1857 की क्रांति में मेरठ के कोतवाल का शौर्य, आजादी के लिए दी थी अहम कुर्बानी
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1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में मेरठ की भूमिका ऐतिहासिक और निर्णायक रही. इसी धरती से क्रांति की चिंगारी फूटी, जिसने पूरे देश में आजादी की लहर जगा दी. मेरठ के सदर थाने में तैनात कोतवाल धनसिंह गुर्जर ने अंग्…और पढ़ें
लोकल-18 की टीम ने कोतवाल धनसिंह गुर्जर के वंशज तस्वीर सिंह चपराना से खास बातचीत की, जिसमें उन्होंने अपने पूर्वज की वीरता के कई किस्से साझा किए.
तस्वीर सिंह चपराना के अनुसार, 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के दौरान जब 85 भारतीय सैनिकों ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ विद्रोह किया, तो उन्हें मेरठ की विक्टोरिया पार्क जेल में कैद कर दिया गया. इसकी खबर मिलते ही कोतवाल धनसिंह गुर्जर ने आसपास के गांवों में संदेश भेजा और एक रणनीति बनाकर क्रांतिकारियों के साथ विक्टोरिया पार्क जेल पर हमला बोल दिया. इस हमले में उन्होंने न सिर्फ 85 सैनिकों को बल्कि 800 से अधिक क्रांतिकारियों को भी मुक्त कराया और फिर सभी दिल्ली की ओर कूच कर गए.
अंग्रेजों के लिए भय का कारण था मेरठ
चपराना बताते हैं कि मेरठ के लोग हमेशा स्वतंत्रता संग्राम की अगुवाई में आगे रहे. अंग्रेजी हुकूमत मेरठवासियों से डरती थी। कोतवाल धनसिंह के नेतृत्व में हुए हमले के बाद अंग्रेजों ने एक विशेष जांच आयोग गठित किया और आंदोलन को दबाने के लिए उनके पैतृक गांव पांचली खुर्द में क्रांतिकारियों को तोप से उड़ा दिया. आज भी यह गांव उस बलिदान की गवाही देता है.
मेरठ का हर कोना गवाही देता है क्रांति की
मेरठ का औघड़नाथ मंदिर, सदर थाना, विक्टोरिया पार्क, क्षेत्रीय श्री गांधी आश्रम, सूरजकुंड पार्क जैसे कई ऐतिहासिक स्थल आज भी उस दौर की यादें संजोए हुए हैं, जहां स्वतंत्रता के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए गए थे.