10 महीने में 49 मुलाकातें… भाई अली ही था अबान की पूरी दुनिया, 50वीं बार आ रहा था मिलने

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10 महीने में 49 मुलाकातें… भाई अली ही था अबान की पूरी दुनिया, 50वीं बार आ रहा था मिलने


Atiq Ahmed Son Abaan Love Brother Ali: झांसी हाईवे पर हुए सड़क हादसे में जान गंवाने वाले अबान अहमद को लेकर हर दिन नई-नई जानकारियां सामने आ रही हैं. कहीं उसके आखिरी शब्द चर्चा में हैं तो कहीं उसके अधूरे सफर की कहानी. लेकिन इन सबके बीच एक ऐसा पहलू भी सामने आया है, जिसने लोगों को भावुक कर दिया. बताया जा रहा है कि पिता अतीक अहमद की हत्या और परिवार के बिखरने के बाद अबान का सबसे ज्यादा लगाव अपने बड़े भाई अली अहमद से था. यही वजह थी कि वह बार-बार प्रयागराज से झांसी तक करीब 400 किलोमीटर का सफर तय कर जेल में उससे मिलने पहुंचता था. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले 10 महीनों में उसने 49 बार भाई से मुलाकात की थी. गुरुवार को भी वह उसी मुलाकात के लिए निकला था, लेकिन मंजिल तक पहुंचने से पहले ही जिंदगी ने उसका साथ छोड़ दिया. समझते हैं पूरी बात.

अतीक की मौत के बाद अली ही बन गया सबसे बड़ा सहारा

15 अप्रैल 2023 को प्रयागराज में अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की हत्या कर दी गई थी. इससे दो दिन पहले तीसरे बेटे असद अहमद की झांसी में एसटीएफ एनकाउंटर में मौत हो चुकी थी. मां शाइस्ता परवीन आज भी फरार है. बड़े भाई उमर लखनऊ जेल में बंद हैं, जबकि दूसरे नंबर के बेटे अली अहमद को सुरक्षा कारणों से नैनी जेल से झांसी जिला जेल शिफ्ट कर दिया गया था. परिवार लगातार बिखरता चला गया. ऐसे में मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अबान का सबसे ज्यादा लगाव अपने बड़े भाई अली से हो गया. परिवार के करीबी लोगों का कहना है कि दोनों भाइयों के बीच बेहद गहरा रिश्ता था और अबान अक्सर उससे मिलने झांसी जाया करता था.

10 महीने में 49 बार पहुंचा झांसी जेल

रिपोर्ट्स के मुताबिक, अली के झांसी जेल शिफ्ट होने के बाद पिछले करीब 10 महीनों में अबान ने 49 बार उससे मुलाकात की. हर बार वह प्रयागराज से करीब 400 किलोमीटर का सफर तय कर झांसी पहुंचता था. लंबी दूरी और कई घंटे का सफर उसके लिए मायने नहीं रखता था. उसके लिए सबसे अहम था अपने भाई से मिलना. बताया जाता है कि परिवार पर आए संकट के बाद दोनों भाइयों के बीच भावनात्मक रिश्ता और मजबूत हो गया था. यही वजह थी कि जेल की मुलाकातें लगातार जारी रहीं.

50वीं मुलाकात के लिए निकला था, लेकिन…

6 अगस्त 2026 की सुबह भी अबान अपने कुछ दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ झांसी के लिए निकला था. बताया जा रहा है कि वह भाई अली के लिए दो किताबें भी साथ लेकर जा रहा था. लेकिन झांसी पहुंचने से करीब 70 किलोमीटर पहले पूंछ थाना क्षेत्र के खिल्ली गांव के पास हाईवे पर उसकी क्रेटा कार हादसे का शिकार हो गई. प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, अचानक एक बछड़ा सड़क पर आ गया. उसे बचाने की कोशिश में कार बेकाबू होकर सड़क किनारे बनी कंक्रीट की दीवार से जा टकराई. टक्कर इतनी भीषण थी कि कार के परखच्चे उड़ गए. हादसे में अबान और उसके दोस्त सोनू की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि तीन अन्य लोग घायल हो गए.

‘मेरा नाम अबान है… मुझे बचा लो’

स्थानीय लोगों ने बताया कि हादसे के बाद कार के दरवाजे जाम हो गए थे. लोगों ने लोहे की रॉड से दरवाजे तोड़कर घायलों को बाहर निकाला. इसी दौरान गंभीर रूप से घायल अबान ने सिर्फ इतना कहा, “मेरा नाम अबान है… मुझे बचा लो.” कुछ ही क्षण बाद उसकी सांसें थम गईं.

अली तक पहुंची छोटे भाई की मौत की खबर

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, झांसी जेल में बंद अली अहमद को जैसे ही अबान की मौत की सूचना मिली, वह फूट-फूटकर रो पड़ा. बताया जाता है कि दोनों भाइयों के बीच बेहद गहरा लगाव था. जिस भाई का वह इंतजार कर रहा था, उसी की मौत की खबर जेल के अंदर पहुंची.

अब अतीक के पांच बेटों में कौन कहां है?

अतीक अहमद के पांच बेटों में सबसे बड़े उमर अहमद लखनऊ जेल में बंद हैं. दूसरे नंबर के बेटे अली अहमद झांसी जेल में हैं. तीसरे बेटे असद अहमद की 2023 में पुलिस एनकाउंटर में मौत हो गई थी. चौथे बेटे अहजम अहमद अपनी बुआ की देखरेख में रह रहे हैं. अब सबसे छोटे बेटे अबान अहमद की भी सड़क हादसे में मौत हो चुकी है.

एक मुलाकात जो हमेशा के लिए अधूरी रह गई

कहा जाता है कि कुछ रिश्ते शब्दों से नहीं, सफर से समझे जाते हैं. अबान अहमद की कहानी भी कुछ ऐसी ही रही. पिछले 10 महीनों में उसने 49 बार सिर्फ अपने भाई से मिलने के लिए सैकड़ों किलोमीटर का सफर तय किया. 50वीं बार भी वह उसी उम्मीद के साथ निकला था, लेकिन इस बार मंजिल तक पहुंचने से पहले ही जिंदगी का सफर खत्म हो गया.



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