 सीटें खाली थीं. दूसरी ओर इसी रूट की अन्य ट्रेनों में लंबी वेटिंग बनी हुई हैं. चंडीगढ़-लखनऊ एक्सप्रेस के स्लीपर क्लास में 21 जून तक वेटिंग चल रही है, जबकि थर्ड एसी में 16 जून तक सीटें फुल हैं. वहीं नौचंदी एक्सप्रेस के स्लीपर क्लास में एक जून तक और थर्ड एसी में 26 मई तक वेटिंग चल रही है.

दोगुना किराया बना बड़ी वजह
लंबे रूट के यात्री संजय और रविंद्र के अनुसार, वंदे भारत का किराया सामान्य ट्रेनों की तुलना में काफी अधिक है. चंडीगढ़-लखनऊ एक्सप्रेस के थर्ड एसी का किराया करीब 845 रुपये है, जबकि वंदे भारत में यही सफर करीब 1540 रुपये में पड़ रहा है. लंबे सफर में लगातार चेयरकार में बैठकर यात्रा करना यात्रियों को असुविधाजनक लग रहा है. स्लीपर सुविधा नहीं होने से लोग दूसरी ट्रेनों को प्राथमिकता दे रहे हैं.

पैसे वालों के लिए चली ट्रेन
ट्रेन का संचालन लखनऊ जंक्शन की जगह गोमतीनगर तक होने से यात्रियों को अतिरिक्त सफर करना पड़ रहा है. जबकि लखनऊ से आगे सफर करने के लिए वंदे भारत ट्रेन की टाइमिंग में काफी फर्क है. जबकि वंदे भारत ट्रेन के किराए में वह सहारनपुर से बलिया तक पहुंच जाते हैं और उसमें लेटने की व्यवस्था भी होती है. इतना लंबा सफर बैठकर नहीं किया जा सकता. यह वंदे भारत ट्रेन मिडिल क्लास लोगों के लिए नहीं, बल्कि पैसे वाले लोगों के लिए चलाई गई है.

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आर्यन सेठ

आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए.



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