सुबह 3 से 5 बजे तक करें गायत्री-काली की तंत्र साधना,बदल जाएगी आपकी ऊर्जा चेतना

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सुबह 3 से 5 बजे तक करें गायत्री-काली की तंत्र साधना,बदल जाएगी आपकी ऊर्जा चेतना


जहां एक ओर युवाओं का ध्यान इंस्टाग्राम रील्स (Instagram Reels) और क्रिकेट स्कोर की तरफ है, वहीं गाजीपुर के कुछ युवाओं ने फोन में नया रास्ता खोजा है ‘तंत्र साधना’! जी हां, असली वाली साधना वो भी बिना किसी अंधविश्वास या डर के, पूरे डिजिटल और वैज्ञानिक तरीके से.

अब युवाओं के बीच तंत्र, ध्यान और मंत्रों की साधना एक नए रूप में जगी है. इसके पीछे है एक मोबाइल ऐप ‘तंत्र साधना’. इस ऐप के ज़रिए देशभर के लोग दस महाविद्याओं की असली साधना स्टेप-बाय-स्टेप सीख रहे हैं, जिसमें ना कोई ढोंग है, ना कोई डर, सिर्फ फोकस, एनर्जी और शांति.

क्या है ये तंत्र साधना?

तंत्र कोई टोना-टोटका नहीं, बल्कि भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा है, जिसमें ध्यान, आत्म-संयम और ऊर्जा पर काम होता है. ऐप में त्रिपुरसुंदरी से लेकर धूमावती तक हर महाविद्या की साधना, मंत्र उच्चारण, 3D विजुअल्स और गाइडेड मेडिटेशन के साथ सिखाई जाती है.

VSF का डिजिटल प्रयोग

इस ऐप को लाया है वैदिक साधना फाउंडेशन (VSF) ने, जिसे 2021 में ओम स्वामी ने शुरू किया था. संस्था की CEO प्रियंका आनंद कहती हैं  कि हम चाहते थे कि लोग तंत्र को डर से नहीं, समझ से अपनाएं. इसलिए, टेक का सहारा लिया.

गाजीपुर के श्याम सुंदर पाठक का दावा

लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती. गाजीपुर के श्याम सुंदर पाठक जो दशकों से तंत्र के मार्ग पर हैं, कहते हैं कि “काली साधना या गायत्री साधना अगर सुबह 3 से 5 बजे या शाम 6 से 9 बजे के बीच की जाए, तो इसका प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है. जो साधना मैं बताता हूं, वो दूर-दूर तक कोई नहीं सिखाता. मेरे पास साधक पूर्वांचल ,बनारस, जौनपुर से लोग आते हैं.

उनका मानना है कि तंत्र को समझने के लिए सही मार्गदर्शन जरूरी है और अब VSF जैसे डिजिटल साधन इस दिशा में युवाओं की मदद कर रहे हैं.

युवा क्या कहते हैं?

गाजीपुर के राजेश यादव और पशुपतिनाथ सिंह जैसे युवक बताते हैं कि वो “VSF के ऐप” से रोज सुबह ध्यान करते हैं. राजेश कहते हैं  “पहले तो डर लगता था इन चीज़ों से, लेकिन अब लगता है जैसे खुद से जुड़ रहा हूं.”

तो अब जब अगली बार सुबह 3 बजे नींद खुले तो उठिए और साधना शुरू कीजिए. हो सकता है आपकी ज़िंदगी की असली ऊर्जा वहीं छुपी हो.



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