‘सुरक्षित बाल ग्राम’ से बदलेगी तस्वीर! UP में बाल श्रम पर अंकुश की तैयारी
लखनऊ: बाल श्रम रोकथाम के लिए उत्तर प्रदेश सरकार तेजी से काम कर रही है और इस पर अंकुश लगाने के लिए प्रशासन को पूरी तरह मुस्तैद कर दिया है. वहीं कई नागरिक समाज संगठनों ने भी इसके रोकथाम के लिए अपना योगदान दिया है. देशभर में 250 से अधिक नागरिक समाज संगठनों के साथ और उत्तर प्रदेश में 29 साझेदार संस्थाओं के साथ काम कर रहे देश के सबसे बड़े बाल अधिकार नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (जेआरसी) ने राज्य सरकार के विभिन्न विभागों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ मिलकर बाल विवाह, बाल श्रम, बच्चों की ट्रैफिकिंग और बाल यौन शोषण के विरुद्ध व्यापक अभियान चलाया है.
साल 2025-26 के दौरान जेआरसी ने राज्य सरकार के सहयोग से ट्रैफिकिंग के शिकार और बाल मजदूरों को मुक्त कराने के लिए 3,805 अभियान संचालित किए, जबकि वर्ष 2023-24 में ऐसे अभियानों की संख्या 1,904 थी. इन सीधे हस्तक्षेपों के जरिए 5,000 से अधिक बच्चों को मुक्त कराया गया और अपराधियों के विरुद्ध 919 एफआईआर दर्ज किए गए. यह साल 2023-24 की तुलना में एक लंबी छलांग है, जब ऐसे मामलों में केवल 261 एफआईआर दर्ज हुई थीं. इसी अवधि में श्रम विभाग ने बाल श्रम से संबंधित 2,552 से अधिक मामलों में चालान जारी किए.
न्याय एवं संरक्षण दिलाने में सहयोग
इसी प्रकार, जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन नेटवर्क ने स्थानीय प्रशासन, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और पुलिस अधिकारियों के साथ जमीनी स्तर पर समन्वय स्थापित करते हुए 17,303 बाल विवाह रुकवाने में सफलता प्राप्त की. इनमें से अधिकांश मामलों में वर और वधू दोनों पक्षों के परिवारों से लिखित हलफनामे लेकर विवाह रोके गए. इसके अतिरिक्त, आठ बाल विवाह न्यायालय से निषेधाज्ञा (इंजंक्शन) आदेश प्राप्त कर, 30 पुलिस हस्तक्षेप के माध्यम से और 19 मामलों में एफआईआर दर्ज कर रोके गए. वहीं, बाल यौन शोषण के मामलों में भी नेटवर्क ने 1,076 बच्चों को न्याय एवं संरक्षण दिलाने में सहयोग प्रदान किया.
बाल विवाह पर सरकार की त्वरित कार्रवाई
बच्चों के विरुद्ध अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाने की दिशा में राज्य सरकार की बढ़ती प्रतिबद्धता और त्वरित कार्रवाई हाल के वर्षों में कानून प्रवर्तन एजेंसियों के अधिकारियों के लिए आयोजित व्यापक क्षमता-विकास कार्यक्रमों का भी परिणाम है. साल 2025-26 के दौरान जेआरसी ने राज्य में 1,585 कानून प्रवर्तन अधिकारियों को विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया. कानून के प्रभावी प्रवर्तन के साथ-साथ नेटवर्क ने रोकथाम आधारित उपायों को भी सुदृढ़ किया. इस दिशा में राज्य सरकार के सहयोग से 6,05,585 संवेदनशील और जोखिमग्रस्त परिवारों को विभिन्न सामाजिक कल्याण योजनाओं से जोड़ने में सहायता प्रदान की गई.
‘सुरक्षित बाल ग्राम’ लाएगा परिवर्तन
बच्चों के खिलाफ अपराधों की रोकथाम और उत्तर प्रदेश को बाल श्रम मुक्त बनाने की दिशा में उठाए गए कदमों की सराहना करते हुए जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के संस्थापक भुवन ऋभु ने कहा, ‘साल 2027 तक उत्तर प्रदेश को बाल श्रम-मुक्त बनाने के लिए राज्य सरकार ने जिस दृढ़ संकल्प का प्रदर्शन किया है, उसके लिए सभी को हार्दिक बधाई के अधिकारी हैं. विकसित भारत का निर्माण तभी संभव है, जब प्रत्येक बच्चा शिक्षित, सुरक्षित और सशक्त हो. राज्य सरकार के सहयोग से स्थापित किए जा रहे 20,000 से अधिक ‘सुरक्षित बाल ग्राम’ इस बात का सशक्त उदाहरण दिखाएंगे कि पूरी सरकार और पूरे समाज के समन्वित प्रयासों से कितना व्यापक परिवर्तन लाया जा सकता है.’
उन्होंने आगे कहा, ‘ये बाल ग्राम न केवल भारत, बल्कि पूरे विश्व के लिए एक आदर्श मॉडल बनेंगे, जो यह दिखाएंगे कि जनभागीदारी से किस प्रकार मिलकर प्रत्येक बच्चे को हम विद्यालय में बनाए रख सकते हैं, उसे बाल श्रम से मुक्त रख सकते हैं और उसकी पूर्ण क्षमता के विकास का अवसर सुनिश्चित कर सकते हैं. बाल श्रम के लिए बच्चों की ट्रैफिकिंग आज तेजी से संगठित अपराध का रूप ले रही है. ऐसे समय में माननीय योगी जी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार का यह निर्णायक कदम इस चुनौती के विरुद्ध एक संगठित और सशक्त उत्तर है, जिसकी आज सबसे अधिक आवश्यकता है.’