2 मुर्रा भैंसों से शुरू करें मिनी डेयरी, कम बजट में हर महीने कमाएं ₹50 हजार
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Murrah Buffalo Dairy Farming: अगर आप कम बजट में अपना डेयरी कारोबार शुरू करने की सोच रहे हैं, तो बड़े सेटअप के बजाय सिर्फ दो अच्छी नस्ल की दुधारू मुर्रा भैंसों से मिनी डेयरी की शुरुआत कर सकते हैं. सही देखभाल और संतुलित खान-पान से यह छोटा सा प्रयास हर महीने एक शानदार और स्थिर कमाई का जरिया बन सकता है. आइए जानते हैं दो मुर्रा भैंसों से डेयरी फार्मिंग शुरू करने का पूरा गणित, खर्च और मुनाफे की सटीक जानकारी.
डेयरी फार्म शुरू करने के लिए जरूरी नहीं कि आपके पास शुरुआत से ही 10-15 पशु हों. अगर बजट सीमित है तो दो अच्छी दुधारू भैंसों से भी छोटे स्तर पर शुरुआत की जा सकती है. इसमें मुर्रा नस्ल की भैंस एक लोकप्रिय विकल्प मानी जाती है. यह नस्ल अपनी अच्छी दूध उत्पादन क्षमता के लिए देशभर में जानी जाती है और डेयरी कारोबार में इसका इस्तेमाल बड़े पैमाने पर किया जाता है.
मुर्रा भैंस मुख्य रूप से हरियाणा और पंजाब क्षेत्र से जुड़ी नस्ल है, लेकिन अब देश के कई हिस्सों में इसका पालन किया जाता है. इसकी पहचान घुमावदार सींग, मजबूत शरीर और अच्छी दूध देने की क्षमता से होती है. हालांकि, हर भैंस का दूध उत्पादन उसकी नस्ल के साथ-साथ उम्र, स्वास्थ्य, ब्यांत, खान-पान और देखभाल पर निर्भर करता है. इसलिए सिर्फ नस्ल देखकर निश्चित मात्रा में दूध मिलने की गारंटी नहीं मानी जा सकती.
अच्छी दुधारू मुर्रा भैंस से दूध उत्पादन काफी अच्छा हो सकता है. कुछ पशु रोजाना 15 लीटर या उससे अधिक दूध भी दे सकते हैं, लेकिन वास्तविक उत्पादन पशु के अनुसार अलग-अलग होता है. अगर दो भैंसें औसतन 15 से 18 लीटर प्रतिदिन दूध दें, तो कुल उत्पादन करीब 30 से 36 लीटर तक पहुंच सकता है. यही मात्रा छोटे स्तर की मिनी डेयरी के लिए अच्छी शुरुआत बन सकती है.
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मान लीजिए दो भैंसों से रोजाना करीब 30 लीटर दूध मिलता है और स्थानीय बाजार में दूध 50 से 60 रुपये लीटर के आसपास बिकता है. इस हिसाब से रोजाना सकल बिक्री करीब 1,500 से 1,800 रुपये हो सकती है. महीने में यह रकम लगभग 45 से 54 हजार रुपये तक पहुंच सकती है. अगर चारा, खली, भूसा, पशु चिकित्सा, पानी और देखभाल जैसे खर्च भी निकाल दिए जाएं, तो भी अच्छी-खासी शुद्ध कमाई महीने की हो जाएगी.
डेयरी कारोबार में पशुओं का चारा सबसे महत्वपूर्ण खर्चों में शामिल होता है. दूध अच्छा चाहिए तो भैंस को सिर्फ सूखा भूसा खिलाना पर्याप्त नहीं है. हरा चारा, सूखा चारा और जरूरत के मुताबिक संतुलित आहार देना जरूरी होता है. अगर पशुपालक के पास अपनी जमीन है और वह कुछ हरा चारा खुद तैयार कर लेता है, तो बाजार से खरीदारी का खर्च कम किया जा सकता है. साथ ही साफ पानी की पर्याप्त व्यवस्था रखना भी जरूरी है, क्योंकि पानी की कमी से पशु के स्वास्थ्य और दूध उत्पादन पर असर पड़ सकता है.
डेयरी में कमाई सिर्फ दूध बेचने से ही नहीं होती; अच्छी नस्ल की भैंस से पैदा होने वाले स्वस्थ बछड़े भी आगे चलकर पशुपालक के लिए अतिरिक्त आमदनी का जरिया बन सकते हैं. जरूरत के मुताबिक इन्हें पालन के लिए रखा या उचित समय पर बेचा जा सकता है. इसके अलावा पशुओं के लिए साफ, हवादार और पर्याप्त जगह होना जरूरी है. फर्श ऐसा हो कि पानी जमा न हो और पशुओं को आराम से बैठने-उठने की जगह मिले. इससे उनकी सेहत और दूध उत्पादन दोनों बेहतर रखने में मदद मिलती है.
मिनी डेयरी की शुरुआत दो भैंसों से करने का फायदा यह है कि पशुपालक पहले छोटे स्तर पर पूरा सिस्टम समझ सकता है. रोजाना कितना दूध निकल रहा है, कितना चारा लग रहा है और बिक्री से कितनी रकम आ रही है, इसका हिसाब आसानी से रखा जा सकता है. अगर आमदनी और खर्च का संतुलन ठीक रहता है, तो आगे तीसरी या चौथी भैंस जोड़ने पर विचार किया जा सकता है. इस तरह बिना जल्दबाजी के धीरे-धीरे डेयरी को बड़े कारोबार में बदला जा सकता है.